डीसी कीे किसानों से अपील गेहूं के अवशेष न जलाए किसान
-फसल अवशेष प्रबंधन करने पर दें जोर : डीसी
BOL PANIPAT , 5 अप्रैल। उपायुक्त सुशील सारवान ने जिला के किसानों से फसलों के अवशेष और फानों को खेतों में न जलाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे करने से पर्यावरण व जमीन की उर्वरा शक्ति को हानि पहुंचती है और साथ ही खेतों में मित्र कीटों को नुकसान पहुंचता है। प्राय: यह भी देखा जाता है कि गेहूं के अवशेष जलाने से आसपास जान-माल की हानि का नुकसान होता है। उपायुक्त ने किसानों से कहा है कि वे अवशेषों को जलाने से बचें और कृषि विभाग के दिशा निर्देशानुसार किसान कृषि यंत्रों का प्रयोग करके अपने खेत में ही बचे हुए अवशेषों को मिट्टी में मिला सकते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि फसलों के अवशेष जलाने से विभिन्न समस्याएं जैसे हवा व धरती का तापमान बढऩा, मनुष्य व पशुओं में सांस की समस्या, आंखों में जलन व धुंधलापन हो जाना और मिट्टी की गुणवत्ता में कमी इत्यादि उत्पन्न होती हैं। फसली अवशेषों में आग लगाने से प्रदूषण फैलता है और भूमि में पल रहे जीव, मित्र कीट, पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में पड़े फसलों के अवशेषों को न जलाएं बल्कि उसे भूमि में दबाएं जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है।
डीसी सुशील सारवान ने कहा कि हरियाणा सरकार फसल अवशेष प्रबंधन हेतु मशीनों पर सब्सिडी दे रही है। उपायुक्त ने किसानों से आह्वान किया कि वे गेहूं फसल कटाई उपरान्त बचे हुए फसल अवशेषों को न जलाएं बल्कि जमीन में मिलाकर भूमि की उर्वरता शक्ति को बढाएं। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा कृषि यंत्रों पर जो अनुदान दिया जा रहा है जैसे कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर 80 प्रतिशत अनुदान तथा व्यक्तिगत किसान द्वारा अनुदान की राशि 50 प्रतिशत है, का भरपूर लाभ उठाएं।

Comments