Thursday, April 23, 2026
Newspaper and Magzine


एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय सात दिवसीय विशेष कैंप का छठा दिन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 6, 2023 Tags: , , , , ,

पानीपत में 5 से 11 अप्रैल तक सद्गुरु से शांभवी महामुद्रा क्रिया सीखकर अपने जीवन में स्पष्टता, स्वास्थ्य और आनंद स्थापित करें: गरिमा मलिक, ईशा फाउंडेशन
फर्स्ट ऐड देते समय यह जानना की क्या नहीं करना है अत्यधिक महत्वपूर्ण है: ऋतु भारद्वाज फर्स्ट ऐड विशेषज्ञ जिला रेड क्रॉस पानीपत
पर्यावरण बचाओ पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में तन्नु ने मारी बाजी

BOL PANIPAT , 06 मार्च, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार जारी सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर के छठे दिन एनएसएस स्वयंसेवकों ने ईशा फाउंडेशन से पधारी मुख्य वक्ता गरिमा मलिक की अगुआई में उपयोग, ईशा क्रिया और इनर इंजीनियरिंग विषयों पर स्वयंसेवकों को व्यावहारिक और जिवंत प्रशिक्षण दिया गया. उनके साथ ईशा फाउंडेशन से उत्कर्ष वर्मा, ज्योति भारद्वाज और महिमा भारद्वाज ने भी कार्यकर्ताओं के ज्ञान में वृद्धि की. गरिमा मलिक ने कहा कि इनर इंजीनियरिंग एक शक्तिशाली कार्यक्रम है जिसमें मन की भीतरी खुशहाली प्राप्त करने के लिए योगिक तकनीकें सिखाई जाती हैं. यह कार्यक्रम कई शहरों में और कई तरीकों से सिखाया जाता जाता है. इस कार्यक्रम में उपयोग के अभ्यास, सरल योगासन, शाम्भवी महामुद्रा क्रिया एवं सद्‌गुरु के अंतर्दृष्टि से भरे और भीतरी कल्याण की राह दिखाने वाले कई विशेष वीडियो और कार्यक्रम सिखाये जाते है. ऋतु भारद्वाज फर्स्ट ऐड विशेषज्ञ जिला रेड क्रॉस पानीपत ने शिविर में पधार कर एनएसएस स्वयंसेवकों को फर्स्ट ऐड के गुर सिखाये ताकि वे इस प्रशिक्षण को ग्रामीणों और आमजन तक पहुंचा सके. आज ही पर्यावरण बचाने हेतु पोस्टर मेकिंग जागरूकता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे अन्नू ने बाजी मार कर प्रथम स्थान हासिल किया. प्रतियोगिता में 60 एनएसएस स्वयंसेवकों ने कन्या भ्रूण हत्या, बेटी पढाओ, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, पर्यावरण बचाओ, जल संरक्षण, माँ और बेटियां आदि विषयों पर रंग-बिरंगे पोस्टर्स बनाये और समाज को जागरूक किया. कार्यकर्ताओं ने ग्राम काबड़ी में जाकर लोगों को बिना पानी और बिना कृत्रिम रंगों के होली मनाने के लिए प्रेरित किया. पानी की एक-एक बूँद बचाकर ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचा सकते है. कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और अगुआई एनएसएस एवं वाईआरसी प्रभारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ दीपिका अरोड़ा, डॉ एसके वर्मा और डॉ पवन सभरवाल ने किया.
गरिमा मलिक कार्यकर्ता ईशा फाउंडेशन ने कहा कि इनर इंजीनियरिंग प्रोग्राम हमारी आत्मा को नियंत्रित और शुद्ध करने का कार्यक्रम है जिसमें सद्गुरु शांभवी महामुद्रा क्रिया के 21 मिनट के शक्तिशाली अभ्यास को 5 से 11 अप्रैल तक पानीपत में सरलता के साथ सिखायेंगे ताकि हमारे जीवन में स्पष्टता, स्वास्थ्य और आनंद स्थापित हो सके. हम पूरे दिन ऊर्जा और सतर्कता बनाए रखें यही इस महामुद्रा का नियोजन है. इससे हमारा तनाव, भय और चिंता दूर होती है और हम एक बेहतर इंसान बनते है. यह कार्यक्रम पानीपत में आर्य समाज मंदिर, मॉडल टाउन स्थित वैदिक संग्रहालय में आयोजित होगा और इसमें प्रत्येक एनएसएस स्वयंसेवक का स्वागत है क्यूंकि वे ही इस सन्देश को समाज में प्रचारित और प्रसारित कर सकते है. उन्होनें कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने, रजिस्ट्रेशन और अन्य विवरण के लिए 9896426752 और 7015063313 नम्बरों पर फ़ोन किया जा सकता है. उन्होनें कहा कि सद्गुरु एक योगी, युगदृष्टा और मानवतावादी आधुनिक गुरु हैं जिन्हें योग के प्राचीन विज्ञान पर पूर्ण अधिकार है. विश्व शांति और खुशहाली की दिशा में निरंतर काम कर रहे सद्‌गुरु के रूपांतरणकारी कार्यक्रमों से दुनिया के कारोड़ों लोगों को एक नई दिशा मिली है. उन्होनें दुनिया भर में लाखों लोगों को आनंद के मार्ग में दीक्षित किया है और अब यही जिम्मेदारी हमारे युवा कार्यकर्ताओं को निभानी है. ईशा क्रिया के बारे में बताते हुए उन्होनें कहा कि ईशा का अर्थ है ऐसी वस्तु जो सृष्टि का स्रोत है और क्रिया का अर्थ है हमारी आंतरिक क्रिया. ईशा क्रिया का उद्ददेश्य मनुष्य को उसके अस्तित्व के स्रोत से संपर्क बनाने में सहायता कराना है जिससे मनुष्य अपना जीवन अपनी इच्छा और सोच के अनुसार बना और जी सके.
रितु भारद्वाज फर्स्ट ऐड विशेषज्ञ जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने फर्स्ट ऐड पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देते हुए सिखाया कि किसी भी बीमारी, चोट या दुर्घटना के लिये चिकित्सक या ऐम्बुलेंस आने से पहले जो राहत कार्य और उपचार किया जाता है उसे ही प्राथमिक सहायता कहते है. किसी भी घायल या बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुँचाने से पहले हमें उसकी जान बचाने के लिए अच्छे से प्रयास करना चाहिए और इसका ज्ञान हर एनएसएस स्वयंसेवक को अवश्य होना चाहिए. आपातकाल में पड़े हुए व्यक्ति की जान बचाने के लिए हम आस-पास की किसी भी वस्तु का उपयोग कर सकते हैं जिससे घायल या बीमार व्यक्ति को जल्द से जल्द आराम मिल सके. यहाँ यह बात इतनी महत्वपूर्ण नहीं है कि हमें इमरजेंसी के समय क्या करना चाहिए बल्कि इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह जानना है कि हमें क्या नहीं करना चाहिए क्योंकि गलत चिकित्सा कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है. प्राथमिक चिकित्सा दम घुटना (पानी में डूबने के कारण, फांसी लगने के कारण या साँस नली में किसी बाहरी चीज के अटकने के कारण), ह्रदय गति रूकना, हार्ट अटैक, खून बहना, शरीर में जहर का असर होना, जल जाना, हीट स्ट्रोक (अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी होना), बेहोश या कोमा, मोच, हड्डी टूटना और किसी जानवर के काटने जैसी इमरजेंसी अवस्था में दी जा सकती है. एनएसएस में रहकर हम इन बातों को सीखकर एक जिम्मेदार नागरिक होने के दायित्व को पूरा कर सकते है. उन्होनें बिजली के झटके, दम घुटना या डूबने की घटना, ज़हर एवं विष, जनस्वास्थ्य में उपयोगी स्वदेशी साधन और दुर्घटनाएं और प्राथमिक उपचार पर विस्तार से समझाया.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एनएसएस कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाते हुए कहा कि समय की मांग है की आज के युवा सभी को अपने साथ लेकर चले. कोरोना आपदा ने वैसे भी सामूहिक जीवन के महत्व को और उजागर किया है. आज के एनएसएस कार्यकर्ताओं के जज्बे, हौंसले और कार्यों को देख कर उन्हें इस बात की तस्सली हो गई है कि आज का युवा जिम्मेदार और प्रगतिशील है. गाँव में साफ़-सफाई, जागरूकता और साक्षरता के अभियान चला कर इन युवाओं ने राष्ट्र के निर्माण में अपना स्थान और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया किया है.
पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के परिणाम ये रहे –
प्रथम तन्नु बीए-तृतीय
द्वितीय प्रतिमा बीए-तृतीय
तृतीय ख़ुशी बीए-तृतीय

Comments