Tuesday, April 28, 2026
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तेंदुआ रिहायशी इलाकों में क्यों आ रहे हैं?

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at June 16, 2024 Tags: , , ,

BOL PANIPAT : पानीपत में यमुना से सटे भैंसवाल गांव के पास रविवार दोपहर को आदमखोर तेंदुआ पकड़ लिया गया। लोगों ने इसे सुबह खेतों में देखा था।

इसके बाद वह ड्रेन नंबर 2 में छिप गया। लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग की टीम को दी। रोहतक से पहुंची टीम ने 45 मिनट उसे रेस्क्यू कर लिया। टीम तेंदुए को लेकर  रोहतक रवाना हो गयी है। बताया जा रहा है कि इस  तेंदुए ने पिछले सप्ताह 9 जून को हरियाणा के गांव नवादा के सामने  यूपी के गांव मंडावर में ननिहाल में रह रही चार वर्षीय अंशा उर्फ इंशा को रात में तेंदुए ने नोच लिया था। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

इसके बाद से खादर क्षेत्र के गांव मंडावर के अलावा बसेड़ा, पठेड़, खुरगान, अकबरपुर सुन्हेटी व दभेड़ी खुर्द व हरियाणा के  गांव नवादा-आर, नवादा-पार, पत्थरगढ़, तामशाबाद, रामडा-आर, सनौली आदि गांवों में तेंदुए के खौफ  के चलते लोगों ने खेतों में जाना छोड़ दिया था । लोग बच्चों को भी अकेले घरों से बाहर नहीं निकलने दे रहे थे। विभागीय टीम ने पंपलेट बांटकर लोगों को  तेंदुए से बचने के उपायों के बारे में जागरूक किया था। करीब दो साल पहले भी पानीपत के यमुना से सटे गांव बहरामपुर के पास वन विभाग और पुलिस टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को पकड़ा था। हालांकि इस रेस्क्यू के दौरान तेंदुए ने पांच पुलिसकर्मियों और वन विभाग के दो कर्मचारियों को भी घायल कर दिया था। 

जानवरों का रिहायशी इलाकों में आने  की घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जानवर इन इलाकों की ओर रुख क्यों कर रहे हैं। बढ़ती इंसानी आबादी और घटते जंगल इसका एक बड़ा कारण हो सकते हैं। क्या पता ये रिहायशी इलाके कभी जानवरों का घर रहे हों। क्या वह अपने पुराने घरों की ओर लौट रहे हैं। क्या हम इंसानों ने उनका इलाका, उनका आशियाना छीन लिया है। जहां वह कभी शान से रहते थे वहां आदमी ने गगनचुंबी इमारतें बना ली हैं। सवाल कई हैं जिनके सवाल हमें जानने जरूरी हैं।

वन्य जीव संरक्षण विशेषज्ञों के मुताबिक वन से सटे इलाकों में वह सुरक्षित ठिकाने की तलाश में घूमते हैं। इस कारण वह कई बार रिहायशी इलाकों में दिख जाते हैं। रिहायशी इलाकों में जंगली जानवर क्यों पहुंच रहे हैं इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं। कुनबे में संघर्ष शुरू होने और गर्मी  की वजह से भोजन व पीने के पानी  की कमी होने के चलते तेंदुए रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। जानकारों  के मुताबिक तेंदुए की औसतन उम्र 12 से 14 साल मानी जाती है। दो साल से अधिक उम्र होने पर उसे वयस्क माना जाता है। जब तक वह दो साल से कम उम्र का रहता है, अपने कुनबे में आराम से रहता है। जैसे ही उसकी उम्र अधिक होती है उसे भगा दिया जाता है यानी कम से कम पांच किलोमीटर के दायरे से बाहर कर दिया जाता है। एक नर एवं एक मादा तेंदुआ ही पांच किलोमीटर के दायरे में साथ रह सकते हैं। इलाके की बेहतर जानकारी न होने की वजह से कई बार तेंदुए भटकते हुए रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान अरावली पहाड़ी क्षेत्र में खनन कार्य पर काफी हद तक प्रतिबंध की वजह से एवं बारिश अच्छी होने की वजह से कहीं-कहीं हरियाली काफी बढ़ी है। इस वजह से वन्य जीवों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। इन इलाकों में तेंदुआ की जनसँख्या भी बढ़ी होगी. मांगर, दमदमा, बंधवाड़ी, मंडावर, भोंडसी, खेड़ली एवं मानेसर सहित अरावली के कई इलाकों में काफी घने जंगल हैं। बता दें क्षेत्र के दायरे में दिल्ली के कुछ इलाकों के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, मेवात, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ एवं भिवानी जिले आते हैं।

जानकारों का कहना है  कि अरावली पहाड़ी को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है। वन्य जीवों की संख्या कम नहीं है। रिहायशी इलाकों में वन्य जीवों का पहुंचना निश्चित रूप से दो बातों को प्रमाणित करता है। पहली बात कुनबे में संघर्ष शुरू हो गया है व दूसरी बात बदले हुए मौसम  की वजह से खेती व बिल्डिंग्स बनाने के लिए जंगलों के काटे जाने की वजह से  सिकुड़ते हुए जंगल में उनके  भोजन व पानी की कमी हो गई है।

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