Saturday, April 18, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कला और सामाजिक विज्ञान में ‘परंपरा से रूपांतरण तक: बदलती दुनिया में समाज और संस्कृति’ विषय पर एक दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय कांफ्रेंस का सारगर्भित समापन 

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 18, 2026 Tags: , , , ,

उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित रही कांफ्रेंस

प्रो (डॉ) संजीव अग्रवाल डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट एवं प्रोफेसर भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने किया कांफ्रेंस का उदघाटन 

प्रो (डॉ) एसके चहल डीन फैकल्टी ऑफ़ सोशल साइंस एवं प्रोफेसर इतिहास विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी रहे कीनॉट स्पीकर 

विकसित समाज वही जो परंपरा की जमीन पर खड़ा होकर आधुनिकता के आसमान को छुए: प्रो (डॉ) संजीव अग्रवाल

 जातियों में बंटा समाज देश की तरक्की में बाधक: प्रो (डॉ) एसके चहल

आधुनिकता का एक तात्पर्य अपनी जड़ों और विरासत की छानबीन है: प्रो (डॉ) संजय अरोड़ा  

BOL PANIPAT , 18 अप्रैल.  एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय कांफ्रेंस का तत्वपूर्ण समापन हुआ जिसका आगाज मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) संजीव अग्रवाल डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट एवं प्रोफेसर भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने किया । प्रो (डॉ) एसके चहल डीन फैकल्टी ऑफ़ सोशल साइंस एवं प्रोफेसर इतिहास विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने कीनॉट संबोधन में अपने अनुभव और ज्ञान को साझा किया । प्रो (डॉ) दिनेश दधिची पूर्व-प्रोफेसर अंग्रेजी विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और डॉ विकास सभरवाल राजनीती शास्त्र विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने पहले तकनीकी सत्र में बतौर रिसोर्स पर्सन्स अपने विचारों और नई सोच से रिसर्च स्कोलर्स और देश भर से आये प्राध्यापकों को लाभान्वित किया । समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) संजय अरोड़ा रजिस्ट्रार गुरुग्राम यूनिवर्सिटी रहें । रिसोर्स पर्सन के रूप में कैप्टेन (डॉ) सुनैना सिंह पूर्व-सेना अधिकारी एवं शैक्षणिक प्रशिक्षक एवं माइंड कोच टेड-एक्स वक्ता ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया । अति-विशिष्ट मेहमान के तौर पर मशहूर बॉलीवुड अदाकारा रजनी गुप्ता और उद्योगपति कपिल गुप्ता ने कांफ्रेंस में हिस्सा लिया । मेहमानों का स्वागत श्री एसडी एजुकेशन सोसाइटी पानीपत (रजि.) के जनरल सेक्रेटरी नरेश गोयल, कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, उप-प्रधान राजीव गर्ग, महासचिव महेंद्र अग्रवाल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अंग-वस्त्र और पौधा-रोपित गमलें भेंट करके किया । अंतिम सत्र में रिसर्च स्कोलर्स और प्राध्यापको ने अपने लिखे शोध पत्र प्रस्तुत किये । कांफ्रेंस में 270 से अधिक रिसर्च सकोलार्स और प्राध्यापकों ने पंजीकरण करवाया । मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता और डॉ संतोष कुमारी ने किया ।

प्रो (डॉ) संजीव अग्रवाल डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट एवं प्रोफेसर भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने कहा कि विकसित समाज वही है जो परंपरा की जमीन पर खड़ा होकर आधुनिकता के आसमान को छुए । समय के साथ बदलते हुए भी भारतीय परंपरा ने अपनी आध्यात्मिक जड़ें नहीं छोड़ी, यही इसकी निरंतरता का राज़ है । 

प्रो (डॉ) एसके चहल डीन फैकल्टी ऑफ़ सोशल साइंस एवं प्रोफेसर इतिहास विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने कीनॉट संबोधन में ‘परंपरा, रूपांतरण और आधुनिकता’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया । परंपरा समाज की जड़ है जो हमें मूल्यों, रीति-रिवाजों और पहचान से जोड़ती है जबकि आधुनिकता बदलाव की शाखा है जो विज्ञान, तर्क और नई सोच से जीवन को आसान बनाती है । पूरी तरह परंपरा से चिपके रहना जड़ता लाता है, और केवल आधुनिकता के पीछे भागना जड़विहीन कर देता है । दोनों में संतुलन बहुत जरुरी है । भारतीय समाज में संयुक्त परिवार, गुरु-शिष्य भाव और त्योहार परंपरा की ताकत हैं । वहीं तकनीक, महिला शिक्षा, समानता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आधुनिकता की देन हैं । युवा पीढ़ी पर ज़िम्मेदारी है कि वे परंपरा को अंधानुकरण से बचाएँ और आधुनिकता को उपभोक्तावाद न बनने दें ।  

प्रो (डॉ) दिनेश दधिची पूर्व-प्रोफेसर अंग्रेजी विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने कहा कि भारतीय परंपरा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के भाव से पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है जो इसकी सबसे बड़ी बात है । यहाँ गुरु को ईश्वर से ऊपर रखकर ज्ञान और अनुभव का सम्मान किया जाता है । विविधता में एकता इसकी पहचान है क्यूंकि सैकड़ों भाषा, वेशभूषा, फिर भी संस्कृति का एक सूत्र है । त्योहार, योग, आयुर्वेद और शास्त्रीय कलाएँ जीवन को उत्सव और संतुलन से जोड़ती हैं । अतिथि देवो भव और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे मूल्य करुणा और साझापन सिखाते हैं । 

