एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अन्तराष्ट्रीय गणित दिवस/ विश्व पाई दिवस पर वेब परिचर्चा का आयोजन
– डॉ दिनेश मदान चेयरमैन गणित विभाग एवं पूर्व परीक्षा नियंत्रक चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी भिवानी ने किया विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन
– 14 मार्च की तारीख गणित प्रेमियों के लिए एक विशिष्ट तिथि है: डॉ दिनेश मदान
– जीवन जीने की कला सीखने की पहली सीढ़ी है कॉलेज: राजीव कौशिक, निदेशक डाटा एनालिटिक्स एंड बिज़नस इंटेलिजेंसगार्डन्स एलाइव वाटरलू, कनाडा
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अन्तराष्ट्रीय गणित दिवस/विश्व पाई दिवस हर्षौल्लास और गूढ़-मंथन भाव के साथ मनाया गया. इस अवसर पर वेब परिचर्चा का आयोजन करके छात्र-छात्राओं के ज्ञान में वृद्धि की गयी. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ दिनेश मदान विभागाध्यक्ष गणित विभाग एवं पूर्व परीक्षा नियंत्रक चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी भिवानी रहे. कॉलेज के एमएससी एवं बीएससी के छात्र-छात्राओं ने डॉ मदान के रोचक व्यक्तव्य को ध्यान से सुना और अपने प्रश्नों के सटीक उत्तर पाकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया. सबसे बड़ा और खूबसूरत इतेफाक यह रहा की कॉलेज के ही पूर्व विद्यार्थी एवं एलुमिनाई राजीव कौशिक जो वर्तमान में वाटरलू कनाडा में गार्डन्स एलाइव संगठन में बतौर निदेशक डाटा एनालिटिक्स एंड बिज़नस इंटेलिजेंस के पद पर कार्यरत है ने भी इस वेब परिचर्चा में हिस्सा लिया जो कॉलेज के अन्य विद्याथियों के लिए प्रेरणा का श्रौत बना. विदीत रहे की राजीव कौशिक ने एसडी पीजी कॉलेज से ही बीएससी की डिग्री हासिल कर आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश लिया और आज देश का नाम कनाडा में रोशन कर रहे है. माननीय मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और डॉ मुकेश पूनिया विभागाध्यक्ष गणित विभाग ने किया. उनके साथ प्रो संजय चोपड़ा, प्रो सुमन चौहान, प्रो दिव्या सेठी, प्रो अनूप, प्रो रजनी मित्तल, प्रो ट्विंकल और प्रो शिवानी ने भी वेबिनार से जुड़कर ज्ञानवर्धक परिचर्चा में हिस्सा लिया. विदित रहे की विश्व पाई दिवस (π) 3-14 अर्थात् मार्च 14 को मनाया जाता है और गणित, विज्ञान और अभियांत्रिकी के विद्यार्थियों को इसके महत्व के बारे में भली-भाँती पता है.
डॉ दिनेश मदान विभागाध्यक्ष गणित विभाग एवं पूर्व परीक्षा नियंत्रक चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी भिवानी ने कहा की पाई यानी 22/7 एक विकट संख्या है और गणित, विज्ञान और अभियांत्रिकी के कई महत्वपूर्ण फ़ॉर्मूले इस पर आधारित हैं. ज्यामिती में किसी वृत की परिधि की लंबाई और व्यास की लंबाई के अनुपात को पाई कहा जाता है. प्रत्येक वृत में यह अनुपात 3.141 होता है लेकिन दशमलव के बाद की पूरी संख्या का अब तक आंकलन नहीं किया जा सका है और इसलिए इसे अनंत माना जाता है. 3/14 की तारीख गणितप्रेमियों के लिए एक विशिष्ट तिथि का प्रतिनिधित्व करती है. यूँ तो पाई के अनुपात की आवश्यकता और इससे संबंधित शोध काफ़ी पहले से होते आ रहे थे किन्तु पाई के चिह्न का प्रयोग सर्वप्रथम 1706 में विलियम जोंस द्वारा किया गया था. बाद में इसे लोकप्रियता 1737 में स्विस गणितज्ञ लियोनार्ड यूलर द्वारा प्रयोग में लाना आरंभ करने के बाद मिली. ‘पाई दिवस’ का विचार सर्वप्रथम 1989 में लैरी शौ द्वारा प्रतिपादित किया गया जिसे 2009 के पाई दिवस पर यूएस हाउस ऑफ़ रेप्रेजेंटेटिव्स ने इस तिथि को ‘राष्ट्रीय पाई दिवस’ के रूप में स्वीकार कर लिया. 