‘लैंगिक समानता’और ‘डिजिटल साक्षरता’ विषय पर सेमिनार का आयोजन
BOL PANIPAT : आई.बी.पी.जी. महाविद्यालय की एन.एस.एस. यूनिट द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे दिन का आयोजन अत्यंत उत्साह और ऊर्जा के साथ किया गया। आज की गतिविधियों का मुख्य केंद्र ‘लैंगिक समानता’ और ‘डिजिटल साक्षरता’ रहा । दिन के मुख्य सत्र में मर्था फैरेल फाउंडेशन की प्रोग्राम ऑफिसर सोनिया खत्री ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उनके साथ ए.एस.आई. रेनू भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत में कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शशि प्रभा मलिक, डॉ. सुनीत शर्मा, एन.एस.एस. प्रोग्राम ऑफिसर खुशबू और प्राध्यापक कुलदीप शर्मा ने मुख्य अतिथियों को गमला भेंट कर उनका औपचारिक स्वागत किया। प्राचार्या डॉ. शशिप्रभा मलिक ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “एक शिक्षित और सशक्त राष्ट्र वही है जहाँ बेटियाँ सुरक्षित महसूस करें और उन्हें बेटों के समान आगे बढ़ने के अवसर मिलें। हमारे स्वयंसेवक समाज में इस बदलाव के वाहक हैं।” मुख्य वक्ता सोनिया खत्री ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, “समाज में बदलाव की शुरुआत हमारे अपने घर और सोच से होती है। लैंगिक समानता का अर्थ केवल पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार देना नहीं है, बल्कि एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ अवसर लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर मिलें। युवाओं को रूढ़िवादी सोच को छोड़कर एक समावेशी समाज का निर्माण करना होगा।” एन.एस.एस. प्रोग्राम ऑफिसर खुशबू ने बताया, “लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता केवल एक दिन का विषय नहीं, बल्कि हमारे जीवन का संस्कार होना चाहिए। हमें ‘समानता’ को अपने व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।”दोपहर के सत्र में “डिजिटल साक्षरता” विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने आज के युग में इंटरनेट के सही उपयोग, साइबर सुरक्षा और डिजिटल लेनदेन के महत्व पर अपने प्रभावशाली विचार रखे। इसके पश्चात स्वयंसेवकों के लिए खेलकूद गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें ‘रस्सा-कशी’ प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण रही। इस गतिविधि ने स्वयंसेवकों में टीम भावना और शारीरिक क्षमता का संचार किया। शाम के सत्र में स्वयंसेवकों द्वारा खोतपुरा गाँव में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” विषय पर एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई। स्वयंसेवकों ने हाथों में तख्तियां लेकर और गगनभेदी नारों के माध्यम से ग्रामीणों को बेटियों की शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को बताया कि समाज के समग्र विकास के लिए बेटियों का शिक्षित होना अनिवार्य है। शिविर के तीसरे दिन को सफल बनाने में डॉ नीतू भाटिया एवं प्राध्यापक कुलदीप शर्मा का विशेष सहयोग रहा।

Comments