पुलिस में सर्वोच्च रक्तदाता उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा. 150 बार रक्तदान के साथ 68 बार दे चुके है प्लेटलेट्स.
बिना किसी बैनर और संस्था के 420 स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगा नियमित कर रहे हैं रक्त की आपूर्ति.
48840 लोगों को रक्त उपलब्ध करा सेवा सुरक्षा और सहयोग के नारे को किया चरितार्थ
BOL PANIPAT : हरियाणा पुलिस के उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा जो अब हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो में जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी के रूप में नियुक्त हैं अपने कर्तव्यों के साथ साथ हरियाणा पुलिस के नारे सेवा सुरक्षा और सहयोग को चरितार्थ कर रहे हैं। अपने कर्तव्यों का भली भांति निर्वहन करने के साथ ही समाज और राष्ट्र सेवा के संकल्प को लेकर निरंतर रक्तदान के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान दे रहे हैं। वर्ष 1989 से आज तक नियमित तीन माह के अंतराल में रक्तदान करने के साथ साथ आवश्यकता पड़ने पर प्लेटलेट्स देकर अमूल्य जीवन को बचाने का संकल्प धार चुके है। रक्तदान और प्लेटलेट्स देने के लिए वे न केवल हरियाणा के किसी भी ज़िले में अपितु हरियाणा के बाहर अन्य राज्यों में जाकर भी अनेक बार रक्तदान और प्लेटलेट्स दे चुके हैं। इस कार्य के लिए वे अनेक बार अर्ध रात्रि में भी अपनी नींद को त्यागकर रक्तदान देने के लिए पहुंचे हैं। आज भी अनेक लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता का अभाव है और अधिकतर लोग तो केवल किसी परिजन के लिए रक्त की आवश्यकता के समय ही रक्तदान करने आगे आते हैं और कुछ तो भाग भी जाते है। ऐसा बहुत बार देखा गया है। लेकिन एक सैनिक कली राम खिप्पल एवं मूर्ति देवी के पुत्र डॉ. अशोक कुमार वर्मा 1989 से उन दिनों से रक्तदान कर रहे हैं जिन दिनों रक्तदान करने का अर्थ था कि यह अब जीवन में कुछ नहीं कर पायेगा। ऐसा डॉ. वर्मा के साथ भी हुआ था।

जब वे प्रथम बार 1989 में रक्तदान कर घर आए तो उनकी माता जी ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें अपराध बोध हुआ कि मुझे रक्तदान नहीं करना चाहिए था लेकिन रात्रि में सैनिक पिता कली राम खिप्पल ने उनकी पीठ थपथपाई और बधाई देते हुए कहा कि देश और राष्ट्र के लिए केवल सीमा पर जाकर शत्रु से युद्ध करना ही वीरता नहीं है अपितु अपने देश के लोगों के सुख दुःख में उनके साथ खड़े होना, रक्तदान करना आदि भी देशभगति है। तब से लेकर आज तक डॉ. वर्मा ने उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए केवल और केवल देश और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का दृढ़ संकल्प लिया हुआ है। स्वयं रक्तदान करने के साथ ही सैनिक पिता कली राम खिप्पल की पुण्य तिथि पर 26 नवंबर 2010 में प्रथम रक्तदान शिविर लगाया जो आज 420 का आंकड़ा पार कर चूका है और इसका लाभ 48840 लोगों को मिला है। रक्तदान शिविर में भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। लोगों ने रोकने का प्रयत्न किया और निरुत्साहित भी किया लेकिन डॉ. वर्मा अपने संकल्प से नहीं हटे। आज उत्तर भारत में उनसे प्रेरित होकर अनेक लोग न केवल रक्तदान कर रहे हैं अपितु इस क्षेत्र में अनेक लोग 50 से भी अधिक बार रक्तदान भी कर चुके हैं। उनके परिवार में भाई, बहन, जीजा, भतीजे, भांजे, पुत्र, पुत्रियां, रिश्तेदार और मित्र रक्तदान में बढ़चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। डॉ. अशोक कुमार वर्मा को उत्कृष पुलिस सेवाओं के लिए 26 जनवरी 2020 को पुलिस विभाग का सर्वोच्च पदक राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया है। हरियाणा के विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में महामहिम राज्यपाल के कर कमलों से अलग अलग समय पर उन्हें सम्मानित किया जा चूका है। रक्तदान के लिए उन्हें राज्यपाल द्वारा शतकवीर सम्मान, स्वर्ण पदक, प्रशंसा पत्र, सर्वाधिक रक्तदान शिविर के लिए दो बार महामहिम राज्य पाल द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह से भी अलंकृत किया गया है। असंख्य बार जिला स्तर, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और राजकीय विभागों द्वारा भी सम्मानित किया जा चूका है। उन्होंने वार्तालाप के अंतर्गत कहा कि यद्यपि उन्हें अनेक बार सम्मानित किया गया लेकिन एक पीड़ा उन्हें हृदय में सदैव रहती है कि जी प्रकार खेलों में पदक लेने वाले लोगों का सम्मान होता है। रक्तदान में शतकवीर का सम्मान भी उसी भांति किया जाना चाहिए ताकि रक्त के प्रति लोगों में और अधिक जागृति आ सके और जीवन में देश के प्रति और समाज के उत्कृष्टता में महत्वपूर्ण योगदान हो सके।

Comments