डॉ विकास सभरवाल राजनीती शास्त्र विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने ‘मानव-केंद्रवाद, नवउदारवाद और आधुनिकता: हम किस दिशा में अग्रसर हैं?’ विषय पर बोलते हुए कहा कि मानव-केंद्रवाद ने प्रकृति को ‘संसाधन’ बनाकर विकास की दौड़ दी, पर जलवायु संकट उसी सोच का आईना है । नवउदारवाद ने बाज़ार को आज़ादी दी तो तकनीक और विकल्प बढ़े, मगर इससे असमानता और उपभोक्तावाद भी तेज़ हुआ है । आधुनिकता ने तर्क और विज्ञान से अंधविश्वास तोड़ा, लेकिन रिश्तों और अर्थ की तलाश को भी अकेला छोड़ दिया । तीनों धाराएँ मिलकर हमें सुविधा तो दे रही हैं, पर सामूहिक विवेक और पर्यावरणीय संतुलन पर सवाल खड़े कर रही हैं । क्या हम सिर्फ तेज़ी से बढ़ेंगे, या मानव-केंद्रित से पृथ्वी-केंद्रित सोच की ओर मुड़कर टिकाऊ और करुणामय आधुनिकता गढ़ेंगे, यह फैसला हमें करना है ?

प्रो (डॉ) संजय अरोड़ा रजिस्ट्रार गुरुग्राम यूनिवर्सिटी ने कांफ्रेंस के विषय को बहुत ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण बताया ।

कैप्टेन (डॉ) सुनैना सिंह पूर्व-सेना अधिकारी एवं शैक्षणिक प्रशिक्षक एवं माइंड कोच टेड-एक्स वक्ता ने ‘अकादमिक जगत में भावनात्मक बुद्धिमत्ता: बदलते समाज के लिए अधिगम संस्कृति का रूपांतरण’ विषय पर  बोलते हुए कहा कि बदलते समाज में केवल बौद्धिक योग्यता नहीं, भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी सफलता का आधार बन रही है । भावनात्मक बुद्धिमत्ता का अर्थ अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझना, नियंत्रित करना और सकारात्मक उपयोग करना । अकादमिक जगत में तनाव, प्रतिस्पर्धा और अकेलेपन के बढ़ने से इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है । भावनात्मक बुधिमत्ता वाले छात्र असफलता से जल्दी उबरते हैं और परीक्षा के दबाव को बेहतर संभालते हैं । सहानुभूति और सामाजिक कौशल से कक्षा में टीमवर्क, संवाद और रचनात्मकता बढ़ती है । शिक्षकों के लिए इसका मतलब है हर छात्र की मनोस्थिति समझकर पढ़ाना, न कि सिर्फ सिलेबस पूरा करना ।  रटने-घोटने की जगह चर्चा, प्रोजेक्ट और अनुभव आधारित अधिगम को बढ़ावा देना भी इसका हिस्सा है । तकनीकी युग में मशीनें ज्ञान दे सकती हैं, पर सहानुभूति और नेतृत्व सिर्फ इंसान सिखा सकता है । इसीलिए अकादमिक जगत का रूपांतरण अब ‘टॉपर बनाने’ से ‘संतुलित नागरिक गढ़ने’ की ओर होना चाहिए ।  विदित रहे कि इस एक दिवसीय कांफ्रेंस के संरक्षक एसडी पीजी कॉलेज दिनेश गोयल रहे और उनके साथ उप-प्रधान राजीव गर्ग, जनरल सेक्रेटरी महेंद्र अग्रवाल और कोषाध्यक्ष विशाल गोयल का भी भरपूर सहयोग और सानिध्य रहा । कांफ्रेंस के संयोजक प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा रहे और कोऑर्डिनेटर का दायित्व डॉ इंदु बाला, डॉ संतोष कुमारी और डॉ एसके वर्मा के जिम्मे था । संगठन सचिव की भूमिका डॉ मोनिका खुराना, डॉ सुशीला बेनीवाल, डॉ वीरेंद्र कुमार और डॉ दीपा वर्मा ने अदा की । इनके साथ परामर्श समिति में डॉ पीआर खेरडे, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ संगीता गुप्ता और प्रो अन्नू आहूजा शामिल रहें । स्थानीय संगठन टीम में प्रो मनोज कुमार, प्रो एकता, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रो भारती और प्रो भावना जिंदल की भूमिका थी । एक दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस में समाजशास्त्र, विधि और राजनीति, जन संचार, मनोविज्ञान, शिक्षा, इतिहास, कला और फाइन आर्ट्स, भूगोल. वाणिज्य, प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी, अंग्रेजी भाषा और साहित्य, अर्थशास्त्र और शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों पर गंभीर मंथन और विचार-विमर्श कर नए विचारों और सिद्धांतों को प्रतिपादित किया गया । हरियाणा के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, उत्तरांचल, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, गुजरात आदि राज्यों के महाविधालयों और विश्वविधालयों के शिक्षकों, शोधार्थीयो और विद्यार्थीयों ने इस एक दिवसीय कांफ्रेंस में भाग लिया । कांफ्रेंस ब्लेंडेड मोड में आयोजित की गयी ।

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