जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का है अभियान : उपायुक्त डॉ. विरेंद्र कुमार दहिया
मेरा पानी, मेरी विरासत” से बदलेगी खेती की तस्वीर
जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी किसानों की आय
धान के विकल्प अपनाएं, सरकार देगी प्रोत्साहन राशि, किसानों के लिए सुनहरा अवसर
भूजल बचाने और किसानों को समृद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम, “मेरा पानी, मेरी विरासत” योजना पर जोर
पानी बचाओ, भविष्य संवारो: कम पानी वाली फसलों पर सरकार का विशेष प्रोत्साह
BOL PANIPAT , 31 मई। हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी “मेरा पानी, मेरी विरासत” योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए उपायुक्त डॉ. विरेंद्र कुमार दहिया ने कहा है कि यह योजना जल संरक्षण और किसानों की आर्थिक मजबूती का प्रभावी माध्यम साबित हो रही है। लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उपायुक्त ने बताया कि खरीफ 2026 सीजन के लिए इस योजना को लागू किया गया है। योजना के तहत धान की अधिक पानी खपत वाली फसल के स्थान पर मक्का, कपास, दलहन, तिलहन, चारा फसलें, बागवानी तथा कृषि वानिकी जैसी कम पानी वाली फसलें उगाने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
उपायुक्त डॉ दहिया ने बताया कि दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 2 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जो किसान धान की खेती न करके अपनी भूमि खाली छोड़ते हैं, उन्हें भी योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जाएगा।
डॉ. दहिया ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का अभियान है। धान की खेती में अत्यधिक भूजल का उपयोग होता है, जबकि वैकल्पिक फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन और आय प्रदान करती हैं। ऐसे में किसानों को फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उपायुक्त डॉ दहिया ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और योजनाओं के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। किसान “मेरी फसल-मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर पंजीकरण कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
उपायुक्त ने किसानों से अपील की कि वे जल संरक्षण के इस अभियान में सहभागी बनें और कम पानी वाली फसलों को अपनाकर प्रदेश के भूजल संसाधनों को बचाने में अपना योगदान दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों के सहयोग से यह योजना जल बचत और कृषि समृद्धि का नया अध्याय लिखेगी।

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