Thursday, April 30, 2026
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देश को एक सूत्र में बाँधने की ताकत हिंदी भाषा में है: डॉ देव शंकर झा ‘नवीन’

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 22, 2024 Tags: , , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेला’ का छठा दिन 

यदि हमने देश के पर्यावरण को बचाना है तो इसकी एक तिहाई धरा पर वन लगाने होंगे: सुभाष यादव आई.ऍफ़.एस. संरक्षक रोहतक मंडल

किसान जीवन हिंदी साहित्य का आधार है, बिना इसके हिंदी साहित्य में शुन्यता है: अनुज कुमार राय प्रधान वैज्ञानिक  

BOL PANIPAT , 22 अगस्त,  एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव – तृतीय पुस्तक मेला’ जो हरियाणा पुलिस की पहल, जिला प्रशासन के सानिध्य और नगर निगम पानीपत, जिला परिवहन विभाग पानीपत, महिला बाल विकास पानीपत, पंचायत विभाग पानीपत, राजभाषा अनुभाग इंडियन आयल पानीपत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा, वन विभाग और आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित है, के छठे दिन बतौर मुख्य अतिथि सुभाष यादव आई.ऍफ़.एस. संरक्षक रोहतक मंडल ने शिरकत की । आज के कार्यक्रम के प्रेरणाश्रौत और मार्गदर्शक राज नारायण कौशिक आई.ऍफ़.एस. महानिदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग रहे । कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ अनुज कुमार राय प्रधान वैज्ञानिक भारतीय गेंहू एवं जौं अनुसंधान केंद्र करनाल ने रखी और मुख्य व्याख्यान डॉ सुरेश कुमार प्रधान वैज्ञानिक केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल ने दिया । उनके साथ डॉ कैलाश और सुनील मलिक ने कार्यक्रम की शोभा बढाई । प्रथम सत्र का थीम ‘प्रकृति खेती समय की पहल’ रहा ।

सांयकालीन सत्र में ‘राजभाषा हिंदी के क्षितिज का विस्तार’ विषय पर कार्यशाला केअ आयोजन नगर राजभाषा क्रियान्वन समिति पानीपत द्वारा किया गया जिसमे बतौर मुख्य अतिथि डॉ देव शंकर झा ‘नवीन’ भारतीय भाषा संस्थान जवाहर लाल नेहरु विश्वविधालय नई दिल्ली ने शिरकत की । अध्यक्षता विवेक नारायण महाप्रबंधक इंडियन आयल ने की । आशुतोष चन्द्र झा राजभाषा प्रभारी ने कार्यशाला की शोभा बढाई । समिति के 42 सदस्यों, कर्मचारियों, राजभाषा अधिकारियों और कार्यालय प्रमुख ने कार्यशाला में हिस्सा लिया । केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों, सी.आई.एस.ऍफ़. आदि भी कार्यक्रम का हिस्सा बने । कार्यशाला का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रयोग को कार्यस्थलों पर बढ़ावा देना है । हिंदी को सरल और सटीक कैसे बनाया जाए ताकि इसे आम आदमी भी समझ और प्रयोग कर सके पर गंभीर मंथन किया गया । हिंदी भाषा के महत्व को स्थापित करना और इसका प्रसार-प्रचार करना भी कार्यशाला का उद्देश्य रहा । हिंदी का साहित्यिक इस्तेमाल तो बहुत हो रहा है परन्तु अब इसे कार्यस्थल पर भी बढ़ावा देना होगा ।    .    

मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ संगीता गुप्ता, डॉ संतोष कुमारी और डॉ राकेश गर्ग ने शाल, पौधा रोपित गमले और पुस्तकें भेंट करके किया । मंच संचालन जन सम्पर्क अधिकारी राजीव रंजन ने किया । कार्यक्रम में व्यवस्था और अनुशासन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने अदा की । जारी पुस्तक मेले में देशभर से आये 40 से अधिक प्रकाशकों ने हज़ारों की संख्या में अपनी पुस्तकों को प्रदर्शित किया जिसमे आज विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों के सैंकड़ो छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया । कल पुस्तक मेले का अंतिम दिन रहेगा जिसमे पानीपत के प्रत्येक नागरिक का पधारने पर स्वागत है ।

सुभाष यादव आई.ऍफ़.एस. संरक्षक रोहतक मंडल ने कहा कि आधुनिक युग का इंसान मोबाइल तक सिमित हो गया है जबकि उसे पुस्तकों के साथ खुद को जोड़ना चाहिए । किताबों का ज्ञान ही सच्चा और असल ज्ञान है । आज़ादी के समय बेशक देश में चीज़ों का अभाव था परन्तु उस समय हवा, मिट्टी और पानी शुद्ध थे । वर्तमान की तीव्र और मुनाफाखोर खेती ने प्रकृति का बहुत नुकसान किया है । प्रकृति के अंधाधुंध दोहन ने हमारी आने वाली पीढ़ियों के जीवन पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है । खेती के प्राचीन तरीके ही मानव जाती का कल्याण करेंगे । जलवायु परिवर्तन के प्रति सजग होने अब सर्वाधिक आवश्यकता है । जल संकट और मृदा प्रदूषण से आने वाला समय हरियाणा के लिए कष्टकारी हो सकता है । प्रकृति खेती ही उत्पन्न समस्याओं का एकमात्र हल है । असल में प्राकृतिक खेती वह खेती है जिसमे फसलों पर किसी भी प्रकार का रासायनिक कीटनाशक एवं उर्वरको का प्रयोग नहीं किया जाता है । सिर्फ प्रकृति के दौरान निर्मित उर्वरक और अन्य पेड़ पौधों के पत्ते खाद, पशुपालन, गोबर खाद एवं जैविक कीटनाशक  उपयोग लाया जाता है । यह एक प्रकार से विविध प्रकार की कृषि प्रणाली है जो फसलों, जीव-जन्तुओं और पेड़ो को एकीकृत करके रखती हैं ।      

