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हरियाणा रत्न और स्नेकमैन ऑफ़ हरियाणा सतीश फफड़ाना ने छात्र-छात्राओं को किया साँपों के प्रति जागरूक

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 7, 2023 Tags: , , , , ,

-लोग सांप के ज़हर के कारण कम और डर के कारण अधिक मरते है: सतीश फफड़ाना

-एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में जैव विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह का सारगर्भित समापन.

BOL PANIPAT , 07 अक्टूबर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में 2 से 8 अक्टूबर तक मनाये जाने वाले राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के अंतिम दिन गांव फफड़ाना (करनाल) निवासी स्नेकमैन सतीश कुमार का व्यावहारिक व्याख्यान रहा जिसमे उन्होनें साँपों की विभिन्न प्रजातियों, सर्प दंश, इससे बचने के उपाय और एंटी-विनम दवाइयों के बारे में विस्तार से बताया और समझाया. उनके साथ उनकी टीम के सदस्य रविन्द्र एवं मंजीत और मीडिया से दीपक एवं सुनील ने भी कार्यक्रम में शिरकत की. सतीश कुमार और उनकी टीम का कॉलेज प्रांगण पहुँचने पर स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, डॉ मुकेश पूनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, प्रो रिया, प्रो ऋतु, प्रो नम्रता, प्रो मनोज कुमार, प्रो आशीष गर्ग, प्रो विशाल गर्ग, प्रो सोनिका शर्मा, शशि मोहन गुप्ता, दीपक मित्तल और चिराग सिंगला ने किया. स्नेकमैन सतीश कुमार को उनकी सेवाओं और वन्यजीवन को बचाने हेतू हरियाणा रत्न के अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. सतीश कुमार ने छात्र-छात्राओं के साथ जिवंत संवाद किया और साँपों से जुडी भ्रांतियों , मिथकों और अंधविश्वास को दूर किया. विदित रहे कि राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह को मनाने का उद्देश्य भारत की वनस्पतियों और जीवों की सुरक्षा और संरक्षण करना है.

सतीश कुमार ने कहा कि उनकी जिंदगी एक सांप ने पूरी तरह से बदल दी वे सातवीं कक्षा के छात्र थे तो उन्हें एक सांप ने काट लिया था. कामयाब इलाज से सतीश की जान तो बच गई लेकिन तभी से उनके मन में सांपों को जानने और समझने की जिज्ञासा पैदा हो गई. उन्होनें सांपों से संबंधित किताबें पढ़ीं और विभिन्न विशेषज्ञों से मिले. पूर्ण प्रशिक्षण के बाद ही उन्होनें सांपों को पकड़ना शुरू किया. वे सांप पकड़ने और उनसे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए स्नेक पार्क चेन्नई में प्रशिक्षण ले चुके हैं. इसके साथ-साथ पुणे, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी सांपों के विशेषज्ञों से ज्ञान प्राप्त किया है. स्नेक मैन सतीश 1998 से लेकर अब तक हरियाणा में पाई जाने वाली साँपों की सभी प्रजातियां 40 हजार के करीब सांप पकड़ चुके है. वे हरियाणा और इसके आस-पास के राज्यों में सांप पकड़ने के लिए जाते है और सांप पकड़ने के बाद वाइल्डलाइफ अधिकारियों की सहायता से साँपों को जंगल में छोड़ देते है. साँपों को जीने का हक तो है ही साथ ही ये पारिस्थितिकी तंत्र का एक अटूट हिस्सा भी है. लोगों तक पहुंचने के लिए उन्होनें रक रोचक तरीका अपना रखा है. उन्होनें करनाल और पानीपत की विभिन्न दुकानों पर अपना मोबाइल नंबर लिखकर पोस्टर लगा रखे है और कोई भी व्यक्ति फोन करके उनकी सेवाए मुफ्त में ले सकता है. अभी हाल ही में स्नेकमैन सतीश ने सांप पकड़ने ‌के लिए स्पेशल दस्ताने अमेरिका से मंगवाए हैं. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली एवं राजस्थान में पिछले लगभग 25 वर्षों से उनका यह सेवा कार्य जारी है. अज्ञानता और डर की वजह से लोग साँपों की ऐसी प्रजातियों को भी मौत के घाट उतार देते है जो विषैले नहीं होते है. लोग सांप के ज़हर के कारण कम और डर के कारण अधिक मरते है. दुनिया भर में साँपों की लगभग 3 हज़ार प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमे से भारत में जहरीला सर्पो की 69 प्रजातियां ज्ञात्त है. इनमे से 29 समुद्री सर्प तथा 40 स्थलीय सर्प है. जहरीले सर्प के सिर में जहरीला संचालक तथा ऊपरी जबड़े में एक जोड़ी जबड़े पाये जाते है. भारत में चार सबसे ज़हरीले सांप जिन्हें बिग फोर के नाम से भी जाना जाता है. ये है इंडियन कोबरा, कॉमन करैत, रसल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर. हरियाणा में साँपों की 13 प्रजातियों में ये चार प्रजातियाँ भी पायी जाती है. लोगों के मन में सांपों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां होती हैं जिसके प्रति उन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है. सांप काटने के बाद हमें समय बिलकुल नहीं बर्बाद करना चाहिए और पीड़ित व्यक्ति को 40 मिनट के भीतर हस्पताल ले जाना चाहिए. सांप जहरीला है या बिना जहर का है इस बात का ज्ञान आम आदमी को नहीं होता है. इसलिए मरीज को सीधे हस्पताल ले जाना हमेशा फायदेमंद होता है. झाड़-फूंक और सपेरों के चक्कर में पड़कर गवायाँ गया समय बहुत ही कीमती होता है. यदि कोई अपने घर, फैक्ट्री इत्यादि में साँपों से परेशान है तो लोग उनसे उनके मोबाइल नंबर 9255130130 पर सम्पर्क कर सकते है.

