Friday, April 17, 2026
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संविधान को तोड़ना कांग्रेस के डीएनए में शामिल – दुष्यंत भट्ट

By LALIT SHARMA , in Politics , at June 25, 2025 Tags: , , , , ,

-देश पर आपातकाल लागू करने वाली पार्टी के नेता आज संविधान की रक्षा करने की बात किस मुंह से कहते है – कंवर पाल गुर्जर
-संविधान की रक्षा की बात करने वालों की पीढ़ियों ने भी कभी संविधान का सम्मान नहीं किया- कंवर पाल गुर्जर

BOL PANIPAT , 25 जून, संविधान हत्या दिवस के अवसर पर स्थानीय एस.डी पीजी कॉलेज के परिसर में जिला स्तरीय संविधान हत्या दिवस गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट ने की जबकि हरियाणा के पूर्व शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुज्जर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। जबकि सोनीपत के पूर्व जिलाध्यक्ष जसबीर दोदवा, गजेंद्र सलूजा, सरदार भूपेंद्र सिंह, सरदार गुरशरण बबू, हरचरण सिंह धम्मू विशेष वक्ता के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक पूर्व मेयर अवनीत कौर ने सभी का स्वागत किया तथा मेयर कोमल सैनी ने सभी का आभार व्यक्त किया। पानीपत सिख संगत की और से मुख्य अतिथि का कृपाण और सरोफा भेट कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बाबा बंदा सिंह बहादुर को भी सभी वक्ताओं ने बार बार याद किया। मंच संचालन नगर पार्षद तरुण गांधी ने किया।
भाजपा नेता एवं पूर्व शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुज्जर ने कहा कि जो समाज अपने अतीत को याद रखता है तथा अतीत से सीख लेकर भविष्य की योजना बनाता है वहीं समाज सफल हो पाता है उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की अर्धरात्रि को स्वतंत्रता सेनानियों के स्वतंत्र भारत के बलिदानों और लोकतांत्रिक कल्पनाओं को रोंदते हुए तत्कालिन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लागू किया था और देशभक्त स्वाभीमानी नेताओं को जेलों में ठुसने का काम किया गया। जहां पूरे भारत में देशभक्त नागरिकों और जनसंघ के नेताओं को जेलों में डालकर अनेक यातनाएं दी गई। हरियाणा प्रदेश के भी अनेक नेताओं ने आपातकाल की पीड़ाएं झेली हैं जिनमें प्रेमचंद गोयत, रामविलास शर्मा, लाला अमरचंद, भगवानदास बंसल, मदनलाल हरदोई, प्रो. श्याम पसरिजा, जगदम्बा प्रसाद, रमेश चन्द्र के अलावा पानीपत के लाला इंद्र सैन, वजीर चंद, धर्मपाल नमक वाले, डॉ महेंद्र रंजन, फतेह चंद विज, विजय कुमार सलूजा, डॉ वेद प्रकाश,जीवन शर्मा, रमेश नागरू, डॉ मनोहर लाल सुनेजा, रघुबीर सैनी, रहमल दास बापौली, श्याम नारायण शर्मा एवं जगदीश सोनी को भी न केवल जेलों में डाला गया बल्कि कठोर यातनाएं भी दी गईं।
उन्होंने कहा कि भारत को यूं तो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है लेकिन उस समय की कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र की मूलभावनाओं को कुचलते हुए देश में आपातकाल लागू किया और व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए आपातकाल के दौरान अनेक संविधान संशोधन भी किए गए। उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल जैसी कोई स्थिति नहीं थी। बल्कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में इंद्रा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया गया था और 6 वर्षों तक किसी भी पद को ग्रहण करने पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति रामायण, गीता, वेद और गुरु ग्रंथ साहिब पर आधारित है भारतीय संस्कृति में संसार को एक परिवार माना गया है और सबका साथ सबका विकास की भावना से सुशासन स्थापित करने का प्रावधान है लेकिन इस समय की सरकार ने लोकतंत्र के चारों स्तंभ जिसमें प्रेस भी शामिल है पर रोक लगा दी गई।उन्होंने कहा कि आज का यह ‘स्मृति समारोह’ केवल अतीत को याद करने के लिए नहीं है, बल्कि यह हमें भविष्य के लिए तैयार करने का अवसर है। हमें एक ऐसे भविष्य का निर्माण करना है, जहां लोकतंत्र हमेशा फलता-फूलता रहे, स्वतंत्रता की लौ हमेशा जलती रहे और भारत एक मजबूत और जीवंत लोकतंत्र के रूप में विश्व में हमेशा चमकता रहे।
