मुंशी प्रेम चन्द की कहानियों की वर्तमान प्रासंगिकता पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : आई. बी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय पानीपत में क्लास गतिविधि के अंतर्गत बी.ए. द्वितीय वर्ष के छात्र छात्राओं द्वारा मुंशी प्रेम चन्द की कहानियों की वर्तमान प्रासंगिकता पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन डॉ. शर्मिला यादव के मार्गदर्शन में किया गया। जिसमें निर्धारित विषय इस प्रकार से रहे स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, अनमेल विवाह, विधवा विवाह, छुआछूत, दहेज प्रथा, देवदासी प्रथा, कृषक जीवन का दयनीय स्थिति का चित्रण, सामाजिक विषमता, आर्थिक शोषण इत्यादि। कॉलेज प्राचार्य डॉ. अजय कुमार गर्ग ने कहा है कि शिक्षा के साथ साथ मानवीय मूल्यों को भी हमें जीवन में आत्मसात करना चाहिए। मनुष्य को आपस में सभी की सुखात्मक एवं दुखात्मक स्थिति में उसका साथ देकर हमें अपने मानवीय धर्म का निर्वाह करना चाहिए। प्रेमचन्द जी संपूर्ण भारतीय संस्कृति का चित्रण अपनी कहानियों एवं उपन्यासों के माध्यम से करते हैं अतः हमें जीवनोपयोगी साहित्य का अनुसरण कर एक श्रेष्ठ जीवन का निर्माण करना चाहिए।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ शर्मिला यादव ने कहा कि प्रेमचन्द की कहानियाँ संवेदनाओं उसे परिपूर्ण है परंतु आज मानव भौतिकतावादी दृष्टिकोण का अनुसरण इस गति से कर रहा है कि, भावात्मक लगाव को नकार आत्मसुख को अपनाने लगा है। प्रेमचन्द जी की कहानियां त्याग, ममता, करुणा, दया, प्रेम, मेल मिलाप, की विचारधारा से ओत-प्रोत हैं परंतु आज का मानव सुख की परिकलाना में ज्यादा लीन है। इसलिए अकेलेपन अवसाद कुंठा से ग्रसित हो रहा है | प्रेमचंद जैसे कहानीकारों द्वारा ही भारतीय संस्कृति की परंपरा को जीवंत रखा जा सकता है | इस विचार गोष्ठी में तन्नु शर्मा प्रथम एवं नेहा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

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