परिवार में जो जैसा है, उसे प्यार से स्वीकार करें- बीके सुनीता
BOL PANIPAT : ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन को क्षमा दिवस के रूप में मनाया गया। शहर के सत्यम पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया। इस मौके पर ब्रह्माकुमारीज़ की सबजोन इंचार्ज बी.के. सरला बहन, तहसील कैम्प सेवाकेंद्र संचालिका बी.के. बिंदु बहन, बीके ज्योति बहन व अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के विषय घर बनें मंदिर पर बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए बी.के. सुनीता बहन ने कहा कि परिवार में जो जैसा है उसको प्यार से स्वीकार करो, संस्कारों में भिन्नता भी इस सृष्टि की सुंदरता है।बहनजी ने कहा कि हमारा परिवार भी एक गुलदस्ते की तरह है और किसी भी गुलदस्ते में जितने अलग-अलग तरह के फूल होते हैं उतना ही वह आकर्षक और सुंदर होता है।इसलिये कभी किसी से शिकवा नही करो सिर्फ शुक्रिया करो।
बहनजी ने बताया कि घर मंदिर तभी बन सकता है जब उसमें रहने वाले सभी सदस्यों का मन, वाणी और कर्म तीनों पवित्र हो, शुद्ध हो। केवल बाहरी सफाई ही पर्याप्त नही है, बल्कि हमारी मन की सफाई भी होनी चाहिए। जब यह मन मंदिर बनेगा तभी हमारा घर मंदिर बनेगा।कार्यक्रम में पूरी सभा ने मिलकर की क्षमा याचना- बी.के. बहन ने कहा जो महान व्यक्ति होते है वो क्षमा करते हैं और जो कमजोर होते है वो बदला लेते हैं।
एक कहावत को याद दिलाते हुए बहन जी कहा कि हमने अपनी जिंदगी को कुछ यूं आसान कर लिया, कुछ को माफ कर दिया, कुछ को भुला दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता राजयोगिनी सरला बहन ने अपनी शुभ कामना देते हुए कहा कि इन तीन दिनों में हम जो भी सुनेंगे अगर उन बातों को जीवन में धारण कर लिया जाए तो निश्चित ही हमारा घर एक मंदिर बन सकता है।
उन्होंने शहरवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि कार्यक्रम के सभी सत्रों में परिवार सहित आकर इसका पूरा लाभ लेना चाहिए।बी. के. बिंदु बहन ने भी अपनी शुभ कामना दी और राजयोग मैडिटेशन का अभ्यास कराया।कार्यक्रम में कुमारी रूही ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया और मंच संचालन बी.के. ज्योति बहन ने किया

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