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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि एवं शहीदी दिवस के उपलक्ष्य पर एक सभा का आयोजन किया गया

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at January 30, 2022 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : 30 जनवरी 2022ः खादी आश्रम, पानीपत के श्री सोमभाई हाल में खादी आश्रम पानीपत एवं पानीपत नागरिक मंच के तत्वाधान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि एवं शहीदी दिवस के उपलक्ष्य पर एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया गया। सभा की अध्यक्षता प्रसिद्ध  समाजसेवी  दीप चन्द्र निर्मोही द्वारा की गई तथा सभा का संचालन शालिनी मैडम ने किया। इस अवसर पर खादी कार्यकर्ताओं द्वारा चरखा कताई की गई तथा उसके पश्चात सभा का प्रारम्भ बापू जी के प्रिय भजन ‘‘वैष्णव जन तो तेने कहिये पीर पराई जाने रे’’ से हुआ।

पानीपत नागरिक मंच एवं खादी आश्रम, पानीपत की अध्यक्षा  निर्मल दत्त ने इस अवसर पर कहा कि शहीदी दिवस पर हम मात्र शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि  अर्पित करने तथा उनके महान् त्याग और बलिदान को स्मरण करने के लिए ही इक्कट्ठे नहीं होते बल्कि यह आकलन करने के लिए भी इक्कट्ठे होते हैं कि उन्होंने जो मार्ग हमें दिखाया था उस पर हम कितना चल सके हैं। उन्होंने जिन आदर्शों और लक्ष्यों के लिए स्वतन्त्रता का संघर्ष किया था उन आदर्शों  और लक्ष्यों की प्राप्ति में हमने कितना योगदान दिया है।

 श्रीमती दत्त ने आगे कहा कि विश्व के इतिहास में बहुत कम ऐसे व्यक्ति हुए जिन्होंने मानवता पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है इनमें से एक है महात्मा गांधी। उनका जीवन बड़ा ही सरल परंतु कठोर नियमों से बंधा हुआ था। उनका जीवन प्रयोगों की एक निरंतर कड़ी था। अधिकांश  धार्मिक एवं आध्यात्मिक ग्रंथों में जिस सत्य की बात की गई है गांधी जी ने उन्हीं सत्यों के साथ स्वयं को रूपान्तरित, परिवर्तित व संशोधित  करने का कार्य किया। ब्रिटिश राज द्वारा भारतीयों पर अत्याचार एवं उनकी दयनीय स्थिति का मुख्य कारण गांधी जी ने भारतीय समाज की नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों में कमी को माना और इससे छुटकारा पाने हेतु आधुनिक सभ्यता की आलोचना, दे की संस्कृति व मूल्यों की उपयोगिता को महत्व देना माना था और ब्रिटिश सत्ता के मुकाबले के लिए नैतिक शक्ति के रूप में अहिसक तरीके से मुकाबला करने की बात कही थी। भेदभाव का मुकाबला करने के लिए गांधी जी के पास सत्य की शक्ति थी। उनकी पðति अहिंसक थी, दर्शन नैतिक था और अहिंसा उनकी मजबूती  थी। उन्होंने आजीवन सत्य और अहिंसा के अतिरिक्त अन्य विचार व कार्य का समर्थन नहीं किया।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में श्री दीप चन्द्र निर्मोही ने बोलते हुए बताया कि गांधी जी ने सामूहिक अन्याय और व्यक्तिगत अन्याय के विरूध लड़ने का एक चमत्कारिक हथियार ‘सत्याग्रह’ दिया जिसका प्रयोग आज सारी दुनिया में हो रहा है। उन्होंने कहा था कि स्वराज्य का अर्थ केवल इतना ही नहीं कि हमें अंग्रेजों से पूर्ण स्वतन्त्रता मिले बल्कि सच्चा स्वराज तभी स्थापित होगा जब विकेन्द्रिकृत आर्थिक और राजनीतिक आधार पर समाज की स्थापना होगी और सच्चे स्वराज में प्रत्येक व्यक्ति आत्मसंयम और आत्म नियन्त्रण रखेगा और राष्ट्र तथा समाज के उत्थान में योगदान देगा।
मुकेश कुमार शर्मा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि गांधी किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं बल्कि एक विचार सिद्धांत  और जीवन प्रणाली का नाम है। गांधी जी चाहते थे कि हमारे समाज की रचना सत्य और अहिंसा के सिद्धांत   पर हो यदि हम लोग सत्य पर आचरण करने का निर्णय करें तो हमारे से कोई गलती हो ही नहीं सकती।

विद्या भारती माॅडर्न स्कूल की प्रिंसिपल कुमारी आशा ने बोलते हुए कहा कि आज से 100 वर्ष पूर्व जो हिन्द स्वराज में लिखा था वह आज सही प्रमाणित हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि गांधी जी सत्य एवं अहिंसा के पुजारी थे। हमें आज के दिन यह प्रण लेना चाहिए कि हम गांधी जी के बताये हुए मार्ग पर चले।

इस अवसर अन्य वक्ताओं ने भी अपने-2 विचार रखें तथा इस कार्यक्रम में विद्या भारती माॅडर्न स्कूल के स्टाफ, भारतीय खादी ग्रामोद्योग संघ उत्तरी क्षेत्र पानीपत, खादी आश्रम पानीपत के कार्यकर्ताओं तथा चेतना परिवार ट्रस्ट के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं एवं पानीपत के प्रबुद्ध  नागरिकों ने भाग लिया।

सभा के अन्त में श्रीमती निर्मल दत्त ने उपस्थित सभा को संविधान की हिफाजत करने की, समाजिक समानता, आर्थिक बराबरी एवं लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रति प्रतिब्धता की शपथ भी दिलवाई।

30 जनवरी, 2022 का संकल्प

हम पानीपत नगर के निवासी आज 30 जनवरी, 2022 को बापू की शहादत को याद करते हुए उनको साक्षी मानकर यह संकल्प लेते हैं कि हम उनके आदर्शो को पूरा करने की ईमानदार कोशिश करेंगे और लोकतंत्र की, संविधान की हिफाजत करने की हर मुहिम में शामिल रहेंगे। हम जाति-धर्म-संप्रदाय जैसी संकीर्णताओं से खुद भी बचेंगे और अपने समाज को भी बचाएंगे। हम एक ऐसे भारत के निर्माण की कोशिश  करेंगे जो सामाजिक समता और आर्थिक बराबरी को बढ़ाती हो तथा हमारे लोकतंत्र को मजबूत बनाने और विकसित करने का काम करती हो। हम हर प्रकार की हिंसा से अलग रहेंगे और उसका विरोध भी करेंगे। हम इंसान हैं, हम गांधीजन हैं इसलिए गांधी के दिखाए रास्ते पर चलने का भरसक प्रयास करेंगे तथा दूसरों को भी इस रास्ते की तरफ प्रेरित करेंगे। 

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