Saturday, April 25, 2026
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आर्य कॉलेज में मकर संक्रांति के अवसर पर किया गया हवन यज्ञ.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at January 15, 2024 Tags: , , , ,

–    मकर संक्रांति को स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है-  अजय गर्ग

BOL PANIPAT – सोमवार 15 जनवरी 2024, सोमवार को आर्य पीजी कॉलेज में मकर संक्रांति के अवसर पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता, आर्य समाज बडा बाजार के आचार्य ओम प्रकाश व प्राध्यापकों के साथ-साथ विद्यार्थियों ने भी हवन में आहुति डालकर पर सभी के लिए मंगल कामना की। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने सभी को मकर संक्रांति की बधाई दी और सभी को संबोधित करते हुए बताया कि मकर संक्रांति हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। यह त्योहार, सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल एक ही तारीख 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। जब सूर्य उत्तरायण होकर मकर रेखा से गुजरता है। हालांकि की कई बार यह त्योहार 13 या 15 जनवरी को भी मनाया जाता है पर ऐसा बहुत ही कम ही होता है। डॉ. गुप्ता ने मकर संक्रांति के महत्व के बारे में बताया कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-2 तरह से मनाया जाता है। आंध्र प्रदेश,केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है। वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है।

आर्य समाज बडा बाजार,पानीपत के प्रधान अजय गर्ग ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति त्योहार का बहुत महत्व है। उन्होंने बताया कि सूर्य के उत्तरायण होने के बाद से देवों की ब्रह्ममुहूर्त उपासना का पुण्यकाल प्रारंभ हो जाता है। इस काल को ही परा-अपरा विद्या की प्राप्ति का काल कहा जाता है। इसे साधना का सिद्ध काल भी कहा गया है। इस काल में देव प्रतिष्ठा, गृह निर्माण, यज कर्म आदि पुनीत कर्म किए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मकर संक्रांति को स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन तीर्थों एवं पवित्र नदियों में स्नान का बेहद महत्व है साथ ही तिल,गुड,खिचडी,फल एवं राशि अनुसार दान करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है। और ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं।

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