2010 में गूगल ने इस तिथि पर वृत और पाई के चिह्नों को प्रदर्शित करता एक डूडल अपने होम पेज पर प्रस्तुत कर इस आयोजन में अपनी स्वीकृति और भागीदारी भी सुनिश्चित कर दी. इस तिथि के समीपवर्ती एक और तिथि है 22 जुलाई या 22/7 जो कि ‘पाई एप्रोक्सिमेशन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है जो कि फ्रैक्शन पद्धति में पाई के मान के सदृश्य ही है. गणित के रोचक तत्वों की श्रृंखला में ‘पाई मिनट’ को भी शामिल कर लिया जाता है जब 14 मार्च को 1:59:26 एएम/पीएम पर पाई के सात दशमलवीय मान प्राप्त हो जाते हैं यानि 3.1415926.उन्होनें कहा की आधुनिक युग में पाई का मान सबसे पहले 1706 में गणितज्ञ विलिया जोन्स ने सुझाया था परन्तु भारत के सबसे पहले गणितज्ञ आर्यभट्ट ने 5वि सदी में ही पाई के मान का सटीक अनुमान लगाया था. आर्यभट्ट के गणित के श्लोकों में पाई के अनुमान का जिक्र गणितपाद के श्लोक नंबर 10 में है. समस्त विश्व में इस अवसर पर पाई के प्रयोग, महत्व आदि पर चर्चा-परिचर्चा का आयोजन करने की परंपरा स्थापित होती जा रही है जो एक सकारात्मक और अच्छी सोच है.
राजीव कौशिक निदेशक डाटा एनालिटिक्स एंड बिज़नस इंटेलिजेंस गार्डन्स एलाइव वाटरलू कनाडा ने कहा की कॉलेज में हम सिर्फ डिग्री हासिल करने नहीं जाते बल्कि यहां हम जिंदगी जीने के तरीके भी सीखते हैं. यही उन्होनें एसडी पी जी कॉलेज में सिखा है. कॉलेज जाने का मतलब मात्र किताबों में ही उलझे रहना नहीं होता बल्कि कॉलेज में हम खुद की पर्सनालिटी को विकसित करना सीखते हैं. जीने का सलीका और जिंदगी में मुसीबतों से जूझना भी कॉलेज हमें सिखाता है. जिंदगी को जीने की कला कॉलेज में सीखी जाती है. कॉलेज लाइफ हमें बेहतर और जिम्मेदार इंसान बनाने की कला सिखाती है. वे आज जो कुछ भी है इसका श्रेय उनके कॉलेज जीवन के पलों और प्राध्यापकों को जाता है.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की यह भी गजब का संयोग है की आज ही प्रख्यात भौतिकविद और चिन्तक अलबर्ट आइंस्टाइन का जन्मदिवस भी है. जिस परमाणु उर्जा के रचनात्मक उपयोग का स्वप्न अलबर्ट आइंस्टाइन ने देखा थाआज के परिदृश्य में उससे जुड़ी विनाशकारी संभावनाओं को देखते हुए उनकी मनःस्थिति की हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं. विज्ञान की इस महान् विभूति को नमन और उनके प्रति सच्ची श्रधान्जली यही होगी की हम विज्ञान के सकारात्मक और प्रगतिशील पहलू को ही अपनाने का प्रण ले. मानव और मानवता का विकास ही विज्ञान का ध्येय होना चाहिए.
डॉ मुकेश पूनिया विभागाध्यक्ष गणित विभागने विज्ञान के दुरूपयोग पर बोलते हुए कहा की संपूर्ण विश्व के देश आज प्रगति के पथ पर एक-दूसरे से आगे निकलना चाहते हैं तथा सभी खुद को शक्ति-संपन्न देखना चाहते हैं. गोला-बारूद का आविष्कार इसी प्रतिस्पर्धा की देन है. रॉकेट, मिसाइल, बम, युद्ध में प्रयोग होने वाले हथियार तथा अनेक प्रकार के रासायनिक उपकरण मानव के विनाश के लिए तैयार हैं. हाईड्रोजेन तथा परमाणु बम तो सम्पूर्ण मानव-सभ्यता को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. विज्ञान ने यदि हमें चंद्रमा पर पहुँचाया है तो इसने हमें विनाश के गर्त पर भी ला खड़ा किया है. विज्ञान का समुचित दिशा में किया गया उपयोग हमारे लिए वरदान सिद्ध हो सकता है जबकि इसका दुरुपयोग अभिशाप बनकर हम ही पर कहर बरपायेगा.

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