एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों द्वारा मतदाताओं को वोट बनवाने और मताधिकार के हक़ को इस्तेमाल करने के बारे चलाया जागरूकता अभियान
–जिला प्रशासन के सहयोग से नागरिकों की वोट बनवाने में की मदद
–मताधिकार का प्रयोग देश के प्रति प्रेम को उजागर करने का सबसे बेहतरीन माध्यम है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT, 29 दिसम्बर.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों द्वारा नव वर्ष के आगमन पर मतदाताओं को वोट बनवाने और मताधिकार के हक़ को विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करने के बारे एक जागरूकता अभियान चलाया गया जिसमे जिला निर्वाचन कार्यालय और जिला प्रशासन का विशेष सहयोग रहा । एन.एस.एस. कार्यकर्ताओं ने जिला सचिवालय, पानीपत बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और कई आवासीय कालोनियों में जाकर लोगो को अपना वोट बनवाने के लिए प्रेरित किया और वोट बनवाने की प्रक्रिया को समझाया एवं आवेदकों के फार्म भरे । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने स्वयंसेवकों को निर्भीकता, जागरूकता और निरंतरता के साथ वोट डालने की शपथ दिलाई और फिर उन्हें मिनी सचिवालय के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया । उनके साथ एन.एस.एस. प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, प्रो मनोज कुमार, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला आदि भी उपस्थित रहे । एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने खुद की पहल पर कॉलेज प्रांगण से बाहर निकलकर अपने राष्ट्रीय कर्तव्य बोध का परिचय दिया और आमजन में वोट के महत्व और प्रजातन्त्र के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के प्रति उन्हें जागरूक किया । असल में मतदाता और उसका मत ही भारतीय लोकतंत्र या किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र का मूल आधार है ।
प्रधान दिनेश गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि भारतीय लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका सबसे अहम है । नागरिक ही सरकार चुनकर देश की दिशा तय करते हैं । ऐसे में सबसे पहला कार्य अपने वोट को बनवाना है ताकि समय आने पर नागरिक अपने वोट को दाल सके । कॉलेज के युवा स्वयंसेवकों ने जिस तरह इस जिम्मेदारी को उठाया है वह वाकई में काबिले तारीफ़ पहल है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि भारत एक गणतांत्रिक देश है और गणतांत्रिक देश में सबसे अहम होता है चुनाव और मत का प्रयोग । गणतंत्र एक यज्ञ की तरह होता है जिसमें मतों यानि वोटों की आहुति बेहद जरुरी मानी जाती है । एक वोट भी सरकार और सत्ता बदलने के लिए काफी होती है । वोट न बनवाना, वोट डालने में आलस करना और ‘मेरे एक वोट से क्या बदलेगा’ जैसे तकिया-कलामों की वजह से देश को कितना नुकसान हो सकता है हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते । हम स्वयं को बदलेंगे तो, सिस्टम खुद-ब-खुद बदल जाएगा । इंटरनेट पर भारतीय सिस्टम और राजनीति पर बड़ी-बड़ी बहस करने वाले अकसर भारतीय गणतंत्र के इस यज्ञ में सिर्फ इसलिए वोट डालने नहीं जाते क्यूंकि उन्हें लाइन में लगता पड़ता है और कुछ देर के लिए अनुशासन का पालन करना पड़ता है । गणतांत्रिक प्रणाली तभी सुचारु रूप से चल सकती है जब हर इंसान अपने मत का प्रयोग करे और अपनी इच्छा-अनिच्छा को जाहिर करे । एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने वोट बनवाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेकर देश के प्रति अपनी भागीदारी को सुनिश्चित किया है ।
एन.एस.एस. प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि भारत में युवाओं की भागीदारी काफी अहम् है और ऐसे में उन्हें सबसे पहले अपना वोट जरुर बनवाना चाहिए । आज हर जिले में जगह-जगह ऐसे सेंटर स्थापित किए गए है जहां मतदाता पहचान पत्र बनवाने के कार्य किए जा रहे हैं । हर जिले, ब्लॉक, गांव, स्कूल एवं कॉलेज में जगह-जगह कैंप लगाकर भी इस कार्य को संपन्न किया जा रहा है । इस परिप्रेक्ष में हरियाणा सरकार द्वारा चलाये जा रहे जागरुकता अभियान भी अपने आप में एक उल्लेखनीय कदम है । परंतु मतदाता सूची में नामांकन की प्रक्रिया में और भी कई कठिनाइयां हैं । शिक्षा का अभाव और सुदूर ग्रामीण और यहां तक की शहरी गरीब बस्तियों में भी जन्म प्रमाण पत्र का न होना एक ऐसा बड़ा कारण है जिससे ग्रामीण और शहरी गरीबों, युवाओं और वयस्कों की बड़ी संख्या अकसर मतदाता सूची में नामांकन से वंचित रह जाती है । इस चुनौती को पार पाने के लिए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन पूरी तरह गंभीर है । उन्होनें कहा कि जब तक हर एक मतदाता को अपने मत का सही अर्थ समझ में नहीं आएगा तब तक भारत का प्रजातन्त्र मजबूत नहीं होगा । सभी को गणतंत्र के इस टीके को लगाना ही होगा । मतदाताओं को समझना होगा कि उनका एक वोट केवल सरकार ही नहीं बल्कि व्यवस्था बदलने का हथियार भी है और इसके जरिए मतदाता का भाग्य यकीनन बदल सकता है ।
एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने अपने आस-पड़ोस के लोगों, रिश्तेदारों और मित्रों को वोट बनवाने और वोट डालने के महत्व के बारे में जागरूक और प्रेरित करने का प्रण भी लिया ।

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