Wednesday, January 21, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर जागरूकता सेमीनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 28, 2022 Tags: , , , ,

चिकित्सक की सलाह, सटीक दवाइयों और उचित व्यायाम से हिमोफिलिया का इलाज संभव: डॉ शिवांजली कालरा

 BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर जागरूकता सेमीनार का आयोजन किया गया जिसकी मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ शिवांजली कालरा ईएनटी विभाग सिविल हॉस्पिटल पानीपत रही. माननीय मेहमान का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ रवि रघुवंशी, डॉ राहुल जैन, डॉ प्रियंका चांदना, प्रो काजल और प्रो शीतल ने किया. इस अवसर पर डॉशिवांजली कालरा ने विज्ञान संकाय के लगभग 150 छात्र-छात्राओं के साथ जीवंतसंवाद किया और उन्हेंहीमोफीलिया यापैतृक रक्तस्राव के बारे में विस्तार से समझाया. इस बार के विश्व हिमोफिलिया दिवस का थीम ‘एक्सेस फॉर ऑल:पार्टनरशिप’ है.विदित रहे कीलोगों में हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है जिसे देश में 17 से 30 अप्रैल तक हिमोफिलिया पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है.

डॉ शिवांजली कालरा ईएनटी विभाग सिविल हॉस्पिटल पानीपत ने अपने व्याख्यान में कहा कि जब दोषपूर्ण जीन बच्चों के अंदर आ जाता है तो ऐसे बच्चे इस बीमारी केशिकार हो जाते है. यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है. थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को शीघ्र थक्का बनादेने की क्षमता होती है. खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता है. लोगइसकेइलाज के लिए पहले विदेश से आने वाले इंजेक्शन को महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर थे. हीमोफीलिया बीमारी में फैक्टर 8 और 9 की डोज दी जाती है जिसकी निशुल्क व्यवस्था अब सिविल हॉस्पिटल पानीपत में भी उपलब्ध है जिसके लिए मरीज को सिर्फ अपना पंजीकरण करवाना होगा.हीमोफीलिया बच्चों को माता-पिता से विरासत में मिलने वाली बीमारी है. इसमें अगर शरीर से खून बहने लगता है तो फिर वहरुकता नहीं है. इस कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है. हिमोफिलिया के लक्षणों पर बताते हुएउन्होनें कहा की शरीर में नीले-नीले निशानों का बनना, नाक से खून का बहना, आंख के अंदर खून का निकलना, सर्जरी या दंत चिकित्सा के बाद अत्यधिक रक्तस्राव का होना,टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्राव होना,जोड़ों में दर्द,सूजन या अकड़न का पाया जाना, पेशाब या मल में खून बहना, शिशुओं में चिड़चिड़ापनआदि इस बिमारी के होने का इशारा करते है. फिर भी हमेंइस बिमारी से घबराना नहीं चाहिए.इलाज के तौर पर हमें उचित चिकित्सक से सलाह और दवाईयां लेनी चाहिए,मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए व्यायाम करना चाहिए और इस बिमारी से ग्रसित बच्चों को खेलते समय हेलमेट, एल्बो और जूते पहनकर रखना चाहिए. इलाज के दौरान 80से 85प्रतिशत मरीजों को फैक्टर आठ लगाया जाता है जबकि15से 20प्रतिशत मरीजों को फैक्टर नौ लगाया जाता है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आमतौर पर किसी गंभीर चोट के लगने पर ही इस बिमारी का पता चलता है. हिमोफिलियाए के मरीजों की संख्या 10हजार में एक होती है जबकि हिमोफिलाबी का मरीज 40हजार में एक होता है.डॉ रवि रघुवंशी ने कहा कि देश में 12 प्रतिशत लोग हीऐसे हैंजिन्हें इस बीमारी की जानकारी है. बाकी लोगों को इस बिमारी कीजानकारी हीनहीं है. उन्हें ये भी पता नहीं होता की अब इस बिमारी का सरकारी हस्पतालों में नि:शुल्क इलाज संभव है.

 

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