हिंदी हमारी पहचान, संस्कृति और गौरव की सशक्त अभिव्यक्ति: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने के साथ कार्यक्षेत्र में बढ़ाएं इसका प्रयोग
समृद्ध साहित्यिक विरासत वाली हिंदी आधुनिक युग में भी पूरी तरह प्रासंगिक
हिंदी के सम्मान और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
BOL PANIPAT , 14 सितंबर। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने हिंदी दिवस के पवन अवसर पर जिलावासियों को शुभकामनाएं देते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उपायुक्त डॉ. हरीश ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा, भावनाओं और राष्ट्रीय पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है।
उपायुक्त ने कहा कि हिंदी ने देश की विविधताओं को जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत आधार प्रदान करती है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि वर्तमान समय में हिंदी की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। हिंदी का प्रयोग जितना अधिक दैनिक जीवन, शिक्षा, प्रशासन, साहित्य, तकनीक और विभिन्न कार्यक्षेत्रों में होगा, उतना ही इसका विस्तार होगा।
उपायुक्त डॉ हरीश ने कहा कि हिंदी को केवल एक दिन तक सीमित न रखते हुए वर्षभर इसके प्रयोग और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना चाहिए। हिंदी भाषा सरल, सहज और व्यापक स्तर पर लोगों से जुडऩे वाली भाषा है। युवाओं को हिंदी भाषा एवं साहित्य से जोडऩा समय की आवश्यकता है। हिंदी के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को हिंदी में पढऩे, लिखने और रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उपायुक्त डॉ हरीश ने कहा कि हिंदी की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने में साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग से भाषा का सम्मान बढ़ेगा और आने वाली पीढिय़ों तक इसकी गौरवशाली परंपरा को मजबूती से पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने हिंदी दिवस के अवसर पर सभी जिलावासियों से हिंदी के सम्मान, संवर्धन और अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया।

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