राजनीतिक दलों में शासन की क्षमता नहीं. विदेश की कंपनियां चला रहीं भारत : शंकराचार्य
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदा ने की धर्मसभा, असहायों की मदद के लिए किया आह्वान, आज दीक्षा देंगे शंकराचार्य
BOL PANIPAT : पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कहा कि राजनीतिक दलों में शासन करने की क्षमता नहीं है। इसका स्पष्ट उदाहरण हमारे सामने है। विदेश की कंपनियां भारत को चला रही हैं। उन्होंने संकेत से कहा कि विदेश में हमारे नेता जितनी भी ख्याति अर्जित कर लें, लेकिन जब तक राजनीतिक क्षेत्र का ह्रास होता रहेगा, तब तक अखंड भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। शंकराचार्य यहां शाम बाग में शाम को राष्ट्र धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले सुबह के सत्र में उन्होंने प्रबुद्ध लोगों के सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा कि विकास को परिभाषित करने की आवश्यकता है। सबसे पहले इसी पर काम हो। विकास के नाम पर पृथ्वी को विकृत किया जा रहा है। जब तक पर्यावरण का संरक्षण नहीं होगा, तब तक किसी भी विकास के मायने नहीं हैं। धर्मसभा में निर्यातक सुरेश तायल, सर्व संगठन समाज से सुरेश काबरा, डॉ.बीबी शर्मा, चैंबर आफ कामर्स से विनोद खंडेलवाल, मोहनलाल गर्ग, पार्षद शकुंतला गर्ग, वृंदावन ट्रस्ट से विकास गोयल, हरीश बंसल, राकेश बंसल के अलावा सुरेंद्र रेवड़ी, हरपाल ढांडा, राधे राधे महाराज, दाऊजी महाराज, निरंजन पाराशर, भाजपा की जिला अध्यक्ष डा.अर्चना गुप्ता, विजय जैन, राकेश तायल, शुभम तायल, प्रवीन जैन, भारत शर्मा सहित शहर के प्रमुख लोग मौजूद रहे। ज्ञानेश्वर धाम से बटुकों ने वेद मंत्रोच्चारण से शंकराचार्य का स्वागत किया।

संयुक्त परिवार हैं आवश्यक
शंकराचार्य ने संयुक्त परिवार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य केवल पलायन कर रहा है। गांव से नगर, नगर से महानगर में जा रहा है। इस कारण संयुक्त परिवार विलोप हो रहे हैं। संयुक्त परिवार के बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। क्या हमारे महानगर में मधुर मुस्कान है, क्या यहां पंछी विचरते हैं। जवाब है नहीं। तो फिर क्यों महानगर की सोच बढ़ रही है।
महायंत्रों की वजह से विनाश हो रहा
शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा कि उनसे एक युवक ने पूछा कि क्या राकेट युग में शंकराचार्य की शिक्षाएं उपयोगी हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि राकेट युग में ही आदि शंकराचार्य की शिक्षाएं आवश्यक हैं। आप देखिये, द्वापर युग में मनुष्य की आयु कितनी होती थी, कलियुग में आते-आते कितनी रह गई। हमने जितने महायंत्रों का विकास किया, उतने ज्यादा महाविनाश की तरफ बढ़ते गए। हमारे पूर्वजों को इसका आभास था। क्योंकि उनके समय में ये महायंत्र होते थे। उन्होंने इनके उपयोग पर पहले ही मनुष्यों को जागृत करना शुरू कर दिया था।
हर रोज एक रुपया, एक घंटे का समय निकालें
शंकराचार्य ने कहा कि हर हिंदू हर रोज एक रुपया निकाले। एक घंटा भजन में लगाए। अपने मठ मंदिर को केंद्र बनाकर हिंदू राष्ट्र के लिए संकलप्ति हो। अपनी आने वाली पच्चीस पीढ़ियों के लिए धन एकत्र करने की जगह 25 लोगों को रोजगार मुहैया कराएं।
गहरी नींद का तात्पर्य समझा गए
शंकराचार्य ने कहा कि हमें गहरी नींद में जाना चाहिए। गहरी नींद में होते हैं तो हमें दुख, तकलीफ का कुछ पता नहीं चलता। इसी तरह का जीवन होना चाहिए। दुखों से दूर। पर इसके लिए परिश्रम करना होगा। भगवान की प्राप्ति का मार्ग तलाशना होगा। अपने अहंकार को सुलाना होगा।
विरक्त होंगे तो अधिपति बनेंगे
शंकराचार्य ने समझाया कि किसी के लिए भी आस्कित करेंगे तो उसके गुलाम हो जाएंगे। जिससे विरक्त होंगे, उसके अधिपति बन जाएंगे। इंद्र यूं ही देवराज नहीं बने। उन्होंने भी मृत्युलोग में जन्म लिया था। उपासन की वजह से वह देवराज बने। इसी तरह ब्रह्मा ने भी जन्म लिया। उन्होंने अपने कर्मों से अपना उच्च स्थान बनाया। देह के नाश से जीवात्मा का नाश नहीं होता। कर्म ज्ञान को विकसित करके ही मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है।
शंकराचार्य की धर्मसभा के तीन महत्वपूर्ण बिंदु
1-जीविका की उपेक्षा न करें, लेकिन ध्यान रखें जीवन जीविका के लिए ही न लगाएं। परमात्मा को प्राप्त करें।
2- जीवन यापन नहीं कर पाने वालों की मदद करें
3- 24 घंटे में 75 मिनट भजन के लिए निकालें। भजन के बल से परमात्मा मिलेंगे।
आज देंगे दीक्षा
शंकराचार्य स्वामी आज सेक्टर 12 में निर्यातक सुरेश तायल के निवास पर दीक्षा देंगे। दीक्षा के लिए भारतीय संसकृति के अनुरुप धोती कुर्ता में आना होगा। महिलाएं साड़ी पहनकर आएं। जो लोग शंकराचार्य के संगठन से जुड़ना चाहते हैं वे भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

Comments