-जिला बाल संरक्षण विभाग द्वारा बच्चों के बीच ड्रग्स और मादक पदार्थों के सेवन व अवैध तस्करी की रोकथाम पर जागरूकता एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया
-डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने एनडीपीएस एक्ट के बारे में दी विस्तार से जानकरी दी
BOL PANIPAT: 6 सितम्बर: जिला बाल संरक्षण विभाग द्वारा बच्चों के बीच ड्रग्स और मादक पदार्थों के सेवन व अवैध तस्करी की रोकथाम पर शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित पुलिस विभाग के सभागार में एक दिवसीय जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को जागरूक करने के लिए शिक्षा, स्थास्थ्य, बाल देख रेख केंद्र व पुलिस विभाग में मास्टर ट्रेनर तैयार करना है।
डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने बतौर मुख्य अतिथि और महिला एवं बाल विकास अधिकारी लक्ष्मी देवी ने विशिष्ठ अतिथि के रूप में पहुंचकर सेमिनार का शुभारंभ किया।
डीएसपी सतीश वत्स ने इस दौरान नारकोटिक्स ड्रग्स और साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एनडीपीएस अधिनियम 1985 के बारे में विस्तार से जानकारी दी और बच्चों को नशे से बचाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया। सेमिनार में शिक्षा विभाग, बाल देख रेख केंद्र, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग व पुलिस विभाग के अधिकारियों को कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
डीएसपी सतीश वत्स कहा कि वर्तमान में नशा एक गंभीर समस्या है। इससे निजात पाने के लिए हम सभी को मिलकर सांझे प्रयास करनें होगें। नशे की लत में पड़कर लोग अपने माता पिता तक की हत्या कर देतें है।
नशे का सेवन व्यक्ति के शरीर के लिये तो हानिकारक है ही साथ ही यह अपराध करने का मुख्य कारण भी बनता है। जो व्यक्ति नशा करने लग जाता है वह पैसे ना होने पर अपराधिक वारदातों को अंजाम देना शुरू कर देतें है। नशा वो बिमारी है, जो न केवल एक परिवार बल्कि समाज और देश के भविष्य को खतरे में डालने का काम करता है। नशा मुक्त व अपराधमुक्त समाज की स्थापना के लिए हम सभी को मिलकर कदम उठाने होंगे।
उन्होंने बताया कि एनडीपीएस एक्ट में पकड़े जाने पर 6 माह से लेकर 15 साल तक की सजा व 10 हजार से लेकर 2 लाख रूपये तक जुर्माना का प्रावधान है। इसके साथ ही नशा तस्करों द्वारा नशे की काली कमाई से बनाई संपति को भी जब्त करने का प्रावधान है। नशा तस्करी के आदतन अपराधी जिनकी बार बार शिकायते मिलती रहती है उनको भी बगैर केस दर्ज किये एक साल तक जेल में रखने का प्रावधान है। इस कार्रवाई के लिए स्पेशल केस बनाकर एसीएस होम के पास भेजकर अनुमति ली जाती है।
सिविल अस्पताल से पहुंची डॉक्टर मोना ने इस दौरान नशे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणामों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशे की गर्त में फसें लागों को इससे निकालने के लिए जिला में सिविल अस्पताल के अतिरिक्त 4 अन्य स्थानों पर डी एडिक्शन सेंटर बनाए गए है।
इस दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी निधि गुप्ता, डाक्टर मोना, डीईओ राकेश बूरा, पदमा रानी चेयरपर्सन चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी व ड्रग कंट्रोल ऑफिसर मौजूद रहे।

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