देश की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा मे महत्वपूर्ण कदम है पीएम विश्वकर्मा योजना : उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया
आधुनिक बाजारों से जोड़ने से कारीगरों को मिल रही नई पहचान
पारंपरिक हुनर को मिलेगा वैश्विक मंच, सशक्त हो रहे शिल्पकार
ग्रामीण-शहरी कारीगरों के लिए सुनहरा अवसर, विश्वकर्मा योजना
BOL PANIPAT , 19 अप्रैल। उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक सशक्त पहल साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से पारंपरिक हुनर को न केवल नई पहचान मिल रही है, बल्कि कारीगरों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है।
उपायुक्त ने बताया कि यह योजना देश की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को पुनर्जीवित करने और उसे आधुनिक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उपायुक्त ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को संगठित कर उन्हें तकनीकी, वित्तीय और विपणन सहयोग प्रदान करना है, ताकि उनके उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकें। उपायुक्त ने कहा कि वर्षों से पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को अक्सर संसाधनों और अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह योजना उनके लिए नए द्वार खोल रही है।
उपायुक्त ने बताया कि पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी है, जिसे कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से आधार सत्यापन के साथ पूरा किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचे।
उपायुक्त ने बताया कि योजना के तहत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, मोची, नाई सहित अन्य कारीगर शामिल हैं। इन सभी को उनके कार्य के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे अपने कौशल को और अधिक निखार सकें। इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें बाजार की बदलती मांग के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि योजना के अंतर्गत कारीगरों को टूलकिट सहायता भी दी जाती है, जिससे वे अपने काम को बेहतर ढंग से कर सकें। इसके अलावा बिना किसी गारंटी के ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें।
उपायुक्त ने बताया कि यह आर्थिक सहायता कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उपायुक्त डॉ. दहिया ने बताया कि योजना के तहत विपणन सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कारीगरों के उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभिन्न प्रदर्शनियों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
उपायुक्त ने बताया कि यह पहल न केवल वर्तमान पीढ़ी को सशक्त बना रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहतर अवसर सुनिश्चित कर रही है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना कारीगरों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके हुनर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद कर रही है।

Comments