विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : माता सीता रानी सेवा संस्था द्वारा हरियाणा राज्य समाज कल्याण बोर्ड के सौजन्य से संचालित परिवार परामर्श केंद्र, पानीपत द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सैक्टर 25 स्थित निर्मला देशपांडे संस्थान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें संस्था के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
संस्था की उपाध्यक्ष मधु यादव और सुषमा गुप्ता ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि विश्व पर्यावरण मनाने का उद्देश्य दुनिया में लगातार बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है । प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण पर्यावरण खतरे में है। बढ़ता प्रदूषण सिर्फ मनुष्य के लिए ही नहीं बल्कि हमारी प्रकृति के लिए भी खतरनाक है। प्रकृति हमें जीवन जीने के लिए सभी जरूरी चीज उपलब्ध कराती है। ऐसे में इसका दोहन हमारे जीवन को प्रभावित करता है। स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और ऊर्जा संरक्षण जैसे उपायों को अपनाकर हम पर्यावरण की रक्षा में बहुत बड़ा योगदान कर सकते हैं।
संस्था की महासचिव पूजा सैनी ने कहा कि मानव द्वारा विकास के नाम पर पेड़ काटना , पानी बर्बाद करना और उसे दूषित करना जैसी चीजों के कारण पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है जिससे मानव को प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। पर्यावरण को बचाने के लिए सबसे पहले स्वयं जागरूक होने और अपने में बदलाव लाने की जरूरत है।
शिक्षाविद प्रिया लूथरा ने कहा कि मानव की अच्छी आदतें जैसे पौधे लगाना व उसकी देखभाल करना, जलवायु प्रदूषण रोकना व स्वच्छता रखना इनका पर्यावरण पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। पौधे हमारे आसपास की हवा को शुद्ध रखने में मदद करते हैं। इसलिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने के प्रयास करने चाहिए।
केंद्र की परामर्शदात्री चेतना अरोड़ा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व पर्यावरण दिवस पहली बार 1972 में मनाया था और प्रतिवर्ष इसे एक थीम के साथ मनाया जाता है। इस बार की थीम है- ‘हमारी भूमि ‘नारे के अंतर्गत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा सहनशीलता है। पर्यावरण हमारा पोषण करता है और हमें जीवित रहने में मदद करता है । प्रकृति को बचाने के लिए हम सभी को साथ आना चाहिए और समय रहते एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण के लिए काम करना चाहिए।
संस्था सदस्य सुनीता आनंद ने कहा कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए सख्त कानून लाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, अधिक पेड़ लगाने, जल का दुरुपयोग न करने, नजदीकी कामों के लिए वाहन का प्रयोग न करने जैसे उपाय अपना कर पर्यावरण को बचाने में मदद मिल सकती है।
इस अवसर पर रोजी चावला, सोनिया, सोनी, आरती, श्रुति, हरनंदी, डॉली और कशिश ने भी अपने विचार प्रकट किए।

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