डीडीए ने किया कई गांवों का दौरा. किसानों को पराली ना जलाने के प्रति किया जागरूक.
पूसा-डिकंपोजर दवाई से भी कर सकते हैं पराली प्रबंधन: डॉ वजीर
BOL PANIPAT , 27 अक्तूबर। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को पराली न जलाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत वीरवार को स्वयं उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बापौली खंड के कई गांवों में खेतों में जाकर किसानों से मिलकर उन्हें पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया। गांव छाजपुर के प्रगतिशील किसान राजेन्द्र रावल के फार्म पर डॉ. वजीर सिंह ने किसानों से धान कटाई उपरांत उसके प्रबंधन के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने बताया कि जो किसान अपनी पराली बेच नहीं पाते हैं और मशीनों से भी उसका प्रबंधन नहीं कर पाते हैं तो वे पूसा-डिकंपोजर नामक दवाई का छिडक़ाव पराली पर कर सकते हैं। यह दवाई लगभग 20 दिन में खेत में ही पराली को गलाकर उसे खाद में परिवर्तित कर देगी। इसलिए किसान इस दवाई का उपयोग भी पराली प्रबंधन में कर सकते हैं।
प्रगतिशील किसान राजेन्द्र रावल ने बताया कि इस क्षेत्र के किसान काफी जागरूक हो चुके हैं और पराली को या तो पशु चारे के लिए बेच देते हैं या उसे मशीन के जरिये खेत में ही नष्ट कर देते हैं। यहां के किसानों की पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता पर उप कृषि निदेशक व अन्य अधिकारियों ने उनकी प्रशंसा की। साथ ही उनसे अपील की कि वे अन्य किसानों को भी पराली का प्रबंधन करने के लिए जागरूक करें। इस दौरान उन्होंने वर्मी कंपोस्ट का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर उनके साथ सहायक कृषि अभियंता सुधीर कुमार, बापौली खंड कृषि अधिकारी डॉ. सतीश व कृषि विकास अधिकारी नरेंद्र दहिया आदि मौजूद रहे।

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