गिग वर्कर्स को क्या मिल रहा है उनका हक ? अधिवक्ता निखिल चुघ ने उठाए सवाल
BOL PANIPAT । पानीपत के अधिवक्ता, लेखक एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य निखिल चुघ ने देश में तेजी से बढ़ रहे गिग वर्कर्स के क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजन वितरण, टैक्सी सेवाओं और अन्य ऑनलाइन मंचों के माध्यम से काम करने वाले लाखों लोग आज देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति और अधिकारों को लेकर अभी भी गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।

निखिल चुघ का कहना है कि गिग वर्कर्स हमारे समाज के असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector) का एक बड़ा हिस्सा हैं। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि क्या उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षा और अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उनका प्रश्न है कि क्या उनकी आय, कार्य के घंटे, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण पर्याप्त हैं तथा क्या वर्तमान श्रम कानून उनकी चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) ने गिग वर्कर्स को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता तो दी है, लेकिन उनकी कार्यस्थल सुरक्षा, आय की स्थिरता, दुर्घटना संरक्षण और अन्य व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर अभी भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न बने हुए हैं।
निखिल चुघ का मानना है कि इस क्षेत्र में और व्यापक कानूनी सुधारों तथा प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है। उनका कहना है कि किसी भी सार्थक बदलाव के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गिग वर्कर्स की वास्तविक परिस्थितियों, उनकी रोज़मर्रा की चुनौतियों और ज़मीनी स्तर की समस्याओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि निखिल चुघ वर्तमान में विधि में पीएच.डी. कर रहे हैं। उनका शोध गिग वर्कर्स की कानूनी स्थिति, श्रमिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा तथा उनसे जुड़े संवैधानिक और श्रम कानूनों के अध्ययन पर केंद्रित है।

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