एसडी पीजी कॉलेज पानीपतमें एनुएल एथलेटिक मीट 2022 का भव्य आयोजन
माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली हरियाणा की प्रथम सिविलियन एवं पदमश्री अलंकृत ममता सौदा ने बतौर मुख्य अतिथि की युवाओं की हौंसला अफजाही
लड़कियों और लड़कों में होने वाले भेदभाव को खत्म करके ही समाज आगे बढ़ सकता है: पदमश्री ममता सौदा, एसीपी हरियाणा पुलिस
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपतमें वार्षिक खेल-कूद प्रतियोगिता 2022 का भव्य आयोजन किया गया जिसमें कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. प्रतियोगिता का उदघाटन मुख्य अतिथि मशहूरपर्वतरोहीएवं देश के प्रतिष्ठितपदमश्री पुरस्कार से अलंकृत ममता सौदा ने किया जो वर्तमान में पंचकूला में हरियाणा पुलिस में एसीपी के पद को सुशोभित कर रही है.माननीय मेहमान का स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान पवन गोयल, जनरल सेक्रेटरी तुलसी सिंगला, कोषाध्यक्ष विकुल बिंदल,प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा प्रो सुशीला बेनीवाल ने पुष्प रोपित गमले भेंट कर किया.इस अवसर पर टीचिंग और नॉन-टीचिंग के लगभग सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे. प्रतियोगिता के प्रारम्भ में खिलाड़ियों ने मार्चपास्ट में भागलिया जिसकी सलामी ममता सौदा ने ली. तत्पश्चात पदमश्री से सम्मानित ममता सौदा ने ध्वज फहराया, कॉलेज के खिलाड़ियों को खेल-भावना से खेलने की शपथ दिलाई और दीप प्रज्वलन के साथ वार्षिक खेलों के विधिवत प्रारंभ की घोषणा की. एथलेटिक मीट में ओवर आल प्रदर्शन के आधार पर अशोक और अन्नू बेस्ट एथलीट बने.

विदित रहे की ममता सौदा हरियाणा की प्रथम सिविलियन महिला है जिन्होनें वर्ष 2010 में माउंट एवरेस्ट को फ़तेह कर उस पर भारत का तिरंगा लहराया था. इसके अलावा ममता सौदा आइलैंड पीक नेपाल 2010, माउंट एल्ब्रुस (रूस) 2012, माउंट एकोनका गुआ (दक्षिण अमेरिका) 2013आदिपर्वतों को जीत कर भी अपनी हिम्मत, मेहनत और मजबूती का लोहा मनवा चुकी है. उनकी इन सफलताओं के मद्देनजर ही उन्हें वर्ष 2014 में देश के चौथे सबसे बड़े पदमश्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया. इसके अलावा उन्हें इंटरनेशनल वुमन डे अवार्ड 2010, महिला शक्ति गौरव सम्मान 2010, डॉ भीम राव अम्बेडकर पुरस्कार 2010, कल्पना चावला शौर्य अवार्ड 2011 जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.
पदमश्रीममता सौदा एसीपी हरियाणा पुलिस ने अपने ओजपूर्ण भाषण में खिलाडियों को संबोधित करते हुए कहा किजब वे बचपन में अपने आसपास के क्षेत्रों में लोगों को लड़कियों की बजाय लड़कों को अधिक महत्व देते हुए देखती थी तो उनके मन में कई तरह विचार आते थे. यहाँ तक की उनकी दादी भी लड़कियों को नहीं लड़कों को ही मक्खन खाने को दिया करती थी. तब उनके मन में आया कि लोगों की यह सोच बदलने के लिए और अपने देश के लिए कुछ करने के लिए उन्हें भी कुछ बड़ा करना होगा. ऐसा करने में उनकी माँ और उनके भाई-बहनों ने खूब उनका साथ दिया. कॉलेज जीवन में उन्होनें हैंडबॉल खेल में हिस्सा लेना शुरू किया और फिर आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में मेडल्स भी जीते.स्नातक प्रथम वर्ष में उन्होनें पहली बार पर्वतारोहण के बारे में सुना. इसको लेकर उनके मन में पर्वतारोही बनने की इच्छा जाग उठी और फिर उन्होनें न थकने वाला अभ्यास शुरू कर दिया और यूथ एवंस्पोर्ट्स के शिविरों में जाना शुरू किया.