पूर्व जिलाध्यक्ष जसबीर दोदवा ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और सरकार बनाने तक सीमित नहीं है, लोकतंत्र एक जीवनशैली है, एक बहुमूल्य प्रणाली है। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों को 25 जून 1975 को घोषित की गई इमरजेंसी के बारे में पीढ़ियों को अवगत कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद हमें अपने महापुरुषों की जयंतियों को मनाने का अवसर मिला, ताकि हम उनके जीवन को याद कर सकें, जो उन्होंने यातनाएं सही, देश की रक्षा व मानवता की रक्षा के लिए, उन कहानियों से हम भावी पीढ़ी को अवगत करा सकें।
जिलाध्यक्ष दुष्यंत भट्ट ने कहा कि आजाद भारत के बाद जिस गति से देश आगे बढ़ना चाहिए था, उस गति से नहीं बढ़ा। कांग्रेस के 55 साल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 साल के कार्यकाल में विकसित भारत के अंतर को साफ देखा जा सकता है। लेकिन कांग्रेस को यह अंतर नजर नहीं आ रहा, वे केवल संविधान की किताब उठाकर घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ये देश बदला है और गति से आगे बढ़ रहा है। जिन नायकों ने देश को आजाद करवाने के लिए अपनी कुर्बानियां दी, उनके सपनों का भारत बन रहा है। प्रधानमंत्री ने संकल्प लिया है कि जब आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे तो भारत विकसित राष्ट्र बने और इस संकल्प की सिद्धि में देश के हर व्यक्ति के योगदान की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम की मुख्य संयोजक अवनीत कौर कहा कि उस समय की सरकार ने जम्मू – कश्मीर के अंदर जाने के लिए परमिट प्रथा शुरू की। सरकार की क्या सोच थी कि उस हिस्से को देश से अलग करना चाहते थे। परंतु डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने परमिट प्रथा का विरोध किया और कहा कि इस देश में दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे। वे यात्रा लेकर निकल पड़े और बिना परमिट के जम्मू -कश्मीर में चले गए। उन्हें अपनी कुर्बानी देनी पड़ी, तब जाकर परमिट प्रथा समाप्त हुई, लेकिन उसके बाद भी लंबे समय तक इस देश में दो संविधान, दो प्रधान और दो निशान चलते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा – 370 को समाप्त कर एक संविधान, एक प्रधान और एक निशान के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को पूरा किया।
मेयर कोमल सैनी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी संविधान का सम्मान नहीं किया और उनके नेता लोकतंत्र के मंदिर संसद में खड़े होकर बिल को फाड़ कर संविधान का अपमान करते है। संविधान की रक्षा की बात करने वालों की पीढ़ियों ने भी कभी संविधान का सम्मान नहीं किया। कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण ही लोगों को प्रताड़नाओं का दंश झेलना पड़ा और इन गलत नीतियों के कारण ही आज लोगों ने कांग्रेस को साफ कर दिया है। इस अफसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रोशन लाल माहला, सुनील परढाना, सुनील कंसल, राजेश भारद्वाज, प्रदीप देशवाल, समुद्र जागलान, देवांशू वर्मा, महावीर दहिया, ओम दत्त आर्य,ईश कुमार राणा, रविंद्र तुषामड,नेहा शर्मा, बलिंद्र आर्य, कंवलजीत सिंह, सरबजीत सिंह, हरविंद्र सिंह लाड़ी, जोगिंद्र सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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