   प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के सफल आयोजन पर उन्हें बेहद ख़ुशी हुई है. भारत एक जैव विविधता से भरपूर देश है और यहाँ पर जानवरों एवं पौधों की प्रजातियों की एक विशाल श्रृंखला है. देश की वनस्पति और जीव विश्व की जैव विविधता का 7 प्रतिशत से अधिक है. विश्व के जीव-जन्तुओ का भारत में 7.4 प्रतिशत हिस्सा है. इस समृद्ध जैव विविधता को इसके संरक्षण के लिए उचित शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए वन्यजीव सप्ताह को कॉलेज में मनाया गया. पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में और वन्यजीवों की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए वन्यजीव सप्ताह को कॉलेज के विद्यार्थियों ने मनाया है. वन्यजीवों को कोई भी दीर्घकालिक नुकसान पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल सकता है. इसलिए वन्यजीवों की व्यवस्थित और पूरे दिल से रक्षा करना हमारा फ़र्ज़ बन गया है. जंगलों, जंगल में रहने वाले जानवरों, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं और मनुष्यों के बीच एक सहजीवी का रिश्ता है. चूँकि अब देश के नागरिक लगभग 28 प्रतिशत वनभूमि का प्रबंधन कर रहे हैं ऐसे में वन्यजीव सप्ताह का लक्ष्य और अधिक प्रासंगिक हो जाता है. 
   डॉ राहुल जैन ने कहा कि वन, वन प्रजातियाँ और उन पर निर्भर आजीविकाएँ कई वैश्विक संकटों के चौराहे पर हैं जिनमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और कोविड-19 महामारी के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी शामिल हैं. ऐसे में वन्यजीव सप्ताह के माध्यम से लोगो की जागरूकता को बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

छात्र-छात्राओं द्वारा सतीश फफडाना से पूछे गए सवाल-

अंशिका (बीएससी तृतीय)- ऐसी मान्यता है कि हमें साँपों को ढूध पिलाना चाहिए. क्या सांप वाकई में ढूध पीते है?

सतीश- बिलकुल नहीं. सांप एक मांसाहारी प्राणी है इसलिए इसका पाचन तंत्र ढूध को कभी नहीं पचा सकता है. फिर भी मान लो अगर सांप को ढूध पिला ही दिया गया हो तो यह सांप के जीवन के लिए घातक सिद्ध होगा क्यूंकि इसे पचाने के एंजाइम्स उसके शरीर में मौजूद ही नहीं है.

तन्नु (बीएससी तृतीय)- क्या सांप हमेशा जोड़ो में रहते है? और क्या हमने अगर जोड़े के एक सांप को मार दिया तो दूसरा उसका बदला लेता है?

सतीश- बच्चों ये सब मिथक और भ्रांतियां है जिनको फिल्मों और अन्धविश्वास फैलाने वाले लोगो ने हवा दी है. ऐसा कुछ भी नहीं है. सांप भी अन्य जीव-जंतुओं की तरह ही एक प्राणी है.

आँचल (बीएससी प्रथम)- सर क्या मणि वाले और इच्छाधारी सांप भी होते है?

सतीश- (हँसते हुए) ...बच्चों ये सारा भ्रमजाल फिल्मों ने फैलाया हुआ है. आप खुद सोच के देखो 2-4 किलो वजन का सांप कैसे 60-70 किलो के इंसान में बदल सकता है. इतना तो तर्क हम खुद भी लगा सकते है. ये सारी भ्रान्तिया और अन्धविश्वास है.

कीर्ति (बीएससी द्वितीय)- सपेरे की धुन पर सांप कैसे नाचते है? क्या उन्हें बीन की आवाज सुनाई देती है?

सतीश- इसका असल जवाब यह है कि सांप बहरे होते हैं लेकिन अंधे नहीं होते. जब सपेरा बीन बजाता है तो ये सांप सपेरे की हलचल के आधार पर अपने शरीर को हिलाते हैं. इसे देखकर ये भ्रम होता है कि सांप नाच रहे हैं. जबकि असल में वो सिर्फ अपना शरीर हिला रहे होते हैं.

रजत (बीएससी तृतीय)- हमारे घर में सांप न आये इसके लिए हमें क्या करना चाहिए?

सतीश- बच्चों सबसे पहले तो हमें अपने घर और इसके आस-पास की साफ़-सफाई करनी चाहिए. कबाड़, इंटों का ढेर, पुराने गत्ते प्लास्टिक इत्यादि का ढेर घर या घर के आस-पास नहीं होना चाहिए.

अमित (बीएससी द्वितीय)- सांप अगर काट जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?

सतीश- सबसे पहले काटने वाले स्थान के पास हल्के दबाव (ज्यादा जोर से नहीं) से कपड़ा बांधना चाहिए. पीड़ित को कभी भी न चलने देना चाहिए, न कुछ खाने को देना चाहिए और न ही उसे सोने देना चाहिए. झाड़-फूँक और सपेरों से बचना चाहिए और तुरंत पीड़ित को हस्पताल ले जाना चाहिए. जो सपेरों इत्यादि के चक्कर में पड़ेगा उसकी जान जाने का खतरा भी उतना ही ज्यादा होगा.  

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