एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने डीजीएचई हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित राजकीय महिला महाविधालय करनाल में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में हासिल किया पहला स्थान.
–राजकीय महाविधालय हिसार में आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी के लिए हुआ चयन
BOL PANIPAT , 03 फरवरी. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने डीजीएचई हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित राजकीय महिला महाविधालय करनाल में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में पहला स्थान हासिल कर न सिर्फ कॉलेज का नाम रोशन किया बल्कि 5 से 6 फरवरी तक राजकीय महाविधालय हिसार में आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है । यह कारनामा बीएससी तृतीय वर्ष (मेडिकल) की दो छात्राओं रूबी और विनीता ने प्राणीशास्त्र विषय में ‘बायोटेक का 2050 में भविष्य’ थीम पर बनाए गए मॉडल से अंजाम दिया । इस मॉडल में वर्ष 2050 तक ‘जेनेटिक इंजीनियरिंग’ के माध्यम से भविष्य में होने वाली क्रांतिकारी खोजों और उपलब्धियों को साकार होते हुए दिखाया गया । करनाल में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में करनाल और पानीपत जोन से 16 कालेजों ने विज्ञान के 7 अलग-अलग विषयों में हिस्सा लिया जिसमें प्राणीशास्त्र विषय में कॉलेज की टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया । विद्यार्थियों के मॉडल निर्माण में डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रवि रघुवंशी, डॉ राहुल जैन, प्रो रिया देसवाल, प्रो ऋतु और प्रो नम्रता का मार्गदर्शन बहुत उपयोगी रहा । विजेता खिलाड़ियों का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रो राकेश सिंगला, प्रवीण खेरडे और अन्य प्राध्यापकों ने किया ।
दिनेश गोयल ने कहा कि वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का सामाजिक महत्व होने के बावजूद उनके शोध कार्यों की उपयोगिता के बारे में समाज को पता नहीं होता है । इसके पीछे वैज्ञानिकों द्वारा उपयोग की जाने वाली जटिल भाषा मुख्य रूप से जिम्मेदार होती है जिसे आम लोग आसानी से समझ नहीं पाते है । परन्तु इन दोनों छात्राओं ने अपने क्रियाशील मॉडल के माध्यम से मुश्किल से मुश्किल सिद्धांत को भी आसानी के साथ समझाया है । इस प्रकार के मॉडल से हम सभी को अज्ञात को जानने की जिज्ञासा पैदा होती है । भावुकता से परे होकर असली कारणों को जानना तथा कुछ नया खोजने और पुरानी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं एवं विधियों को जांचने का नाम ही विज्ञान है । वैज्ञानिक प्रयोग ही हमारे ज्ञान का विस्तार करते है और इन्ही के माध्यम से मानव समाज की समस्याओं के समाधान के रास्ते हमें पता चलते है । तर्क और सच्ची समीक्षा से युक्त व्यक्ति ही सच्चा वैज्ञानिक होता है । विज्ञान के बिना ज्ञान और विकास में वृद्धि संभव ही नहीं है । इस मॉडल को देखकर उन्हें विश्वास हो गया है कि आज के विज्ञान के छात्र वाकई में भविष्य में कुछ नया कर गुजरेंगे ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से हम फसलों को वांछित गुणों के अधिक लाभदायक बना सकते है । इसी तकनीक से हम एक कार्यात्मक जीन के साथ दोषपूर्ण जीन को प्रतिस्थापित करके आनुवंशिक विकारों को भी तय कर सकते हैं । ऐसा करके हम मलेरिया और डेंगू जैसी अन्य बीमारियों के प्रसार को रोक सकते है । चिकित्सीय क्लोनिंग के माध्यम से हमप्रत्यारोपण के लिये जैविक अंगों को प्राप्त करने के लिये भ्रूण की कोशिकाओं को क्लोन भी कर पायेंगे । आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीनोमिक डेटा के साथ वैज्ञानिक डीएनए और जैविक प्रक्रियाओं के बीच के जटिल संबंधों को बेहतर तरीके से समझ पायेंगे और बीमारियों का सफल इलाज कर पाएंगे । 3-डी प्रिंटिंग भी हमारे डीएनए के अनुरूप होम-मेडिसिन, टिश्यू और बैक्टीरिया को विकसित करने में मदद करेगी और हमें स्वस्थ रखेगी । भविष्य में मानव और अन्य प्रजातियों के जीनोमिक ब्लूप्रिंट विकसित करने की आवश्यकता होगी और इस जानकारी से कोविड-19 जैसी महामारी से बचाव और इसके टीके विकसित करने में काफी मदद मिलेगी ।
डॉ राहुल जैन नेकहा कि इस तरह की विज्ञान प्रदर्शनियों और अन्य प्रतियोगिताओं को आयोजित करने का उद्देश्य छात्र-छात्राओ को विज्ञान के प्रति जागृत करना और उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को सबके सामने लाना है । नए प्रयोग नई सोच को बढ़ावा देते है जिनसे ही जिम्मेदार नागरिक तथा वैज्ञानिक तैयार होते है । विज्ञान हर नए अनुसंधान के साथ मानव जीवन को अधिक सरल बनाता चला जा रहा है । आज विज्ञान के बढ़ते चहुंमुखी विकास के कारण मानव दुनिया के हर क्षेत्र में सबसे आगे है । मानव ने विज्ञान की सहायता से पृथ्वी पर उपलब्ध हर चीज को अपने काबू में कर लिया है । विज्ञान की सहायता से हम ऊंचे आसमान में उड़ सकते हैं और गहरे पानी में सांस ले सकते हैं । विज्ञान के बढ़ते हुए विकास के कारण ही हम चंद्रमा से लेकर मंगल ग्रह तक पहुंच पाए हैं । प्राचीन काल में जो चीजें असंभव सी प्रतीत होती थी वह विज्ञान के बढ़ते शोध एवं ज्ञान के कारण अब साधारण सी दिखने लगी है । छात्राओं ने इस मॉडल को बना कर अपनी वैज्ञानिक सोच को नया विस्तार दिया है और हममें भविष्य के लिए नए विचार और सोच पैदा की है ।
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ मुकेश पुनिया, डॉ सुरेन्द्र कुमार वर्मा, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला उपस्थित रहे ।

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