Tuesday, June 2, 2026
Newspaper and Magzine


जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा ने अन्य दो सदस्यों की सहमति से आकाश इंस्टीट्यूट की घटना पर सुनाया अहम फैसला

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at April 6, 2026 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT , 6 अप्रैल। पानीपत की ज्वुनाईल कोर्ट ने नाबालिग के सुधार के लिए एक सराहनीय फैसला देते हुए, उसकी जिंदगी को सकारात्मक बनाने पर एक महत्वपूर्ण संवेदनशील निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने दण्डात्मक दृष्टिकोण के बजाय सुधारात्मक और पुर्नवास आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए नाबालिग को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए उसे सिविल अस्पताल में 6 माह तक सामाजिक कार्य करने के लिए कहा है।
मामला विगत 2023 में आकाश इंस्टीच्यूट में हुए एक नाबालिग के मर्डर को लेकर था। इस मामले में जब दो नाबालिग बच्चों के बीच आपस में लड़ाई हुई तो एक बच्चे ने दूसरे बच्चे पर चाकू से हमला किया और वो नाबालिग वहीं पर 10 मिनट तक सीढिय़ों में बैठा रहा और 10 मिनट के बाद उसे स्थानीय प्रेम अस्पताल में मेडिकल सुविधा के लिए जब ले जाया गया तो उसने वहां पर दम तोड़ दिया। इसके बाद जब केस की जांच पड़ताल हुई तो उस इंस्टीच्यूट की सीसीटीवी फुटेज इत्यादि निकलवाई गई। उसमें यह सारा वाक्या सामने आया।
चुकिं मामला नाबालिगों से जुड़ा था इसलिए यह मामला ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड के समक्ष लाया गया, जहां पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट पुनित लिम्बा और दो सदस्य एडवोकेट आशिमा कौशिक और अशोक कुमार की उपस्थिति में आरोपित नाबालिग बच्चें के केस की सुनवाई शुरू हुई। इस केस में आरोपी नाबालिग 18 महीने और 12 दिन की सजा काट चुका था और 11 महीने 21 दिन से ट्रासल बेस पर बाहर था। उसमें सुधार की गुंजाईश को देखते हुए बोर्ड ने नाबालिग उम्र में हुई गलती को भविष्य की स्थाई ना पहचान ना बनें इसका मौका दिया और इसमें फैसला सुनाते हुए इस आरोपित नाबालिग को स्थानीय सिविल अस्पताल में 6 महीने तक सामाजिक कार्य करने के दिशानिर्देश भी जारी किए।

सुनवाई के बाद बोर्ड ने तय किए नियम

ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड ने इस मामले से सीख लेकर सुनवाई के बाद विभिन्न कोचिंग सैंटरों के लिए भी दिशानिर्देश जारी करते हुए अपने फैसलें में लिखा कि जितने भी इंस्टीच्यूट है वे सभी अपने यहां फस्ट एड की सुविधा रखेंगे, यही नहीं टिचिंग और नॉन टिचिंग स्टाफ को एमरजेंसी रिसपोंस सिस्टम पर तैयार करेंगे जिनमें किसी भी हैल्थ इंस्टीच्यूट के साथ तालमेल कर एम्बुलेंस इत्यादि की सुविधा रखेंगे। इसके साथ-साथ हर एक संस्थान में हर 15 दिन में इंटरनल ऑडिट भी करेगा जिसमें पढऩे वाले विद्यार्थियों का बैग चैक किया जाएगा, जिसमें महिला विद्यार्थी का बैग चैक महिला टीचर ही करेंगी। संस्थान में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार सीसीटीवी कैमरे और फायर उपकरण इत्यादि भी अन्य उपकरण जरूर लगें हो। इसके साथ-साथ बाल कल्याण समिति को भी दिशानिर्देश दिए गए हैं कि कमेटी के सदस्य उक्त सभी चीजों का निरीक्षण कर दो माह में अपनी रिपोर्ट देंगे। पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता अनुसार कमेटी को पुलिस सहायता उपलब्ध करवाएगी। 

घायल नाबालिग को अस्पताल ले जाने वाले विशाल की सराहना की

ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड में कहा कि जिस समय यह वारदात हुई उस समय सीसीटीवी फुटेज में सारा वाक्या कैद हुआ और उसमें यह बात निकलकर आई कि उस समय वहां पर उपस्थित मृतक के सहपाठी विशाल ने साहसी प्रयास दिखाते हुए उसे संकट की घड़ी में और बहादुरी से अपने मित्र की मदद की और घबराहट से परे होकर यह कार्य किया। बोर्ड ने अपने फैसलें में गभीर रूप से घायल मित्र की सहायता करके इसे असाधारण साहस और सूझबूझ का प्रदर्शन बताया कि उसने भयवाह प्रस्थितियों से विचलित न होकर उसकी सहायता की और यही नहीं उसके बाद मृतक के लिए न्याय सुनिश्चित करने हेतु ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड के समक्ष गवाही देने के लिए साहस के साथ आगे आया। उन्होंने इसे समाज के अटूट नैतिक ताने-बाने का प्रमाण दिया है और पीडि़त की सहायता में सहपाठी विशाल की भरपूर प्रशंसा की है।

Comments