Saturday, April 18, 2026
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विवेक और आत्मज्ञान केवल सत्संग से ही मिलता है : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS , at April 4, 2024 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2081 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के दूसरे दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि एक बार एक व्यक्ति ने  महात्मा से पूछा कि यदि हम पाप कर्म नहीं करते तो हमें सत्संग सुनने की या मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है। हमने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं तो हमें क्या आवश्यकता है कि हम मंदिर में जाएं। यह सुनकर महात्मा ने कहा कि एक कागज कलम लाओ और उस पर पांच शून्य बनाओ। उन्होंने कहा कि अब इसे संख्या बनाने के लिए इसके पीछे एक लगाना आवश्यक है तभी इस संख्या की कीमत होगी। उन्होंने कहा कि यही एक सत्संग से आता है। यानी हम संसार में भले ही कितना व्यवहार करें लेकिन विवेक और आत्मज्ञान केवल सत्संग से ही मिलता है। महाराज जी ने कहा कि प्रसाद में भी बहुत शक्ति होती है। प्रसाद में बहुत कृपा होती है। हमारे पाप प्रसाद से नष्ट होने लगते हैं प्रसाद में स्वाद नहीं खोजना चाहिए। जब प्रसाद ठाकुर जी को अर्पित हो गया तो वह अमृत बन जाता है।

इससे पूर्व मुख्य अतिथि अनिल छाबड़ा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रसिद्ध भजन गायक वेद कमल ने भजन ‘तेरे चरणां विच मेरी अरदास दाता’ गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इस अवसर पर रमेश चुघ प्रधान, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा,ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, कर्म सिंह रामदेव, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, ओमी चुघ, अमन रामदेव, हरनारायण जुनेजा, श्याम लाल सपड़ा, सोनू खुराना, गोपी मेंहदीरत्ता गुलशन रामदेव, शक्ति सिंह रेवड़ी, आत्म खुराना, जगदीश जुनेजा, राघव चुघ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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