आजादी के संग्राम की यादें ताजा करता नाटक दास्तान- ए-रोहनात
अभिनय रंग मंच द्वारा दास्तान- ए-रोहनात की बेहतरीन प्रस्तुति ने मोह लिया दर्शकों का मन
BOL PANIPAT , 5 अगस्त। औद्योगिक नगरी स्थित सनातन धर्म स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मुख्य द्वार से लेकर सभागार तक तिरंगे ही तिरंगे नजऱ आ रहे थे। पूरे महाविद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल था। सभागार पूर्ण रूप से भरा हुआ था। वंदे मातरम, भारत माता के जयघोष के साथ सभागार गुंज रहा था। मौका था आज़ादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम की श्रृंखला में दास्तान- ए-रोहनात नाटक के मंचन का। अभिनय रंग मंच के कलाकारों द्वारा नाटक के माध्यम से 1857 के संग्राम की दर्ददनाक दास्तान को प्रस्तुत किया गया। सभागार में माहोल ऐसा बना था मानों आज़ादी हासिल करने के लिए लड़ा जा रहा यह संग्राम उनके सामने लड़ा जा रहा हो।
दास्तान-ए-रोहनात के लेखक यश राज शर्मा व निर्देशक मनीष ने नाटक में यह दिखाने का प्रबल प्रयास किया कि 1857 के संग्राम के असली हीरो गांव रोहनात के रूपराम खाती, नोदर जाट व बिरड़ा दास जैसे असंख्य वीर हैं जिन्हें भुला दिया गया था। ऐसे ही वीरों के कारण हमें आजादी मिली।

नाटक में अंग्रेजों की यातनाओं से दुखी होकर किस तरह से रोहनात के लोगों ने परिवार की परवाह ना करके अंगेजों की नीतियों को ठुकराया व संघर्ष का बिगुल बजाया और 71 वर्ष तक देश का झंडा नहीं लहराया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने यह बताने का प्रयास किया की अंग्रेज अधिकारी किस प्रकार से लगान व टैक्स वसूलने के नाम पर ग्रामीणों पर अत्याचार करते थे व आम व्यक्ति के साथ किस प्रकार का बर्ताव करते थे।
नाटक में एक उदाहरण के माध्यम से बताया गया कि अंग्रेजों ने ग्रामीणों द्वारा लगान ना देने पर गांव के किसानों की 20 हजार 650 बीघा जम़ीन को कोडिय़ों के भाव में मात्र 81 सौ रुपए में नीलाम कर दिया था। नाटक में प्रकाश डाला गया कि रोहनात में लोगों पर अत्याचार हुए वे जलियावाला बाग की घटना से कम नहीं थे। टैक्स के नाम पर अंग्रेज किस प्रकार किसानों को जिंदा जलाते थे व उनकी फसल को जलाते थे पर भी रोशनी डाली गई थी।

नाटक में मंचन करने वाले कबीर दहिया ने बताया कि नाटक का उददेश्य आजादी के संग्राम के तथ्यों को सही प्रकार से आम व्यक्ति के सामने प्रस्तुत करना व उनके सामने सच्चाई लाना प्रमुख है। उनके अनुसार अब तक इस नाटक को 11 जिलों के बड़े शहरों में मंचन किया जा चुका है व शेष में मंचन किया जा रहा है। इस नाटक की अवधि 1 घंटा 10 मिनट है जिसमें आजादी के संग्राम में रोहनात के दर्दनाक घटनाक्रम को प्रस्तुत किया गया है। कुछ भावनात्मक दृश्य भी नाटक का हिस्सा रहे थे। प्रदेश के सबसे बड़े नाटक के रूप में पहचान बना चुके इस नाटक में ग्रामीण पृष्ठभूमि को आगे रखा गया था। अभिनय रंग मंच द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस नाटक में कुछ विद्यार्थी है तो कुछ नौकरी करने वाले हैं व कुछ लोग प्रोफेशनल है। आम व्यक्ति को जागरूक करता यह नाटक दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ गया।

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