फसल अवशेष प्रबंधन को न जलाएं किसान-डीसी सुशील सारवान
-बडौली गांजबड और आसन्न में बनाए जाएंगे कलस्टर
BOL PANIPAT , 12 सितम्बर। उपायुक्त सुशील सारवान ने सोमवार को लघु सचिवालय के सभागार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से सम्बंधित लाभार्थी किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए और उनसे अपील की कि वे फसल अवशेष प्रबंधन को किसी भी सूरत में ना जलाए। सरकार द्वारा एथनॉल प्लांट रिफाईनरी में शुरू कर दिया गया है और अगले माह से दो कलस्टर में फसल अवशेषों को लेना शुरु कर दिया जाएगा। इन कलस्टरों में जिला के करीब 44 गांव लिए जाएंगे जिनमें धान की फसल बोई जाती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने खेत के अन्दर और बाहर फसल अवशेष के प्रबंधन पर एक हजार रूपये प्रति एकड प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि सभी किसान जहर मुक्त खेती की तरफ भी ध्यान दें। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी किसानों को कृषि विभाग द्वारा अनुदान राशि पर उपलब्ध करवाए जाने यंत्रों की लघु फिल्में भी दिखवाई ताकि किसानों का ज्ञान बढ सके। उन्होंने कहा कि आज वातावरण गर्म हो रहा है और वृक्ष लगातार काटे जा रहे हैं। साथ ही साथ किसान रासायनिक खादों का प्रयोग कर खेतों में जहर घोल रहे हैं। इसलिए फसल अवशेष प्रबंधन पर ध्यान देकर जिले का नाम रौशन करें।
डीसी सुशील सारवान ने कहा कि कृषि और बागवानी विभाग मिलकर किसानों का वट्सअप गु्रप बनाए जिसमें ऋण देने से लेकर विभागों की विभिन्न योजनाओं, अनुदान इत्यादि की जानकारी समय दर समय उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी किसान अनुदान के बारे में किसी भी कर्मचारी को पैसा ना दे। अगर कोई कर्मचारी इस बाबत पैसे की मांग करता है तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से बताए। उन्होंने कहा कि गांवों में स्कूलों की दिवारों पर स्लोग्र इत्यादि लिखवाकर किसानों को जागरूक करे। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वजीर सिंह ने विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बड़ौली, गांजबड़ और आसनं में बनेंगे कलस्टर
रिफाईनरी की ओर से चीफ मैनेजर सुशील कुमार ने फसल अवशेष की कटाई से लेकर इसके विस्तारण, भण्डार और एथनॉल प्लांट तक फसल अवशेषों को ले जाने तक की पूरी विधि समझाई और जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान संगठन कस्टमर हायर सेंटर के माध्यम से पराली को ला सकते हैं। भण्डारण के लिए 15 भण्डारण गृह तैयार किए जा रहे हैं। विभिन्न कलस्टरों में गांव में भी पंचायती जमीन पर भण्डारण के लिए प्रावधान किए जाएंगे। एक एकड में एक हजार टन भण्डारण की क्षमता होगी। बडौली-गांजबढ और आसन कला में कलस्टर बनाए जाएंगे।

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