एनएसएस कैंप के चौथे दिन आत्मनिर्भर भारत स्लोगन पर रैली निकाली
BOL PANIPAT : जीटी रोड स्थित आज आईबी पीजी महाविद्यालय में एनएसएस यूनिट द्वारा प्रातः कालीन सत्र में सात दिवसीय स्पेशल एनएसएस कैंप जिस का विषय है “आत्मनिर्भर भारत” के चौथे दिन खोतपुरा गांव में स्वयंसेवकों द्वारा आत्मनिर्भर भारत स्लोगन पर रैली निकाली गई । जिसमें स्वयंसेवकों ने “विदेशी को भगाना है स्वदेशी को अपनाना है” नारों के द्वारा को खोतपूरा गांव के लोगों को जागरूक किया ।
कॉलेज प्राचार्य डॉ अजय कुमार गर्ग ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत हमारी पहचान है अगर हम आत्मनिर्भर हैं तो हम अपने देश को विकसित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। एनएसएस के संयोजक डॉ जोगेश कुमार जी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है स्वयं पर निर्भर होना यानी खुद को किसी और पर आश्रित ना करना। उपप्राचार्य डॉ मधु शर्मा जी ने कहा कि आत्मनिर्भर होने का मतलब है कि आपके पास जो स्वयं का हुनर है उस के माध्यम से एक छोटे स्तर पर खुद को आगे की और बढ़ाना है या फिर बड़े स्तर पर अपने देश के लिए कुछ करना है।
आज सायं कालीन सत्र में फर्स्ट एड होम नर्सिंग ट्रेनिंग का कार्यक्रम करवाया गया जिस के मुख्य अतिथि सोनू सिंह जी प्रोजेक्ट मैनेजर रेड क्रॉस सोसाइटी और सुदेश कुमारी जी प्रोजेक्ट मैनेजर रेड क्रॉस सोसाइटी से रहे । प्रोफेसर रितु भारद्वाज के द्वारा स्वयं सेवकों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी गई जिसमें बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को कुछ भी हो जाता है जैसे कि उसके हर्ट अटैक आ जाता है या फिर एक्सीडेंट हो जाता है तो तुरंत हमें क्या करना चाहिए ।
सुदेश कुमारी जी ने स्वयंसेवकों को एड्स जैसी लाइलाज बीमारी के बारे में बताया उन्होंने बताया कि जब भी हमें रक्त की जरूरत पड़ती है तब हमें रक्त की जांच करवा कर ही लेना चाहिए । हमें इस एड्स जैसी बीमारी से नहीं घबराना चाहिए बल्कि हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए । संक्रमित सीरींज का प्रयोग नहीं करना चाहिए, हमें हमेशा डिस्पोजेबल सिरिंज का ही प्रयोग करना चाहिए जिससे हम एड्स जैसी बीमारी से बच सकते हैं ।
इसके पश्चात सोनू सिंह जी ने अपने विचार व्यक्त किए उन्होंने बताया कि हमें स्वदेशी वस्तुएं खरीदकर ही अपने भारत को आत्मनिर्भर बना सकते हैं उन्होंने यह भी कहा कि हमें स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार प्रसार करना चाहिए । उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप के बारे में बताते हुए कहा कि हमें कुछ ऐसा करना चाहिए कि खुद भी रोजगार करो और दूसरों को भी रोजगार दो ।
जरूरी नहीं कि पैसे से ही सब कुछ होता है । उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी नौकरी में होकर बनने से अच्छा है कि छोटी नौकरी करो लेकिन खुद के मालिक बनो । धंधा कोई भी छोटा बड़ा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता । हमें कोई भी काम पूरी लगन से करना चाहिए और ईमानदारी से करना चाहिए । इस आयोजन के बाद स्वयं सेवकों द्वारा विभिन्न प्रश्न पूछे गए ।
मंच का संचालन स्वयंसेविका अंजली द्वारा किया गया । इस अवसर पर प्रोफेसर नीतू मनोचा, प्रोफेसर सुमन, प्रोफेसर मनीष ने अहम भूमिका निभाई।

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