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ग्लोबल यूथ फेस्टिवल के दूसरे दिन: गुलाम नबी आजाद ने गांधी जी के विचारों से प्रेरित युवाओं को रचनात्मक कार्यों के लिए किया प्रोत्साहित

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at October 3, 2025 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2025: महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर शुरू हुए सात दिवसीय ‘ग्लोबल यूथ फेस्टिवल’ के दूसरे दिन मुख्य समारोह ने युवा ऊर्जा और गांधीवादी मूल्यों को एक मंच पर ला खड़ा किया। नैशनल यूथ प्रोजेक्ट, गांधी ग्लोबल फैमिली (जीजीएफ) तथा संत निरंकारी मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का दूसरा दिन खास तौर पर प्रेरणादायी रहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और गांधी ग्लोबल फैमिली के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी के जीवन दर्शन, युवाओं की भूमिका तथा रचनात्मक कार्यों के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। वहीं, संत निरंकारी मिशन के सचिव जोगिंदर सूखिजा ने अपने मिशन की गतिविधियों और जीजीएफ के साथ इसके गहन संबंधों को उजागर किया।

यह सात दिवसीय महोत्सव, जो 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चल रहा है, पूरे विश्व भर से आए युवाओं को एकजुट करने का माध्यम बन चुका है। पहला दिन गांधीजी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों पर केंद्रित रहा, तो दूसरे दिन का फोकस युवाओं को रचनात्मकता और सामाजिक परिवर्तन के माध्यम से सशक्त बनाने पर रहा। समारोह में सैकड़ों युवा प्रतिभागी, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्वान और धार्मिक नेता एकत्र हुए, जहां संगीत, नृत्य, कविता पाठ और विचार-विमर्श सत्रों के माध्यम से गांधीजी के विचारों को जीवंत किया गया।

गुलाम नबी आजाद का प्रेरक संबोधन: गांधीजी के विचारों से युवा शक्ति का निर्माण

कार्यक्रम के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन न केवल स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के लिए एक अनंत प्रेरणा स्रोत भी है। उन्होंने जोर देकर कहा, “गांधीजी ने साबित किया कि अहिंसा और सत्य सबसे बड़ी शक्तियां हैं। आज के युवा, जो डिजिटल युग की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, को इन मूल्यों को अपनाकर रचनात्मक कार्यों में जुटना चाहिए। स्वच्छता अभियान से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, हर क्षेत्र में युवाओं की ऊर्जा ही परिवर्तन ला सकती है।”

आजाद ने गांधी ग्लोबल फैमिली की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संगठन गांधीजी के वैश्विक विचारों को फैलाने के लिए कार्यरत है। “हमारा संगठन न केवल भारत में, बल्कि विश्व के कोने-कोने में युवाओं को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। रचनात्मक कार्यों के माध्यम से हम सामाजिक सद्भाव, महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना जैसे मुद्दों पर काम कर रहे हैं। यह फेस्टिवल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,” उन्होंने कहा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे गांधीजी के ‘ट्रस्टीशिप’ के सिद्धांत को अपनाएं, जहां धन और संसाधनों का उपयोग समाज के हित में हो। उनके संबोधन के दौरान सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही, और कई युवा प्रतिभागियों ने उनके विचारों पर सवाल-जवाब सत्र में भाग लिया।

आजाद ने महात्मा गांधी और युवाओं के बीच के संबंध को एक विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि गांधीजी ने हमेशा युवाओं को ‘नई पीढ़ी’ के रूप में देखा, जो पुरानी व्यवस्था को तोड़कर नई दुनिया का निर्माण कर सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे गांधीजी के नेतृत्व में युवाओं ने असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह में अपनी भूमिका निभाई। “आज भी, जलवायु परिवर्तन, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं का समाधान युवाओं के रचनात्मक दृष्टिकोण से ही संभव है,” उन्होंने जोर दिया।

संत निरंकारी मिशन का योगदान: आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा का संगम

समारोह के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में संत निरंकारी मिशन के सचिव जोगिंदर सुखिजा ने अपने मिशन की गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संत निरंकारी मिशन, जो 1929 से सक्रिय है, मानवता, शांति और आध्यात्मिक जागरण पर आधारित है। “हमारा मिशन न केवल धार्मिक सत्संगों के माध्यम से लोगों को जोड़ता है, बल्कि सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाता है। रक्तदान शिविरों से लेकर आपदा राहत तक, हम हर क्षेत्र में सेवा का भाव रखते हैं,”
उन्होंने गांधी ग्लोबल फैमिली और संत निरंकारी मिशन के बीच के संबंधों को विशेष रूप से उजागर किया। उन्होंने इसे पूज्य बाबा हरदेव सिंह जी महाराज और सतगुरु माता जी का आशीर्वाद बताया। “ये संबंध आध्यात्मिकता और गांधीवादी मूल्यों के संगम का प्रतीक हैं। बाबा जी ने हमेशा कहा कि सच्ची सेवा ही धर्म है, और गांधीजी का अहिंसा का संदेश इसी का विस्तार है। इस फेस्टिवल के माध्यम से हम युवाओं को इन मूल्यों से जोड़ना चाहते हैं,” उन्होंने भावुक स्वर में कहा। सुखीजा ने मिशन की वैश्विक पहुंच का जिक्र करते हुए बताया कि यह 50 से अधिक देशों में सक्रिय है और लाखों अनुयायियों के माध्यम से शांति का संदेश फैला रहा है।

फेस्टिवल का व्यापक स्वरूप: युवा सशक्तिकरण का वैश्विक मंच

नैशनल यूथ प्रोजेक्ट के बैनर तले आयोजित इस फेस्टिवल में विश्व भर से 500 से अधिक युवा प्रतिभागी शामिल हैं। दूसरे दिन के कार्यक्रम में रचनात्मक कार्यशालाओं के अलावा, गांधीजी पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें उनके पत्र, चित्र और वीडियो दस्तावेज प्रदर्शित किए गए। युवाओं ने ग्रुप डिस्कशन में पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल नैतिकता और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।

महोत्सव के आयोजकों ने बताया कि अगले दिनों में अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के व्याख्यान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरस्कार वितरण जैसे आयोजन होंगे। 7 अक्टूबर को समापन समारोह में एक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा, जिसमें युवाओं के लिए रचनात्मक कार्यों की दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

यह फेस्टिवल न केवल युवाओं को प्रेरित कर रहा है, बल्कि गांधीजी के 150वें जयंती वर्ष के संदर्भ में उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। आयोजकों की मानें तो, यह महोत्सव सामाजिक परिवर्तन की नई लहर छेड़ने का वादा करता है।

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