Friday, September 11, 2026
Newspaper and Magzine


एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अंग्रेजी विभाग की ‘लिटरेरी माइंडस’ एसोसिएशन के तत्वाधान में ‘जेनआईरे’ फिल्म की हुई बड़े परदे पर स्क्रीनिंग

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 10, 2022 Tags: , , , ,

स्पेलिंग प्रतियोगिता में बीए अंग्रेजी ऑनर्स प्रथम के मोहम्मद जब्रेल ने किया पहले स्थान पर कब्ज़ा

शिक्षा में मीडिया और फिल्मों की भूमिका अतुलनीय: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में एमए और बीए अंग्रेजी ऑनर्स के छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी की मशहूर लेखिका शार्लोट ब्रॉन्टे कृत उपन्यास ‘जेन आई रे’ का फिल्म में रूपांतरण बड़े परदे पर दिखाया गया जिसे विद्यार्थियों ने बहुत पसंद किया.कार्यक्रम का शुभारम्भ प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने और कार्यक्रम की संयोजक प्रो अन्नू आहूजा रही. उनके साथ अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो नरेंद्र कौशिक, डॉ मोनिका खुराना, डॉ एसके वर्मा, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रोसनी, प्रोमणि, प्रो दीप्ति शर्मा, प्रो सुरभि, प्रो स्माइली और प्रो मानवी कार्यक्रम में उपस्थित रही. फिल्म की स्क्रीनिंग में बीए ऑनर्स और एमए अंग्रेजी के विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपने ज्ञान में वृद्धि की. विदित रहे की ‘जेन आईरे’ उपन्यास में नायिका जेन आईरेके व्यक्तित्व के कई पहलू हमें देखने को मिलते हैं. सर्वप्रथम तो वह एक वीरांगना किशोरी है, फिर एक विवेकशील संयमी नवयौवना, निष्ठावान और दृढ़ चरित्र की युवती और अन्त में शरीर की अपेक्षा आत्मा को महत्त्व देनेवाली एक परिपक्व स्त्री का रूप. स्त्री के बहुआयामी व्यक्तित्व इस उपन्यास की नायिका में मौजूद है.जेन आईरे में अपनी क्षमता पर विश्वास करने और अपने स्वतंत्र व्यक्तित्व की अनुभूति एवं उसके महत्त्व की समझ स्पष्ट दिखलाई पड़ती है. प्यार के ऊष्ण,पिघला देनेवाले प्रस्ताव के समक्ष भी वह विवेक का दामन नहीं छोड़ती है और अपने व्यक्तित्व का गौरव बनाए रखने में सदा सजग रहती है. स्त्री-पुरुष समानता की प्रबल पक्षधर तथा नारी की आर्थिक स्वाधीनता की सशक्त समर्थक हैजेन आईरे.

     इससे पहले अंग्रेजी विभाग की ‘लिटरेरी एसोसिएशन’ के तत्वाधान में स्पेलिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे बीए अंग्रेजी ऑनर्स प्रथम वर्ष के छात्र मोहम्मद जब्रेल ने बाजी मारी और पहले स्थान पर कब्ज़ा किया. अंकित ने दूसरा और अन्नू ने तीसरे स्थान को हासिल किया.

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि फिल्में व्यक्तित्व के सही विकास को प्रोत्साहित करती है बशर्ते हम अच्छी और सकारात्मक फिल्में देखें. फिल्मों के माध्यम से न सिर्फ हमारी मौखिक अभिव्यक्ति में वृद्धि होती है बल्कि इनकी मदद से हम अपनी शब्दावली, धारा प्रवाहता और भाषा की स्पष्टता में सुधार कर सकते है. फिल्में समाजीकरण का सबसे सशक्त माध्यम है. खुद की अभिव्यक्ति का विकास और सुधार इनके माध्यम से संभव है. हम अपने चरित्र की संवेदनाओं और भावनाओं को सटीकता के साथ व्यक्त करना भी फिल्मों के माध्यम से सीखते है. अच्छी फिल्में हमारे मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ती है और इन्हें हम लम्बे समय तक याद रखते है. शिक्षा में मीडिया और फिल्म की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता है.

कार्यक्रम की संयोजक प्रो अन्नू आहूजा ने बताया की विक्टोरियन युग जिसमें शार्लोट ब्रॉन्टेने अपना उपन्यास ‘जेन आईरे’ लिखा था, वह सांस्कृतिक ढांचा प्रदान करता है जिसमें कथा विकसित की गई है. विक्टोरियन समाज में महिला की जटिल भूमिका को ब्रॉन्टे द्वारा आर्थिक वर्ग, विवाह और सामाजिक स्थिति के साथ मिलकर लिंग संबंधों के उपयुक्त सम्मेलनों की खोज द्वारा उजागर किया गया है. विक्टोरियन इंग्लैंड की इस छवि को ब्रॉन्टे द्वारा रोचेस्टर के साथ आइरे के संबंधों के प्रतिनिधित्व द्वारा चुनौती दी गई है, क्योंकि यह एक वांछनीय सामाजिक स्थिति प्राप्त करने के लिए गणनात्मक दायित्व से प्रेरित नहीं है, बल्कि एक महिला द्वारा प्यार के लिए शादी करने के लिए एक स्वायत्त विकल्प है.

प्रो नरेंद्र कौशिक विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग ने कहा कि ‘जेन आईरे’ में जेन  को आलोचकों द्वारा उनकी निर्भरता,मजबूत दिमाग और व्यक्तिवाद के लिए जाना जाता है. उपन्यासकार ने कल्पना की पारंपरिक नायिकाओं के विपरीत और संभवतः आत्म कथात्मक के विपरीत जान बूझकर जेन को एक अस्वाभाविक व्यक्ति के रूप में बनाया है. रोमांटिक और नारीवादी लेखन पर उनके प्रभाव के लिए पाठकों द्वारा आलोचनात्मक प्रशंसा के कारण जेन एक लोकप्रिय साहित्यिक व्यक्ति हैं. उपन्यास को थिएटर, फिल्म और टेलीविजन सहित कई अन्य रूपों में रूपांतरित किया गया है जो छात्रों के लिए फायदे की बात है.

Comments