Tuesday, June 2, 2026
Newspaper and Magzine


“शहीद भगत सिंह : समकालीन समय में विचारों की  प्रासंगिकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्र स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 13, 2023 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : जी.टी. रोड स्थित आई. बी स्नातकोत्तर महाविद्यालय,   पानीपत में राजनीति विज्ञान विभाग, आइक्यूएसी एवं आरडीसी के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा विभाग पंचकूला, हरियाणा द्वारा मान्यता प्राप्त एक दिवसीय राष्ट्र स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया| इस सम्मेलन का विषय “शहीद भगत सिंह:समकालीन समय में विचारों की  प्रासंगिकता” रहा जिसमें लगभग 90  शोधार्थियों ने अपने शोध- पत्र प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन ऑफलाइन एवं ऑनलाइन माध्यम द्वारा करवाया

गया| इस सम्मेलन का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रबंध समिति के प्रधान धर्मवीर बत्रा, उप-प्रधान बलराम नंदवानी, महासचिव लक्ष्मी नारायण मिगलानी, प्रबंध समिति के सदस्य परमवीर ढींगरा, प्राचार्य डॉ. अजय कुमार गर्ग, उप-प्रधानाचार्या  प्रो.रंजना शर्मा, आईवीएसी समन्वयक डॉ. मोहम्मद ईशाक, डॉ चमन लाल (पूर्व प्रोफेसर, जेएनयू) प्रो. कुशल पाल (विभागाध्यक्ष दयाल सिंह महाविद्यालय, करनाल) डॉ.रामेश्वर दास, डॉ. किरण मदान, डॉ.पूनम मदान आदि द्वारा दीप प्रज्वलित करके व मां सरस्वती वंदना के साथ किया गया | इस सम्मेलन के शुभारंभ में  प्राचार्य डॉ अजय कुमार गर्ग ने अतिथियों का फूलो के द्वारा स्वागत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबंध समिति के प्रधान  धर्मवीर बत्रा  ने कहा कि सम्मेलनों का उपयोग लोगों को एक साथ लाने और किसी विशिष्ट विषय से संबंधित मुद्दों और विचारों पर चर्चा करने के लिए किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा महाविद्यालय अध्यापन अनुसंधान विधाओं की ओर बढ़ता जा रहा है और इसी के तहत हमारा महाविद्यालय समय-समय पर अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन करवा कर शोधार्थियों व अध्यापकों को अनुसंधान के लिए प्रेरित कर रहा है |

????????????????????????????????????