फिर वर्ष 2005 का वह मनहूस दिन आया जब पर्वतारोहन का अभ्यास करते हुए वे 40 फुट से सीधी धरती पर आ गिरी और उनकी दाईं टांग में बहुल-फ्रैक्चर आ गया. उन्हेंदो वर्ष तक बिस्तर पर पड़े रहना पड़ा. लेकिन यह चोट उनके इरादे और लक्ष्य को न तोड़ पाई और मजबूत इच्छाशक्ति और अदम्य हौंसले के बलपर वे जल्द अपने लक्ष्य की तरफ निकल पड़ी. उनके हौंसले ने तो उनका इलाज कर रहे उनके डॉक्टर को भी हैरत में डाल दिया.इसी संघर्ष के दौरान उनके पिता का भी देहांत हो गया. आज जो अनुशासन उनके व्यक्तित्व में है वह उनके पिता की ही देन है. दो झटकों के बाद भी उन्होनें खुद को फिर तैयार किया और अपना संघर्ष जारी रखा. जब माउंट एवेरेस्ट पर जाने के दिन नजदीक आये तो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए 21 लाख रुपये का खर्च आड़े आ गया. उस समय तो उनके पास तो एक लाख रुपये भी नहीं थे. तब विभिन्न अधिकारियों और समाज के प्रयासों से इस धनराशि का इंतजाम हो गया. 22 मई 2010 में सारी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए उन्होनें माउंट एवरेस्ट को फतह कर दिया.
ममता ने बताया की माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना तो मुश्किल है ही लेकिन वहां से सुरक्षित नीचे उतरना भी मुसीबत भरा और जोखिम पूर्ण है.पैर की कमजोरी के बावजूद वे सफलता पूर्वक नीचे उतर पाई. उन्होनें सभी खिलाडियों, ख़ास त्तौर पर बेटियों से अपील करते हुए कहा कि वे कभी हिम्मत न हारें और जीवन की मुश्किलों से न घबराएं. उनके समक्ष जो भी दिक्कतें पेश आये उन्हें उनका उन्हेंडटकर मुकाबला करना चाहिए. युवाओं को अपने जीवन में लक्ष्य तय करने के उपरान्त उनकीप्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत के साथ जुट जाना चाहिए. अभिभावक भी अपनी बेटियों को घर के कामकाज तक ही सीमित न रखेंबल्कि उनकी रुचि अनुसार उनका हौसला बढ़ाते हुए उन्हें सफलता की बुलंदी तक पहुंचाने में मददगार बनें. आज खेलों में उज्जवल भविष्य है और इसमें रोजगार के भी प्रचुर अवसर है. नाम और सम्मान अर्जित करके नौकरी पाने का भी अलग ही आनंद है.

प्रधानपवन गोयल ने अपने भाषण में ममता सौदा का कॉलेज पधारने पर स्वागत किया और कहा की उनके आने से कितने ही खिलाडियों को जीवन में कुछ करने की प्रेरणा मिलेगी. उन्होनें वार्षिक खेलो में खिलाड़ियों को अपना उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने हेतू प्रोत्साहित किया. उन्होनें कहा की हम अपना भविष्य खुद ही संवार सकते. जीवन मे असफलता भी एक चुनौती की तरह है और इसे हर किसी को मुस्कुरा कर स्वीकारना चाहिए. जब हम अपनी कमियो को ध्यान से देखते है तो उनको सुधारना औरआसान हो जाता है. मेहनत करने का भी जीवन मे अलग ही आनंद है। हमें नकारात्मक विचारों से सैदेव बचना चाहिए क्योंकि हमारे नकारात्मक होते ही समाज दुगने तरीके से नकारात्मक हो जाता है. पढ़ाई जरूरी है परंतु खेल-कूद के बिना भी जीवन का कोई अर्थ नहीं है. समाज मे खेल-कूद को लेकर सोच में बदलाव आया है। माता-पिता अब लड़को को ही नहीं बल्कि लड़कियों को भी खेलों में भाग लेने की इजाजत देने लगे है और ममता सौदा इसका जीता-जागता उदाहरण है।