एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में भारतीय रेड क्रॉस समिति हरियाणा राज्य शाखा चंडीगढ़ द्वारा कॉलेज के वाईआरसी कार्यकर्ताओं को दिया गया सीपीआर का प्रशिक्षण.
–युवा अपने सामाजिक कार्यों और दायित्वों में सीपीर प्रकल्प भी शामिल करे: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 06 सितम्बर.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में भारतीय रेड क्रॉस समिति हरियाणा राज्य शाखा चंडीगढ़ द्वारा कॉलेज के वाईआरसी कार्यकर्ताओं को कार्डियो पल्मनरी रिसेसिटेशन (सीपीआर) का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर जागरूक किया गया. हरियाणा राज्य रैड क्रॉस मुख्यालय चंडीगढ़ के द्वारा सीपीआर मोबाइल वैन एक अनोखी मुहिम चलाई गई है जो महामहिम राज्यपाल हरियाणा बंडारू दत्तात्रेय के संदेश को हरियाणा प्रदेश के सभी जिलों में पहुंचाएगी. श्रीमती सुषमा गुप्ता वाइस चेयरमैन और डॉक्टर मुकेश अग्रवाल महासचिव तथा उपायुक्त एवं प्रधान जिला रैड क्रॉस सोसायटी वीरेंद्र कुमार दहिया के मार्गदर्शन में सीपीआर मोबाइल वैन आज एसडी पीजी कॉलेज के प्रांगण में पहुंची जहाँ वाईआरसी के कार्यकर्ताओं और कॉलेज के विद्यार्थियों को सीपीआर का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया, रेड क्रॉस सोसाइटी एवं सेंट जॉन एंबुलेंस पानीपत की तरफ से सीपीआर के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए नोडल अधिकारी हरमेश चांद की अगुआई में मास्टर ट्रेनर श्रीमती रोहिणी भोखर, श्रीमती सोनिया शर्मा, तकनीकी समन्वयक मोहित कुमार, वॉलंटर प्रदीप तथा राज्य शाखा से आए हुए प्रतिनिधि सूरज कुमार एवं जगजीत सिंह द्वारा सेवाएं दी गई. माननीय मेहमानों और प्रशिक्षकों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, वाईआरसी नोडल अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, प्रो संजय कुमार, प्रो इंदु पुनिया एवं अन्य प्राध्यापकों ने किया. विदित रहे कि यह यात्रा 9 सितम्बर को विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर जिला करनाल में संपन्न होगी. यहाँ यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि परिवार के सभी सदस्यों को सीपीआर तकनीकी जरुर सीखनी चाहिए ताकि हार्ट अटैक, पानी में डूबने, जहर लेने, बिजली का करंट लगने, सड़क दुर्घटना आदि की स्थिति में सीपीआर को देकर हम किसी की भी जिंदगी को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते है.

रोहिणी भोखर प्रशिक्षिका जिला रेड क्रॉस पानीपत ने बताया कि सीपीआर को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन कहते हैं. अगर किसी कारण कोई व्यक्ति बेहोश हो गया है और उसकी दिल की धड़कन बंद हो गई हो या पल्स नहीं चल रहा हो तो ऐसी स्थिति में सीपीआर दी जाती है. इसकी मदद से मरीज को सांस लेने में सहायता मिलती है. असल में सीपीआर देने के दौरान हृदय और मस्तिष्क में खून का प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलती है. सीपीआर की मदद से व्यक्ति को एक नया जीवन मिल पाता है. सीपीआर उम्र के अनुसार अलग-अलग तरीकों से दिया जाता है. बच्चों और बड़ों में सीपीआर देने का तरीका अलग होता है. सीपीआर देने के लिए मरीज को सबसे पहले सीधा लिटाना चाहिए और उसके शरीर का कोई अंग मुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए. हमें अपने हाथों की हथेलियों को एक दूसरे के ऊपर रखते हुए सीने को दबाना चाहिए. छाती पर दबाव डालने के दौरान इस बात का ख़ास ध्यान रखना चाहिए कि दबाव दो या ढ़ाई इंच से ज्यादा का न हो. हाथों के अलावा हम मुंह से भी सीपीआर दे सकते हैं. सीपीआर देने के दौरान सीपीआर देने वाले व्यक्ति को अपनी कोहनी और दोनों हाथों को सीधा रखना चाहिए. भारत में तकरीबन 20 प्रतिशत लोगों की मौत का कारण कॉरोनरी हार्ट डिजीज है इसीलिए हमें सीपीआर की विधि को अवश्य सीखना चाहिए.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वाईआरसी कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे रेडक्रॉस के जुड़कर सीपीआर, प्राथमिक उपचार एवं आपदा से निपटने का प्रशिक्षण समय रहते ले ताकि जरुरत पड़ने पर वे आम जनमानस की मदद कर सकें. कोई भी समाज या देश अकेले सरकार के प्रयासों से अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकता है और ऐसे में सामाजिक संस्थाओं को समाज व देश हित में पूरी लगन से काम करने की जरूरत है. यह सीपीआर यात्रा सामाजिक सेवा के प्रति समर्पण के लिए नई पीढ़ी के युवाओं को प्रेरित करेगी.

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