अमर शहीद लख्मीचंद के 62वें बलिदान दिवस पर सम्मान समारोह आयोजित
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने शहीद लख्मीचंद को किया नमन, बोले—शहीदों के बलिदान का देश सदैव ऋणी रहेगा
BOL PANIPAT, 18 सितंबर 2026। गांजबड़ गांव के राजकीय हाई स्कूल परिसर में महान अमर शहीद लख्मीचंद के 62वें बलिदान दिवस के अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता पूर्व सैनिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष राजवीर शर्मा ने की।
समारोह के मुख्य अतिथि हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा रहे। गाँव में पहुँचने पर सरपंच नरेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान
शहीदों का देश सदैव ऋणी रहेगा : महिपाल ढांडा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि देश उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और बलिदानियों का सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने भारत को आजाद करवाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि आजाद भारत की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के बलिदान को देश कभी भुला नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि अमर शहीद लख्मीचंद ने वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। ऐसे वीर सपूतों का जीवन और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
शहीदों की स्मृति को जीवंत रखना हम सभी का दायित्व
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार, पूर्व सैनिक कल्याण संगठन और ग्राम पंचायत द्वारा अमर शहीद लख्मीचंद की स्मृति में सम्मान समारोह का आयोजन करना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान को याद करना और युवा पीढ़ी को उनके जीवन एवं संघर्ष से परिचित करवाना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व सैनिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष राजवीर शर्मा ने अमर शहीद लख्मीचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
इस अवसर पर गाँव के सरपंच नरेंद्र सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। वहीं राजबीर सिंह ने समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि, अतिथियों, ग्रामीणों एवं आयोजकों का धन्यवाद किया।
समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने अमर शहीद लख्मीचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

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