एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस इकाईयों द्वारा ‘सेवा पखवाड़ा’ के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन
–उच्चतर शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार स्वयंसेवकों ने किया पौधारोपण और चलाया सफाई अभियान
–नागरिक स्वच्छता के प्रति इतने जागरूक हो कि ऐसे स्वच्छता पखवाड़ो की जरुरत ही न पड़े: प्रो प्रवीण आर खेरडे
BOL PANIPAT , 20 सितम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में उच्चतर शिक्षा विभाग पंचकुला के निर्देशानुसार 17 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक चलने वाले ‘सेवा पखवाड़े’ के अंर्तगत एनएसएस स्वयंसेवकों ने कॉलेज प्रांगन में पौधारोपण में हिस्सा लिया और बड़ी संख्या में वृक्ष लगाए । तत्पश्चात स्वयंसेवकों ने रैली निकाली और कॉलेज और इसके आस-पास के स्थानों में साफ़-सफाई की । कार्यकर्ताओं ने पानीपत रेलवे स्टेशन और उसके समीप स्थित झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर भी स्वच्छता अभियान चलाया । रैली को हरी झंडी उप-प्राचार्य प्रो प्रवीण आर खेरडे ने दिखाई । स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन प्रोग्राम ऑफिसर एवं स्वच्छता एम्बेसडर डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने किया । एनएसएस स्वयंसेवकों ने पहल कर अपने राष्ट्रीय कर्तव्य बोध का परिचय दिया और सम्पूर्ण पखवाड़े में आमजन को स्वच्छता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के बारें में जागरूक किया ।
प्रो प्रवीण आर खेरडे ने कहा कि नागरिक स्वच्छता की ओर इतने जागरूक हो कि ऐसे स्वच्छता पखवाड़ो की जरुरत ही न पड़े । जल, स्वच्छता और साफ-सफाई सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं और इन्हें नजरअंदाज करने पर इसके दूरगामी परिणाम होते हैं । भारत सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है लेकिन जब जल, स्वच्छता और साफ-सफाई संकेतकों की बात आती है तो स्थिति चिंताजनक है । 1.4 अरब से अधिक की आबादी वाले देश में स्वच्छता पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता हो चली है । ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के प्रमुख घटकों में से एक है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जीवन की सामान्य गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है ।
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि कचरे के निष्पादन के मुद्दे से निपटने का समाधान अब सेवा वितरण और तकनीकी मॉडल की खोज करना है जो की क्रियाशील, व्यावहारिक, सामाजिक रूप से स्वीकार्य, संस्थागत रूप से संगत और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने चाहिए । संसाधन पुनर्प्राप्ति के लिए मूल्य श्रृंखला पुनर्चक्रण पर विचार करना भी अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार हमें एक परिपत्र अर्थव्यवस्था में सुचारू रूप से सुनिश्चित करना होगा ।
डॉ संतोष कुमारी ने कि स्वच्छता शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से मानव जीवन का एक बहुत ही आवश्यक घटक है । आध्यात्मिक स्वच्छता का अर्थ है अपने धर्म की मान्यताओं और रीति-रिवाजों का पालन करना । दूसरी ओर भौतिक स्वच्छता मानवता के कल्याण और अस्तित्व के लिए आवश्यक है । स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीना बहुत ज़रूरी है । असल में स्वास्थ्य और स्वच्छता एक दूसरे से जुड़े हुए हैं । अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए स्वच्छता का अभ्यास करना ज़रूरी है । अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखना और बीमारियों से बचना इंसान के लिए बहुत ज़रूरी है ।

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