Thursday, September 3, 2026
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शिक्षक राष्ट्र निर्माण की धुरी, उनके संस्कारों से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार: महीपाल ढांडा

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at September 2, 2026 Tags: , , , , , ,

शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देते, वे बच्चों के चरित्र, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करते हैं: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ

सैकड़ो शिक्षकों को किया मंच से सम्मानित

शिक्षकों के समर्पण से मजबूत होगा समाज, नशामुक्त और संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने में निभाएं अग्रणी भूमिका

गुरु का हाथ सिर पर हो तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी रास्ता छोड़ देती है.

BOL PANIPAT , 2 सितंबर। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर थिराना स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान मानसरोवर रिट्रीट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, चरित्र और संस्कारों को आकार देकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। गुरु वह शक्ति है जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाती है। इसलिए शिक्षक के कंधों पर समाज और राष्ट्र की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया के मजबूत देशों की कतार में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प प्रत्येक नागरिक को लेना होगा। इस संकल्प को धरातल पर उतारने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे भावी पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व के सामने केवल आर्थिक प्रगति का विचार नहीं रखा, बल्कि विश्व कल्याण, मानवता, संस्कार और आदर्श जीवन का संदेश भी दिया है। शिक्षकों को विद्यार्थियों में इन्हीं श्रेष्ठ विचारों और मूल्यों का बीजारोपण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक पूरी तरह सक्षम और शिक्षित हैं। उनकी मेहनत से शिक्षा के क्षेत्र में परीक्षा परिणामों में सकारात्मक बदलाव आया है और सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। शिक्षकों के समर्पण और सरकार के प्रयासों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। मंत्री ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, संस्कार, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विद्यार्थियों में पैदा करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़-पौधों में भी जीवन है। हमें प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करते हुए संतुलित उपयोग करना चाहिए तथा अधिक से अधिक पौधारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। शिक्षक बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन व्यक्ति को कठिन से कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति देता है। गुरु का हाथ सिर पर हो तो बड़ी से बड़ी समस्या भी रास्ता छोड़ देती है। उन्होंने अपने निजी कोष से संस्था को 11 लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

इस अवसर पर उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षक दिवस हमें उन शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है, जो विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ उनके चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। राष्ट्र निर्माण की नींव मजबूत करने में शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ सामाजिक मूल्यों, नैतिकता और नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूक करना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। डीसी ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल शिक्षित समाज बनाना नहीं, बल्कि चरित्रवान, संस्कारवान और जिम्मेदार समाज का निर्माण करना होना चाहिए। बच्चों में अच्छे संस्कार डालकर ही मजबूत समाज की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित करें और उन्हें प्रकृति संरक्षण, सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्र सेवा की भावना से जोड़ें। उन्होंने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में संस्था के निदेशक भारत भूषण ने नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने तथा सहनशीलता का भाव विकसित करने का संदेश दिया। सरला बहन ने कहा कि शिक्षक बच्चों को मजबूती प्रदान कर उन्हें जीवन में आगे बढऩे की दिशा दे सकता है। उनके अमूल्य योगदान से बच्चों का भविष्य मजबूत होता है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस मौके पर विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों को उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नीलम कुंडू, बीईओ जयपाल, विजय कुमार सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक मौजूद रहे।

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