महात्मा गांधी के ऐतिहासिक आगमन की 78वीं वर्षगांठ पर गांधी प्रतिमा स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम
BOL PANIPAT, 2 दिसम्बर 2025, किला ग्राउंड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर आज गांधीजी के पानीपत आगमन की 78वीं वर्षगांठ बड़े आदर और श्रद्धा के साथ मनाई गई। पानीपत नागरिक मंच एवं गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों नागरिकों ने भाग लिया और राष्ट्रपिता को पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता खादी आश्रम की प्रधान निर्मल दत्त और गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव राम मोहन राय ने उपस्थित लोगों को 2 दिसम्बर 1947 के उस ऐतिहासिक दिन की याद दिलाई, जब देश विभाजन के बाद उपजे साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा के सबसे काले दौर में महात्मा गांधी पानीपत पहुंचे थे।
राम मोहन राय ने कहा, “1947 में जब पूरा उत्तर भारत खून से लाल हो रहा था, लाखों लोग बेघर हो चुके थे और हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत चरम पर थी, उस विकट समय में भी बापू की व्यस्तता इतनी थी कि वे दिल्ली से बाहर कम ही निकल पाते थे। फिर भी राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भावना की रक्षा के लिए वे 2 दिसम्बर 1947 को विशेष रूप से पानीपत आए। यह उनकी अंतिम हरियाणा यात्रा थी।”
निर्मल दत्त ने बताया कि उस दिन गांधीजी ने किला ग्राउंड में ही विशाल जनसभा को संबोधित किया था। उन्होंने लोगों से शांति, भाईचारा और अहिंसा का संदेश दिया। उस समय पानीपत में भी शरणार्थियों का बड़ा जमावड़ा था और तनाव का माहौल था। बापू ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों से अपील की थी कि वे एक-दूसरे के घाव भरें, न कि बढ़ाएं। उनकी उपस्थिति मात्र से शहर में शांति का संचार हुआ था।
वक्ताओं ने याद दिलाया कि गांधीजी ने पानीपत में कहा था – “मैं चाहता हूं कि हिन्दू और मुस्लिम एक-दूसरे के दिल में बसें, न कि एक-दूसरे से डरें।” उन्होंने खादी और स्वदेशी को भी बढ़ावा देते हुए कहा था कि आर्थिक स्वावलंबन ही सच्ची आजादी की गारंटी है।
कार्यक्रम में गांधीजी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” और “रघुपति राघव राजा राम” गाए गए। बच्चों ने गांधीजी के विचारों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। अंत में सभी ने दो मिनट का मौन रखकर उन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जो विभाजन की हिंसा में मारे गए थे तथा गांधीजी के अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
पानीपत नागरिक मंच के संयोजक ने बताया कि हर साल 2 दिसम्बर को यह कार्यक्रम इसलिए आयोजित किया जाता है ताकि नई पीढ़ी को यह याद रहे कि सबसे कठिन समय में भी गांधीजी ने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए पानीपत को चुना था। यह शहर गांधीजी के अंतिम दिनों की यात्रा का साक्षी है और आज भी उनके संदेश को जीवंत रखने का दायित्व हम सबका है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। उपस्थित लोगों में शहर के गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं, खादी प्रेमी और दोनों समुदायों के लोग बड़ी संख्या में शामिल थे। यह आयोजन एक बार फिर सिद्ध करता है कि गांधीजी का संदेश आज भी प्रासंगिक है और पानीपत का किला ग्राउंड उस संदेश का जीवंत स्मारक बना हुआ है। इस अवसर पर एडवोकेट संजय कुमार, स्पर्श वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बंसल, माता सीता रानी सेवा संस्था की अध्यक्ष कृष्णा कांता ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये.

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