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने ममता सौदा के बारे में बताते हुए कहा की पदमश्रीपुरस्कार प्राप्त उन्होनें अपने माता-पिता और देश का नाम रोशन किया है. महिला होकर यह कारनामा अंजाम देना बहुत बड़ी उपलब्धि है और दुसरो के लिए उत्साहवर्धन का सबब है. उन्होनें ममता सौदा का कॉलेज पधारकर अपने अनुभवों और आदर्शों को विध्यार्थियों के साथ बांटने के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होनें कहा किममता सौदा की तरह कड़ी मेहनत और लगन को यदि जीवन में अपनाया जाये तो लक्ष्यों को प्राप्त करना कोई मुश्किल कार्य नहीं है. खेल-कूद के बिना हर प्रकार की शिक्षा अधूरी है और इसीलिए कॉलेज के पाठ्यक्रम मे खेल-कूद भी शामिल किया जाता है. खेल-कूद की प्रतियोगिता भी इसी उद्देश्य से करवाई जाती है. कॉलेज के और भी कई खिलाड़ीयो ने खेल-कूद के दम पर अच्छे पदों को सुशोभित किया है और खूब नाम कमाया है. खेल को खेल-भावना के साथ खेलना चाहिए क्योंकि यही भावना फिर हमारी जीवन शैली का हिस्सा बन जाती है. खेलों से न सिर्फ हमारा तन बल्कि मन और आत्मा परिपक्व होती है.
इस अवसर पर प्रो सुशीला बेनीवाल ने कॉलेज की वर्ष 2021-22 की खेल गतिविधियों की विस्तृतरिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा की कॉलेज के लगभग 200 खिलाडियों ने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी, नेशनल और वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक झटके है. कई खिलाडियों का चयन खेलो इंडिया खेलो के लिए भी हुआ है जिसके तहत खिलाडियों को 5 लाख रुपये नकद और 2 वर्ष के लिए प्रति माह 10 हजार रुपये की छात्रवृति दी जाती है.
मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता ने किया. इस अवसर पर कॉलेज के समस्त स्टाफ सदस्य जिनमें डॉ नवीन गोयल, प्रो पवन सिंगला, प्रो नरेंद्र कौशिक, डॉ मुकेश पूनिया, डॉ एसके वर्मा, प्रो गीता प्रूथी ,प्रो.अन्नु आहूजा, प्रो सुशीला बेनीवाल,रजनी, कोच शरीफ, ग्राउंड्समैन प्रताप, दीपक मित्तल और शशी मोहन गुप्ता आदि भी वार्षिक खेल-कूद प्रतियोगिता का हिस्सा बने.
विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के परिणाम निम्नलिखित रहे–
Final Result of Annual Athletic Meet 2022
(Sports Events)
Best Athlete (Boys) : Ashok
Best Athlete (Girls) : Annu
| EVENTS | POSITIONS | BOYS | GIRLS |
| 100 METERS | I | Ankush | Nikita |
| II | Ankit | Annu | |
| III | Himanshu | Mansi | |
| 400 METERS | I | Ashok | Annu |
| II | Sandeep | Nikita | |
| III | Manish &Himanshu | Mansi | |
| 800 METERS | I | Ashok | Annu |
| II | Sandeep | Nakita | |
| III | Sagar | Innu | |
| 1500 METERS | I | Ashok | Annu |
| II | Rajat | Innu | |
| III | Devender | Sonu | |
| 5000 METERS | I | Devender | Annu |
| II | Neeraj | Innu | |
| III | Rohan | Nakita | |
| HIGH JUMP | I | Akshay | Nikita |
| II | Mohit | Pooja | |
| III | Prince | Payal | |
| LONG JUMP | I | Rajat | Mansi |
| II | Ravi | Sheetal | |
| III | Kaptan Singh | Nikita | |
| SHOT PUT | I | Anmol | Kafi |
| II | Akshat | Suman | |
| III | Sachin | Poonam | |
| Discuss Throw | I | Ravi | Tannu |
| II | Akshay | Suman | |
| III | Rajat | Kafi |

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