Monday, May 18, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को किया गया जागरूक

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 8, 2025 Tags: , , , ,

पोस्टर मेकिंग और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन 

जैव विविधता के साथ छेड़छाड़ और बेलगाम दोहन ने पैदा किया वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर संकट: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT , 08 अक्टूबर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में 2 से 8 अक्टूबर तक मनाये जा रहे राष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के माध्यम से छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया ताकि वे पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवो की सुरक्षा को लेकर संजीदा हो और इनकी रक्षा को सुनिश्चित करे । इस अवसर पर पोस्टर और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जिसके विजेताओं को नकद पुरस्कार और सर्टिफिकेट्स से सम्मानित किया गया । विविध कार्यक्रमों का उदघाटन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । उनके साथ प्राणी शास्त्र विभाग से डॉ प्रियंका चांदना, डॉ राहुल जैन और वनस्पति शास्त्र विभाग से डॉ रवि कुमार ने कार्यक्रमों में हिस्सा लिया । कार्यक्रमों में बीएससी मेडिकल के साथ-साथ कॉलेज के लगभग 250 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया । विदित रहे कि वनों का संरक्षण अब हर सरकार की पहली प्राथमिकता है । बेहतर ताल-मेल से हम कई लुप्त हो रहे पेड़-पौधों, सुक्ष्म जीवो, जंगली जानवरों और पक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित कर सकते है । इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 2 से 8 अक्टूबर के दौरान वन्य जीव संरक्षण सप्ताह का आयोजिन किया जाता है ताकि देश के आमजन भी अपनी जिम्मेदारी को समझे और वन्य प्राणियों को बचाने और संजोने के कार्य में तत्पर बने । इस बार के राष्ट्रीय वन्य जीव संरक्षण सप्ताह का थीम ‘मानव–वन्य जीव सह-अस्तित्व’ है । कार्यक्रमों में आकर्षण का केंद्र विद्यार्थियों द्वारा पक्षी आवास स्थापना करना रहा जिससे पक्षियों को रहने को सुरक्षित आवास मिल सके । वन्य जीव संरक्षण सप्ताह कॉलेज में स्थापित पर्यावरण बचाओ सोसाइटी के तत्वाधान में मनाया जा रहा है । 

डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने कहा कि भारत की वनस्पतियों और जीवों की रक्षा और संरक्षण के उद्देश्य से 2 से 8 अक्टूबर के दौरान प्रति वर्ष राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह मनाया जाता है । इस वर्ष यह देश का 71वां वन्य जीव सप्ताह हैं । उन्होनें कहा कि भारतीय वन्य जीव बोर्ड का गठन भारत के वन्य जीवों की रक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1952 में किया गया था । अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करने में डूबे इंसान को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि वह अपने साथ-साथ लाखों अन्य जीवों के लिए इस धरती पर रहना कितना दूभर बनाता जा रहा है । हमने अपनी सुख-सुविधाओं और तथा कथित विकास के नाम पर धरती पर मौजूद संसाधनों का प्रबंधन और दोहन इस तरह से किया है कि दूसरे जीवधारियों के जीवन के आधार ही समाप्त हो गए हैं । विकास का सबसे बुरा शिकार वन हुए हैं । कितने ही पशु-पक्षियों की प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और कितनी ही विलुप्ति के कगार पर खड़ी हैं । वन्य जीवों के संरक्षण के लिए हम हजारों कार्यशालाएं, सेमिनार और सम्मेलन आयोजित करते आ रहे हैं लेकिन इससे वन्य जीवों की विलुप्ति दर में कमी नहीं आ रही है । वन्य जीव सप्ताह सिर्फ नारे लगाने से नहीं सफल होगा बल्कि इसको सफल बनाने के लिए हमें वन्य जीवों को स्वयं के अस्तित्व से जोड़कर देखना होगा । अब समय आ गया है कि हम सभी इंसान अपनी जिम्मेदारियां समझें । हमें सिर्फ विचार-विमर्श या सम्मेलन से नहीं बल्कि  धरती और वन्य जीवों को बचाने के संकल्प के साथ इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ।

डॉ राहुल जैन ने कहा कि जब से इंसान ने अपनी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जैव विविधता के साथ छेड़छाड़ और बे-लगाम दोहन शुरू किया है तभी से वन्य प्राणियों के अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो गया है । हम अपनी लालची प्रवृत्ति और विकास के नाम पर पृथ्वी को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं । पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन और वन्य जीव सभी इंसान की करतूतों से परेशान है । हमारी लालच भरी करतूतों का ही यह परिणाम है कि पृथ्वी पर उपस्थित तमाम वन्य प्राणियों के विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है । कई प्रजातियों का धरती से नामो निशान ही मिट चुका है और एक बार विलुप्त हो जाने के बाद किसी प्रजाति को वापस लाने का कोई भी तरीका नहीं है । ऐसे में इंसान को अपनी समझदारी का परिचय देना ही होगा ।

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