Friday, August 21, 2026
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“सशक्त युवा–सशक्त राष्ट्र” विषय पर जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया।

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 21, 2026 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : आई.बी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पानीपत में कानूनी साक्षरता प्रकोष्ठ के तत्वाधान मे “सशक्त युवा–सशक्त राष्ट्र” विषय पर एक जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, जागरूक, जिम्मेदार एवं सशक्त युवा बनने के लिए प्रेरित करना था। यह व्याख्यान विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, जागरूकता और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतबीर सिंह, उप प्राचार्या डॉ. शशि प्रभा मलिक, आई. आई.सी. कन्वीनर डॉ किरण मदान ,कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. निधि, प्रो. सोनिया,डॉ.राजेश, डॉ जोगेश, प्रो. माधवी तथा आमंत्रित वक्ताओं एडवोकेट सुमन लता,एडवोकेट  कविता, एडवोकेट अमरजीत एवं पीएलवी नीतू रानी द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
अतिथियों का स्वागत उन्हें तुलसी का पौधा भेंट करके किया गया।मंच का संचालन सुश्री वसुंधरा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. सतबीर सिंह ने कहा कि “युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि युवा शिक्षा, अनुशासन, कौशल, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ें, तो वे न केवल अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए करना चाहिए।कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. निधि ने कहा कि “आज के युवा देश की प्रगति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। युवाओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए। शिक्षा, कौशल विकास, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के माध्यम से युवा स्वयं को सशक्त बनाकर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

मुख्य वक्ता एडवोकेट सुमन लता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “सशक्त युवा वही है जो अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो, कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखे और अपने कौशल को निरंतर विकसित करता रहे।” उन्होंने युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने के लिए प्रेरित किया।वक्ता एडवोकेट कविता ने नाबालिग न्याय अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, बालको के अधिकारों, पुनरावास और पुनर्संयोजन की जरूरतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे युवा और पारिवारिक समर्थन की भूमिका युवाओं  के सुधार में महत्वपूर्ण है, और युवाओं को कानूनों की जानकारी होने से वे न्याय तक पहुंचने में सक्षम होंगे।
कार्यक्रम के दौरान लगभग 50 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा अतिथि वक्ताओं से विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर एडवोकेट अमरजीत तथा पीएलवी नीतू रानी   ने भी अपने विचार व्यक्त किये।कार्यक्रम का समापन डॉ. वसुंधरा द्वारा सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया।  इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ जोगेश, खुशबू,डॉ  पूनम गुप्ता, करुणा सचदेवा, रेखा, डॉ वसुंधरा मदान एवं कमल का विशेष योगदान रहा।

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