एसडी पीजी कॉलेजपानीपत में रोजगार मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यशाला का आयोजन
इंस्टीट्यूट ऑफ कास्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की करनाल पानीपत चैप्टर के अधिकारियों ने किया वाणिज्य के छात्रों का मार्गदर्शन
सीए का कोर्स हमें न सिर्फ आत्मनिर्भर, बल्कि रोजगार देने वाला भी बनाता है: संकल्प वधवा सीएमए दिल्ली
BOL PANIPAT, 26 अक्टूबर.
एसडी पीजी कॉलेज में वाणिज्य संकाय के बीकॉम, बीबीए एवं एमकॉम के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय रोजगार मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यशाला का शानदार आयोजन किया गया जिसमे लगभग 150 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और वाणिज्य में स्नातक होने के बाद कैरियर के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण और व्यावहारिक जानकारी हासिल की । कार्यशाला में बतौर विशिष्ट मेहमान एवं वक्ता सीएमए दिल्ली संकल्प वधवा, इंस्टीट्यूट ऑफ कास्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की करनाल पानीपत चैप्टर से सीएमए नीरज कुमार निदेशक कैरियर काउंसलिंग सेल, सीएमए डॉ रेखा चेयरपर्सन सीएमए, सीएस विधु संस्थापक सदस्य एवं कोषाध्यक्ष ने शिरकत की और छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया । मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, उप-प्राचार्य डॉ नवीन गोयल, प्रो पवन सिंगला, डॉ राकेश गर्ग, डॉ दीपा वर्मा, डॉ दीपिका अरोड़ा मदान, डॉ पवन कुमार, प्रो विशाल, प्रो पूजा, प्रो हिमानी नारंग, प्रो शिल्पा और प्रो मनोज कुमार ने किया । मंच संचालन डॉ दीपिका अरोड़ा मदान ने किया ।
संकल्प वधवा सीएमए दिल्ली ने कहा कि कॉमर्स करने वाले ज्यादातर छात्रों का सपना ग्रेजुएशन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट या सीए कोर्स करना होता है । सीए कोर्स को करने के लिए अथक मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है क्यूंकि इस कोर्स में छात्रों को कठिन परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है । सीए का काम वित्तीय लेखा-जोखा तैयार करना, वित्तीय सलाह देना, ऑडिट अकाउंट का विश्लेषण करना और टैक्स से संबंधित कार्य करना होता है । टैक्स के भुगतान का हिसाब-किताब भी सीए के ही जिम्मे होता है । मान-सम्मान के नजरिये से सीए का कार्य उच्च कोटि में गिना जाता है । किसी भी अच्छे अकाउंटेंट का स्टेटस डॉक्टर और इंजीनियर से कम नहीं होता । एक सफल सीए फाइनेंशियल सिस्टम और बजट का मैनेजमेंट करता है, फाइनेंशियल ऑडिट करता है, वित्तीय सलाह देता है, क्लाइंट के साथ संपर्क बना कर रखता है और वित्तीय जानकारीयाँ एवं परामर्श देता है । कंपनी के सिस्टम का समीक्षा और जोखिम का विश्लेषण करना, वित्तीय जानकारी और सिस्टम की जांच करने के लिए टेस्ट करना, टैक्स प्लानिंग पर ग्राहकों को सलाह देना, अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स को बनाए रखना और छोटे व्यापार के लिए अकाउंट मैनेजमेंट इनफार्मेशन तैयार करना, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर ग्राहक को सलाह देना, व्यापार में सुधार लाने के लिए ग्राहक को सलाह देने के साथ दिवालियापन से निपटने के तरीके बताना आदि भी सीए के द्वारा किये जाने वाले कार्य है ।

डॉ रेखा चेयरपर्सन सीएमए ने कहा कि वाणिज्य का विद्यार्थी बीकॉम, बीबीए, एमबीए तो कर ही सकता है, इसके अलावा बीएमएस, बीबीए एलएलबी, चार्टर्ड एकाउंटेंसी, कंपनी सेक्रेटरी आदि जैसे कोर्स के रूप में उसके पास बहुत ही अच्छे विकल्प मौजूद रहते है । टैक्स कंसलटेंट, टैक्स ऑडिटर, अकाउंटेंट, बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर आदि की नौकरियां भी वाणिज्य के छात्र के लिए उपलब्ध है ।
सीएस विधु संस्थापक सदस्य एवं कोषाध्यक्ष ने कहा कि हमारा पहला कदम ये जानना होना चाहिए की हम जीवन में क्या बनना चाहते हैं और इसी बात को जानने में आज उन्होनें विद्यार्थियों की मदद की है । कई बार हम खुद के लिए बहुत छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करते है परन्तु उन्हें हासिल करने के लिए हम समय रहते क्या विचार करते है यह सफलता प्राप्ति की दिशा में पहला महत्वपूर्ण एवं ठोस कदम होता है । हमारे लिए हमारे लक्ष्यों के क्या मायने है इस बात पर हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से योग्य एवं सक्षम कैरियर की योजना बनाने में और शैक्षिक मार्गदर्शन में भरपूर मदद मिलती है । कामयाब व्यक्तियों को तैयार करने के लिए इस प्रकार के वृहद ज्ञान से कैरियर का भी बखूभी निर्माण होता है । कैरियर मार्गदर्शन और परामर्श सार्वजनिक और निजी शिक्षा के क्षेत्र में युवाओ को दिशा दिखाते है । सरकार भी अब शिक्षा को रोज़गारपरक बनाने की दिशा में कई कदम उठा रही है । कालेजो में मेंटर का प्रावधान भी इसीलिए किया गया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे है । आज की कार्यशाला भी इसी दिशा में एक कड़ी है ।

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