डॉ सुनील कुमार प्रधान वैज्ञानिक ने कहा कि आज का समय कौशल विकास का है और जो युवा जितनी अधिक पुस्तकें पढ़ेगा वह उतना ही पारंगत बनेगा । अगर पेड़ न होते तो हमारी यह शस्य श्यामला धरती किसी भी प्रकार के जीवन को धारण करने के योग्य न होती । पेड़ ही तो हैं जो वायु को शुद्ध करते हैं, बादलों को अपनी ओर खींचते हैं और बारिश लाते हैं और वातावरण की तपन को कम करते हैं । जंगल किसी देश और उसके लोगों की आर्थिक व्यवस्था के आधार हैं । पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि किसी देश का एक तिहाई भाग जंगलों से ढका रहे । लेकिन भारत में लगातार ईंधन की लकड़ी की मांग तथा फसलों की उपज के दबाव के कारण हम पहाड़ों में वन रोपण नहीं कर पा रहे हैं और इसका परिणाम है कि हमारे जंगल बुरी तरह वनस्पति विहीन और नंगे होते जा रहे हैं । हमारे देश में आंकड़ों के अनुसार इस समय कुल 23 प्रतिशत भूमि पर जंगल हैं पर वास्तव में केवल 10-14 प्रतिशत क्षेत्र ही वनस्पति से ढका है ।    

डॉ अनुज कुमार राय प्रधान वैज्ञानिक ने कहा कि इंसान को खुद के लिए नहीं वरना समाज के लिए जीना चाहिए । वर्तमान में हुई प्रदूषित हवा, पानी और मिट्टी के लिए इंसान का यही नजरिया जिम्मेवार है । सच्चाई यही है की पर्यावरण का सत्यनाश सिर्फ और सिर्फ इंसान ने किया है । हम असल में गेहूं-चावल का निर्यात नहीं करते बल्कि अपने पानी का निर्यात करते है क्यूंकि इन दोनों ही फसलों को पैदा करने के लिए जल अधिक मात्रा में लगता है । जिन देशों को हम इन्हें बेचते है शायद वे देश हम से अधिक सयाने है । घटते भूजल से हरियाणा के लगभग दो हज़ार गाँव रेड जोन में पहुंच चुके हैं और लगातार घट रहे भूजल से 14 जिलों में स्थिति अति गंभीर होने जा रही है । हरित क्रांति के बाद से मुख्य खरीफ फसल के रूप में धान की शुरूआत, फसल तीव्रता में भारी वृद्धि और तेजी से शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण पंजाब और हरियाणा पानी की कमी वाले राज्य बन गए हैं और राजस्थान बनने की ओर बढ़ चले है । अब असल मुद्दा टिकाऊ फसल प्रतिरूप पर लौटने और जल-उपयोग दक्षता में सुधार करने का होना चाहिए वरना इंसान का भविष्य अंधकारमयी होगा ।

डॉ देव शंकर झा ‘नवीन’ भारतीय भाषा संस्थान जे.एन.यू. नई दिल्ली ने कहा कि राजभाषा में पूरे देश को एक सूत्र में बाँधने की ताकत है । इस पुस्तक मेले की विशेषता यह रही कि यहाँ देश के तक़रीबन हर लेखक की पुस्तक का हिंदी में अनुवादित प्रकाशन उपलब्ध रहा । हिंदी जोड़ने की भाषा है और पूरे देश को एक सूत्र में हिंदी भाषा ने ही पिरोया है । सरकार की ‘आदान-प्रदान’ योजना के माध्यम से देश की विभिन्न भाषाओं के साहित्य को अनुवाद के माध्यम से समाज को सुलभ कराना है ताकि देश के युवाओं को उनकी समृद्ध पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में संवेदनशील बनाया जा सके और इनको भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करने हेतू सक्षम किया जा सके । युवाओं के देश के दूसरे हिस्से में रहने वाले लोगों के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध विकसित हो ऐसा इस योजना का प्रयास है । 

विवेक नारायण महाप्रबंधक इंडियन आयल ने कहा कि हमें हिंदी के प्रति समर्पित रहना चाहिए । हमें इसे सीखना, इसका सदुपयोग करना और इसका संरक्षण करना चाहिए । हमें हिंदी की बढ़ती उपयोगिता को समझना चाहिए ताकि दूसरों के समक्ष हम अपने विचारों को सही ढंग से व्यक्त कर सकें ।

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