हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, कोई भी विद्यार्थी स्कूल से बाहर नहीं रहेगा : उपायुक्त डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ
समग्र शिक्षा व पीएम पोषण अभियान की समीक्षा, अधिकारियों को स्कूल गोद लेकर शिक्षा सुधार का दिया मंत्र
उपायुक्त ने मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल को किया अडॉप्ट
100 प्रतिशत नामांकन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास पर फोकस, मुख्य सचिव ने दिए दिशा-निर्देश
सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम विद्यार्थी तक पहुंचे, शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर
BOL PANIPAT , 18 जुलाई। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शनिवार को समग्र शिक्षा एवं पीएम पोषण अभियान से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा को लेकर प्रदेश के सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की।
बैठक में माध्यमिक शिक्षा में 100 प्रतिशत सकल नामांकन (GER), स्कूल छोड़ चुके बच्चों का पुनः नामांकन, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) एवं राज्य मुक्त विद्यालयों में प्रवेश, कौशल शिक्षा तथा पीएम पोषण योजना की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि शिक्षा केवल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले का प्रत्येक अधिकारी कम से कम एक विद्यालय को गोद ले और वहां नियमित रूप से जाकर शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं, विद्यार्थियों की समस्याओं तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करे। उन्होंने स्वयं मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल को गोद लेने की जानकारी दी।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल बच्चों का स्कूलों में प्रवेश कराना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर वातावरण और भविष्य के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराना है। जिले का कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी अधिकारी अपने-अपने गोद लिए गए विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करें, वहां की आवश्यकताओं को समझें और उनके समाधान के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाएं। शिक्षा में सुधार सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।”
उन्होंने कहा कि 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 96.66 प्रतिशत विद्यार्थी जिले में कक्षा 9वीं और 10वीं में अध्ययनरत हैं। शेष 3.34 प्रतिशत स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान कर उनका शीघ्र विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा तथा खुले विद्यालयों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का भी प्रभावी उपयोग किया जाएगा।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के स्कूल छोड़ चुके बच्चों को एनआईओएस एवं राज्य मुक्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा स्वयंसेवकों के माध्यम से सर्वे कर ऐसे प्रत्येक बच्चे तक पहुंच बनाई जाए ताकि कोई भी विद्यार्थी पढ़ाई बीच में न छोड़े।
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि पात्र बच्चों को समय पर प्रवेश दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
जिले में कौशल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी व्यापक चर्चा हुई।
विदित रहे कि
जिले के 126 माध्यमिक विद्यालयों में से 60 विद्यालयों में वर्तमान में एनएसक्यूएफ के अंतर्गत 14 विभिन्न ट्रेड संचालित हैं, जिनमें 9,238 विद्यार्थी कौशल आधारित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नए सत्र में 28 और विद्यालयों में नए कौशल पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा ने पीएम पोषण योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले के सभी पात्र विद्यार्थियों को प्रत्येक कार्य दिवस पर निर्धारित मानकों के अनुरूप गर्म एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भोजन परोसने से पूर्व शिक्षकों द्वारा अनिवार्य भोजन परीक्षण, कुक-कम-हेल्परों का प्रशिक्षण तथा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन किया जा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा, पोषण और कौशल विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर पोषण और रोजगारपरक कौशल मिलेगा तो वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर नगराधीश टीनू पोसवाल, जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा, डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी मनीष गुप्ता, नीलम कुंडू सहित शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन के कई अधिकारी उपस्थित रहे।

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