 इस सम्मेलन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार गर्ग ने कहा कि भगत सिंह महज क्रांतिकारी देशभक्त ही नहीं बल्कि एक अध्ययनशील विचारक, दार्शनिक, चिंतक, लेखक, पत्रकार भी थे। उन्होंने यह भी कहा कि भगत सिंह की शहादत को कई वर्ष बीत चुके हैं। इन वर्षों में दुनिया की तस्वीर आश्चर्यजनक रूप से बदली है। इसके बावजूद आज भी उनके विचारों को पढ़ते हुए लगता है कि उनके विचार हमारे समाज के लिए बहुत जरूरी और प्रेरणादायक है, खासकर समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, धार्मिक अंधविश्वास व साम्प्रदायिकता, जातीय उत्पीड़न, आतंकवाद आदि के संदर्भ में। इस सम्मेलन की संयोजिका व राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. किरण मदान ने कहा कि भगत सिंह ने एक ऐसी दुनिया की कल्पना की थी, जहाँ सभी व्यक्ति को एक समान समझा जाए। उन्होंने दृढ़ता से माना कि जब तक काले और गोरे, सभ्य और असभ्य, अमीर और गरीब, छूत-अछूत आदि जैसे शब्द प्रचलित हैं, तब तक सार्वभौमिक भाईचारे की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती है।भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता न केवल उस समय थी बल्कि वर्तमान में यह और महत्वपूर्ण हो गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि भगत सिंह के विचारों व उनकी महत्ता से भावी पीढ़ी को अवगत कराया जाए और नए भारत के निर्माण के लिए उनके बौद्धिक योग्यता को अपनाया जाए। इसी अवसर पर सम्मेलन की सह -संयोजिका डॉ. पूनम मदान ने कहा कि भगत सिंह ने सांप्रदायिक और जातिवाद को बढ़ावा देने वाले लोगों का हमेशा विरोध किया था। वो सत्ता में ऐसा बदलाव चाहते थे जहां आम आदमी की आवाज़ सुनी जा सके। उन्होंने एक लेख “मैं नास्तिक क्यों हूँ?” को लिखकर धर्म और ईश्वर के बारे में अपने विचार प्रकट किए जिसमें लिखा है कि “अधिक विश्वास और अधिक अंधविश्वास खतरनाक होता है यह मस्तिष्क को मूर्ख और मनुष्य को प्रतिक्रियावादी बना देता है।| इस सम्मेलन के उदघाटन सत्र के अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता डॉ. चमन लाल  (पूर्व प्रोफेसर, जेएनयू , दिल्ली) ने भगत सिंह जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगत सिंह आज भी आधुनिक भारत के नवयुवकों के साहस के प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। उनके साहस और दृढ़ विश्वास इस बात से प्रमाणित होती है कि उन्होंने समाजवादी विचारों में आस्था रखते हुए उसकी कमियों को नकार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भगत सिंह को भिन्न-भिन्न भाषाएं बोलनी एवं लिखनी आती थी जैसे की अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, पंजाबी। भगत सिंह  इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाया करते थे जिसका अर्थ था कि देश में वह एक शोषण मुक्त समाज बनाना चाहते थे।  इस सम्मेलन के तकनीकी एवं परिपूर्ण सत्र के स्पीकर डॉ. कुशल पाल (राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष, दयाल सिंह महाविद्यालय, करनाल ) ने कहा कि भगत सिंह ने अपने अनेक लेखों व वक्तव्यों में साम्राज्यवाद के दमनकारी चरित्र के बारे में चर्चा की है। उनके अनुसार साम्राज्यवाद मनुष्य के हाथों मनुष्य के और राष्ट्र के हाथों राष्ट्र के शोषण का आधार है। साम्राज्यवादी अपने हितों को पूरा करने के लिए न सिर्फ न्यायालयों एवं कानूनों की अनदेखी करते हैं, बल्कि युद्ध तक की स्थिति उत्पन्न कर देते हैं।इस सम्मेलन के तकनीकी एवं परिपूर्ण सत्र के अध्यक्ष डॉ. विकास सभरवाल एवं सह-  अध्यक्ष डॉ. बलराम शर्मा रहे। उन्होंने  तकनीकी सत्र की समापन टिप्पणी करते हुए कहा कि भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया वह युवाओं के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा। जेल के दिनों में उनके लिखे खतों का लेखों से उनके विचारों का अंदाजा लगता है। इस सम्मेलन के समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. राम पाल सैनी (प्राचार्य,डीएवी महाविद्यालय, करनाल)  ने कहा कि इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों के महाविद्यालयों से अध्यापकों एवं शोधार्थियों द्वारा शहीद भगत सिंह: समकालीन समय में विचारों की प्रासंगिकता विषय पर बहुत ही सुंदर शब्दो से शोध पत्र प्रस्तुत किए | उन्होंने यह भी कहा कि यह बड़े हर्ष की बात है कि आज के समय में भी आज का युवा वर्ग भगत सिंह को याद करता है और उनके विचारों को मानता है। मंच का संचालन प्रो. खुशबू, प्रो.रेखा शर्मा, प्रो. राहुल के द्वारा किया गया | कार्यक्रम के अंत में सह- संयोजिका डॉ. पूनम मदान ने सभी का धन्यवाद किया और कहा कि हम आगे भी इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित करते रहेंगे | अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन सचिव डॉ. निधि मल्होत्रा, प्रो. माधवी एवं संयोजक समिति के सदस्यों- डॉ. शर्मिला यादव, प्रो. अंजलि, प्रो हिमांशी, प्रो.अश्वनी गुप्ता,प्रो.विनय भारती, प्रो.निशा गुप्ता,  प्रो मनीत कौर, प्रो सुखविंदर सिंह, प्रो.दीप्ति जुनेजा, प्रो., प्रो.रेखा शर्मा, प्रो. लीना आर्या, प्रो. राहुल का सराहनीय योगदान रहा | इस अवसर पर डॉ. शशि प्रभा,  डॉ. सुनित शर्मा, प्रो. नीलम, , प्रो. सोनिया, डॉ. सीमा,  प्रो.अजय पाल सिंह, डॉ. सुनीता ढांडा, डॉ. जोगेश, डॉ. निर्मला,डॉ. स्वाति पुनिया, डॉ.नेहा पुनिया, डॉ. ज्योति गहलोत  आदि मौजूद रहे |

Comments