चेतना परिवार ट्रस्ट द्वारा संचालित निःशुल्क सिलाई सैंटर/ ब्यूटी पार्लर सैंटर एवं कम्प्यूटर सैंटर में प्रशिक्षण प्राप्त बेटियों को प्रमाण पत्र वितरित किये
BOL PANIPAT : 8 मई, 2023, चेतना परिवार ट्रस्ट द्वारा संचालित निःशुल्क सिलाई सैंटर, ब्यूटी पार्लर सैंटर एवं कम्प्यूटर सैंटर में प्रशिक्षण प्राप्त बेटियों को प्रमाण पत्र वितरित करने के कार्यक्रम का आयोजन खादी आश्रम, जी.टी. रोड, पानीपत के प्रांगण में किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय हरिओम तायल, चेयरमैन, पाईट, समालखा, पानीपत द्वारा की गई। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मोनिका सिंह, अपर आयकर आयुक्त, पानीपत एवं विशिष्ठ अतिथि हरिनारायण सिंगला, रिटायर्ड चीफ इन्जिनियर तथा विभास कायला, प्रधान, रोटरी पानीपत सेंट्रल, पानीपत रहे।
सर्वप्रथम कार्यक्रम के अध्यक्ष हरिओम तायल का दीपचन्द निर्मोही व निर्मल दत्त एवं मुख्य अतिथि मोनिका सिंह का निर्मल दत्त तथा विशिष्ठ अतिथि हरिनारायण सिंगला का ए.के. गुप्ता, विभास कायला का डी.एन. ठाकुर द्वारा पुष्प गुच्छों से स्वागत किया गया।
चेतना परिवार ट्रस्ट की प्रबंध-न्यासी निर्मल दत्त के द्वारा कार्यक्रम के अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथियों का स्वागत किया गया तथा अपने स्वागत व्यक्तव्य में कहा कि चेतना परिवार एक ऐसा ट्रस्ट है जो वंचित, अति-पिछड़े, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चां, बेटियों, महिलाओं की शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं सर्वांगीण विकास के लिए प्रयत्नशील रहता है। समाज के एक समान विचारों एवं समर्पित दृष्टिकोण वाले सहयोगियों की निरंतर एवं स्वेच्छा से दिए गए सहयोग से हम यह सब कर पाते हैं। सरकार से किसी प्रकार की ग्रांट या मदद नहीं ली जाती है। उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि महिलायें शक्ति स्वरूपा हैं और गृहस्थ जीवन की धुरी हैं। वे अपने परिवार में बेटों और बेटियों को बराबर का अधिकार दें बेटियों को अवश्य पढ़ायें ताकि वे आत्म निर्भर बन सकें। शिक्षा हमें जिंदगी जीने का सलीखा सिखाती है। पढ़ी लिखी बेटियां समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकती हैं तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भरता के साथ-2 अपने परिवार को भी आर्थिक सहयोग प्रदान कर सकती हैं। समाज की प्रगति में पूरा योगदान दे सकती हैं। बेटियों में किसी भी स्तर पर कार्यक्षमता बेटों से कम नहीं होती।
निर्मल दत्त द्वारा चेतना परिवार ट्रस्ट की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि ट्रस्ट की स्थापना के पीछे कमला आर्य की सामाजिक सोच एवं प्रेरणा है। दीपचन्द्र निर्मोही जी इस ट्रस्ट के प्राण कहे जाते हैं। सन् 2003 में प्रथम चेतना स्कूल की स्थापना से निरंतर अपनी साईकल पर ट्रस्ट के सुचारू रूप से प्रबंधन में लगे रहते हैं, सभी को जोड़कर रखते है। स्वयंसेविकाओं का भी इस कार्य में भरपूर सहयोग रहता है। उन्होंने आगे बताया कि ट्रस्ट द्वारा इस समय 27 प्रशिक्षण केन्द्र चलाए जा रहे हैं (बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल 59, सिलाई केन्द्र 21, ब्युटी पार्लर 5, कम्प्यूटर केन्द्र 1, महिलाओं के लिए प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र 6), इन प्रशिक्षण केन्द्र में बेटियों को सिलाई, कढ़ाई कार्य के साथ-2 ब्यूटी पार्लर एवं कम्प्यूटर का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अवसर पर प्रशिक्षित बेटियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
चेेतना परिवार के ट्रस्ट वरिष्ठ न्यासी दीपचन्द्र निर्मोही ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि हर एक बच्चे का यह अधिकार है कि उसे शिक्षा मिले। अगर उनके माता-पिता की स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा दिला सके तो ऐसे परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में मदद करना हम सबका पुनीत कर्तव्य है। गरीब परिवार की बेटियों को शिक्षित कर उनको आत्मनिर्भर एवं चरित्रवान बनाना सही मायने में देश सेवा है।
विशिष्ठ अतिथि हरिनारायण सिंगला ने चेतना परिवार ट्रस्ट द्वारा बेटियों का जीवन संवारने के लिए एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो कार्य किया जा रहा है, इसके लिए उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी गई तथा कुछ बेटियों को उन्होंने उपहार देकर प्रोत्साहित भी किया।
विशिष्ठ अतिथि विभास कायला ने चेतना परिवार ट्रस्ट द्वारा बेटियों का जीवन संवारने के लिए एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशंसा की और अपना सहयोग चेतना ट्रस्ट को देने का आश्वासन किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मोनिका सिंह इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि शिक्षा एक सुदृढ़ चरित्र का निर्माण करती है। शिक्षा का यदि सही ज्ञान हो तो समाज में व्याप्क समस्यायें जैसे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी आदि दूर हो सकती है। उन्होंने चेतना परिवार ट्रस्ट द्वारा किये जा रहे कार्यों की भूरि-2 प्रशंसा की। विशेषतया बेटियों को शिक्षित करना, उन्हें समान समझना, उनमें आत्मविश्वास पैदा करना बहुत आवश्यक है, वे राष्ट्र निर्मात्री हैं। वोकेशनल ट्रेनिंग से ट्रस्ट उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने भविष्य में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया तथा उनके द्वारा एक चेतना केन्द्र को गोद लेने की घोषणा की गई।
अपने अध्यक्षीय उदबोधन में हरिओम तायल ने बताया कि मानव जीवन में कुछ ऐसी आवश्यकतायें हैं कि जिनके बिना वह जीवित नहीं रह सकता है। उन्हीं आवश्यकताओं में एक है ‘‘शिक्षा’’। शिक्षा हर राष्ट्र के लिए विकास और सशक्तिकरण का आधार हैं। शिक्षा आज की दुनियां की दैनिक गतिविधियों को समझने और भाग लेने मे एक महत्वपूर्ण जरिया है। बेटियों के सम्मान के बिना कोई भी समाज या संस्कृति आगे नहीं बढ़ सकती। देश में अब लड़कियां अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं और वे शिक्षा, खेल, राजनीति आदि जैसे हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के माध्यम से ही सम्भव हो सकता है। उनके द्वारा भी एक चेतना केन्द्र को गोद लेने की घोषणा की गई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा कुल 169 बेटियों को, जिसमें 111 सिलाई एवं 58 ब्यूटी पार्लर के प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा सभी केन्द्रों से प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली बेटियों एवं उनकी अध्यापिकाओं को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया।
निर्मल दत्त द्वारा कार्यक्रम के अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ठ अतिथियों का कार्यक्रम के लिए समय देने के लिए उनका आभार एवं धन्यवाद प्रकट किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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