दुर्योधन माया लेकर प्रसन्न हो गया और अर्जुन मायापति लेकर प्रसन्न हुआ : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT :श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2080 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में संत समागम कार्यक्रम के सातवें दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि महाभारत युद्ध के समय अर्जुन और दुर्योधन दोनों सहायता पाने के लिए भगवान कृष्ण के पास गए। उस समय भगवान कृष्ण सो रहे होते हैं। अर्जुन कृष्ण के पैरों के पास खड़े होते हैं और दुर्योधन कृष्ण के सिर के पास खड़े होते हैं। भगवान कृष्ण की जब नींद खुली तो उन्होंने सबसे पहले अर्जुन को देखा और उनसे आने का कारण पूछा लेकिन दुर्योधन ने कहा पहले मैं आया हूँ इसलिए आप हमारे पक्ष में युद्ध लड़िए। कृष्ण प्रस्ताव रखते हैं कि मैं लड़ूंगा भी नहीं अस्त्र, शस्त्र भी नहीं उठाऊंगा और दूसरी ओर मेरी 1 अक्षौहणी नारायणी सेना होगी। अर्जुन कहते हैं कि मुझे सेना भी नहीं चाहिए आप मिल गए तो मुझे सब मिल गया। दुर्योधन माया लेकर प्रसन्न हो गया और अर्जुन मायापति लेकर प्रसन्न हुआ। शाह साहिब गुरूद्वारे से गद्दीनशीन गुरविन्द्र शाह साहिब ने अपने प्रवचनों में कहा बुल्लेशाह के गुरू ने एक बार नाराज होकर उनसे बोलना छोड़ दिया। बुल्लेशाह ने इसकी परवाह नहीं की। एक बारे बुल्लेशाह मार्ग में जा रहे होते हैं तो वह देखते हैं कि एक व्यक्ति अपने कुत्ते को रोटी दे रहा है बुल्लेशाह रूककर उसे ध्यान से देखते हैं। वह व्यक्ति रोटी डालने के बाद कुत्ते को पांव से मारने लगता है, लेकिन वह कुत्ता अपने मालिक के पैर चाटता है। यह देखकर बुल्लेशाह स्वयं से कहता है कि क्या मैं कुत्ते से भी गया गुजरा हूँ, मेरे मालिक यानि मेरे गुरू ने मुझे कुछ कह दिया तो मैं उनसे रूठ गया और यह कुत्ता देखो मार खाने के बाद भी अपने मालिक का पीछा नहीं छोड़ रहा। इससे पूर्व प्रसिद्ध समाजसेवी मुख्य अतिथि राकेश खेड़ा ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि का स्वागत महाराज जी ने पगड़ी एवं माला पहनाकर किया।

इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, अमरजीत सपड़ा, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, पवन चुघ, किशन चुघ, उत्तम आहूजा, कर्म सिंह रामदेव, जगदीश जुनेजा, शाम सपड़ा, गोल्डी बांगा, सौरभ कत्याल, अमन रामदेव, हरनारायण जुनेजा, ओम प्रकाश खुराना, सोनू खुराना, मिक्की जुनेजा, अमर वधवा, भव्य चुघ, राघव चुघ, शक्ति सिंह रेवड़ी, ईश्वर लाल रामदेव, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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