विश्व मृदा दिवस :मिट्टी को बचाने और इसे भावी पीढ़ियों के लिए सँभालने की शपथ दिलाई
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार और जागरूकता रैली का आयोजन
रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत, ईशा फाउंडेशन पानीपत, कॉलेजयूथ रेड क्रॉस और एनएसएस इकाई के संयुक्त तत्वाधान में हुआ आयोजन
मिट्टी का पुनरुद्वार हमारे पर्यावरण का पुनरुद्वार है: गरिमा मलिक ईशा फाउंडेशन
BOL PANIPAT ,05 दिसम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व मृदा दिवस (वर्ल्ड सोइलडे) के अवसर पर एक दिवसीय सेमीनार और जागरूकता रैली का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य‘मिट्टी बचाओ’ जागरूकता अभियान चलाकरनई पीढ़ी के नौजवानों से अपील की गई कि वे धरती के महत्व को पहचाने और इसे प्रदूषित एवं ख़राब होने से रोकने में अपना दायित्व ईमानदारी से अदा करें. सेमीनार का आयोजनरेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत, ईशा फाउंडेशन पानीपत, एसडी पीजी कॉलेजकीयूथ रेड क्रॉस और एनएसएस इकाई के संयुक्त तत्वाधान में हुआ. कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता गरिमा मलिकईशा फाउंडेशन पानीपतने शिरकत की. उनके साथ उत्कर्षसदस्य ईशा फाउंडेशन और कॉलेज में वाईआरसी एवं एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग उपस्थित रहे. मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और डॉ एसके वर्मा ने किया.विदित रहे कि मृदा (मिट्टी) काहमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है.मिट्टी के इसीमहत्व को याद रखने और उसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 5दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है. सेमिनार के उपरान्त जागरूकता रैली निकाली गई जिसमे कार्यकर्ताओंने बैनर और प्लाकार्ड हाथ मेंउठाकरमिट्टी बचाने हेतू नारे लगाए.
गरिमा मलिक ईशा फाउंडेशन पानीपत ने कहा कि पूरे संसार में 300 केन्द्रों और 7लाखस्वयंसेवकों के समर्थन के साथ ईशा फाउंडेशन मानव खुशहाली के सभी आयामों को संबोधित करती है. अपने भीतरी रूपांतरण के शक्तिशाली योग कार्यक्रमों से लेकर समाज, पर्यावरण और शिक्षा के लिए अपनी प्रेरणादायक परियोजनाओं तकईशा की गतिविधियां एक समावेशी संस्कृति है. ईशा फाउंडेशन की गतिविधियों ने हर तरह की आर्थिक,सांस्कृतिक या धार्मिक पृष्ठभूमि लोगों तक पहुंचाई है. फाउंडेशन की सामाजिक परियोजनाएँ इस तरह तैयार की गई हैं कि उनका क्रियान्वन और संचालन आसानी से होसकें.संसार में मानव सशक्तिकरण और सामुदायिक कायाकल्प के आदर्श नमूने इस फाउंडेशन का मुख्य आधार है. ‘माटी बचाओ अभियान’ की शुरुआत 21 मार्च को लन्दन से सदगुरु ने की.‘मिट्टी बचाओ आंदोलन’ मिट्टी और धरती के प्रति जागरूकता पैदा करने वाला अभियान है. 3 अरब से अधिक लोगों का समर्थन जुटाने के लिए सदगुरु ने अकेले मोटर साइकिल की सवारी करते हुए 24 देशों की तीस हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तयकर इसे दक्षिण भारत में समाप्त किया. इस अभियान का उद्देश्य दुनिया भर में मिट्टी के खतरनाक क्षरण के बारे में वैश्विक जागरूकता लाना है. खराब होती मिट्टी खाद्य और जल सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो रही है. जलवायु आपदा और विलुप्त होती प्रजातियां भी इसी मिट्टी की गुणवत्ता से जुड़ी हैं. ऊपरी मिट्टी के पहले 12 से 15 इंच में जो जीवन है वही वास्तव में हमारे अस्तित्व का आधार है. यदि मनुष्य अपने अस्तित्व के आधार से सचेतन रूप से जुड़ा ही नहीं है तो हम उसे जीवन की प्रकृति और सृष्टि के स्रोत के प्रति सचेत नहीं कर सकते. प्रत्येक युवा को इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए. मिट्टी को लेकर यदि देश में आवश्यक जागरूकताआ गई तो हम अपनी धरती और आने वाली पीढ़ियों को बचा पायेंगे.मिट्टी का पुनरुद्वार हमारे पर्यावरण का पुनरुद्वार है.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वैश्विक आंदोलन ‘मिटटी बचाओ’ का उद्देश्य 192 देशों में एक नीति लाने का प्रयास है कि यदि हमारेपास कृषि भूमि हैतो कम से कम 3-6% जैविक सामग्री कोहमें उस मिट्टी मेंसंजों कर रखना होगा ताकि हमारीआने वाली पीढ़ीयां भी चैन से जी सके. यही प्रयास ईशा फाउंडेशन कर रही है.विश्व मृदा दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में मृदा संरक्षण के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है.
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि वाईआरसी एवं एनएसएस कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि आज का युवा जिम्मेदार और प्रगतिशील है. आज का युवा ही समाज में व्याप्त विभिन्न बुराइयों और समस्याओं के खिलाफ अभियान चला कर उन्हेंजड़ से खत्म कर सकता है.विश्व मृदा दिवस का उद्देश्य लोगों में मृदा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. असल मेंसभी स्थलीय जीवों के लिए मिट्टी का खास महत्व है. मिट्टी के क्षरण से कार्बनिक पदार्थों को बेहदनुकसान होता है और इससेमिट्टी की उर्वरता में भी गिरावट आ जाती है.
कार्यक्रमके अंत में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने वाईआरसी और एनएसएस कार्यकर्ताओं को मिट्टी को बचाने और इसे भावी पीढ़ियों के लिए सँभालने की शपथ दिलाई.

Comments