बढ़ते तापमान को लेकर प्रशासन ने किसानों को दी कुछ जरूरी हिदायते,
गेंहू में हल्की सिचाई करके बचा सकते हैं फसल के होने वाले नुकसान को.
BOL PANIPAT , 2 मार्च। प्रशासन ने बदलते तापमान से फसल को होने वाले नुकसान को लेकर किसानों को कुछ जरूरी हिदायते दी हैं जिन पर ध्यान देने से किसान इस मौसम के परिर्वतन से होने वाले नुकसान से अपनी फसल को बचा सकते हैं। उपायुक्त सुशील सारवान ने कहा कि बदलते तापमान को लेकर किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं हैं। किसानों को इसके लिए थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। उच्च तापमान से बचने के लिए किसानों को गेंहू की फसल में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करनी चाहिये। अगर हवा का संचालन ज्यादा है तो सिंचाई रोक देनी चाहिये। अन्यथा फसलें गिरने से ज्यादा नुकसान हो सकता है। जिन किसानों के पास फव्वारा सिंचाई की सुविधा है वे दोपहर को तापमान वृद्धि के समय आधा घंटा फव्वारे से सिंचाई करके गेंहू की फसल को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। उपायुक्त ने बताया कि जिले में किसानों ने 80 हजार एकड़ में गेहूं की बिजाई की है। महीने भर में फसल पक कर तैयार हो जायेगी। सभी किसान वर्तमान स्थिति को देखते हुए हिदायतों पर गौर करें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वजीर सिंह ने बताया कि ऐसा लगता है कि गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। दिन का ज्यादा तापमान होने की वजह से गेहूं की फसल में नुकसान होने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि अभी गेहूं की फसल के लिए तापमान की स्थिति ठीक है लेकिन खतरा हालत को देखते हुए यह संभव है कि तापमान ज्यादा हो सकता है। जिसकी वजह से गेहूं की पैदावार पर विपरीत असर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि दिन का तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस व रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रात व दिन का तापमान मिलाकर औसतन 22 डिग्री गेहूं की पैदावार के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। औसत तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक को फसल सहन कर सकती है पर दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने पर गेहूं के बनने वाले दाने पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि गेहूं में बलिया निकालते समय या अगेती गेहूं की बलिया निकाली हुई है तो 0.2 प्रतिशत पोटैशियम क्लोराइड यानी कि 400 ग्राम पोटाश खाद 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिडक़ाव करने से तापमान में अचानक हुई वृद्धि से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पछेती बिजाई की हुई गेहूं में पोटैशियम क्लोराइड का छिडक़ाव 15 दिन के अंतराल पर दौबारा किया जा सकता है। इस प्रकार से सावधानियां बरत कर किसान अपनी फसल को नुकसान से बचा सकते हैं।

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