Friday, July 19, 2024
Newspaper and Magzine


कृषि विज्ञान केन्द्र ऊझा में धान की उत्पादन तकनीक व वर्तमान परिदृश्य पर हुआ किसान गोष्ठी का आयोजन.  

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at June 12, 2024 Tags: , , , ,

-कृषि विशेषज्ञों ने धान गेहूं फसल चक्र के बारे में विस्तार से कि चर्चा
-धान की सीधी बिजाई से पानी की बचत और भूमिगत जल स्तर में होती बढ़ोतरी  गोष्ठी में प्रगतिशील किसानों ने रखे अपने अनुभव.

BOL PANIPAT : 12 जून।  कृषि विज्ञान केंद्र उझा में धान उत्पादन की तकनीक व वर्तमान परिदृश्य पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।  गोष्ठी में डॉक्टर संतोष कुमार सिंह, वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ यू एस  एंबेसी, अमिलिया ग्रेटॉक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्लेषक व  जेसिका, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्लेषक ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, विस्तार कार्यकर्ताओं आदि के साथ विस्तार से चर्चा की। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य धान की उत्पादन तकनीक व वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के  वरिष्ठ संयोजक डॉक्टर राजबीर  गर्ग ने धान गेहूं फसल चक्र के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि यह फसल चक्र केवल पानीपत जिले का ही नहीं बल्कि हरियाणा प्रांत का मुख्य फसल चक्र है, यहां किसान  मुख्य तौर पर बासमती धान व गैर बासमती धान की खेती करते हैं।  कृषि विज्ञान केंद्र व कृषि विभाग द्वारा फसल विविधीकरण के लिए काफी प्रयास किया गया परंतु फिर भी पानीपत जिले के किसान धान और गेहूं फसल चक्र को ज्यादा महत्व देते हैं क्योंकि इस  फसल चक्र में किसानों को आश्वासित लाभ के साथ-साथ बेचने में भी किसी तरह की कोई समस्या नहीं आती।
उन्होंने संसाधन संरक्षण तकनीकों जैसे धान की सीधी बिजाई व फसल अवशेष प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि धान की सीधी बिजाई में न केवल पानी की बचत होती है बल्कि इसके साथ-साथ भूमिगत जल स्तर में भी बढ़ोतरी होती है।  उन्होंने किसानों से अपील की कि  इस तकनीक को ज्यादा से ज्यादा अपनाए।  
इस अवसर पर डॉक्टर संतोष कुमार सिंह, प्रतिनिधि, यू एस एंबेसी ने बताया कि कई बार धान की फसल में अंधाधुंध कीटनाशकों का स्प्रे करने से उसके अवशेष चावल में रह जाते हैं जिसकी वजह से विदेश में निर्यातित धान  के खेप  वापिस आ जाते हैं। जिसका सीधा सीधा असर धान के भाव पर पड़ता है।  उन्होंने किसानों से अपील है कि वे वैज्ञानिकों के परामर्श के आधार पर ही कीटनाशकों का प्रयोग सही मात्रा में, सही समय पर, व सही कीड़े के लिए उपयोग करें।  उन्होंने बताया कि आने वाले समय में किसानों को  समूह में खेती की तरफ बढऩा पड़ेगा व बाजार की  मांग के हिसाब से फसलों का चयन करना पड़ेगा।   इस अवसर पर श्रीमती अमिलिया ग्रेटॉक और श्रीमती जेसिका, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्लेषक के बताया कि विश्व में खाद्य सुरक्षा के लिए धान की खेती का विशेष महत्व है।  उन्होंने धान की खेती पर उनके विभिन्न देशों के अनुभवों को साझा किया।   इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसडीओ डॉक्टर देवेन्द्र कुहाड़ ने विभाग की स्कीमों के बारे में विस्तार से चर्चा की।  उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, फसल अवशेष प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर विशेष बल दिया।  उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि  स्कीमों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।   इस अवसर पर प्रगतिशील किसान प्रीतम सिंह ने बताया कि जिले में धान की खेती का  क्षेत्रफल ज्यादा होने के पीछे मुख्य कारण यह है कि यहां का भौगोलिक वातावरण इस फसल के उत्पादन के लिए काफी अच्छा है।  उन्होंने बासमती धान की छोटी अवधि की किस्मों  को अपनाने पर विशेष बल दिया, क्योंकि इसमें पानी की विशेष बचत होती है।   इस अवसर पर श्री सुरेश बडोली ने बताया कि हम धान की छोटी अवधि की किस्म को लगाकर फसल अवशेषों का आसानी से प्रबंध कर सकते हैं,  इसके साथ-साथ हमें फसल विविधीकरण को  भी अपनाना पड़ेगा, ताकि हमारे किसान भाइयों की आमदनी में इजाफा हो सके।   इस अवसर पर डॉ सतपाल, डॉक्टर मोहित सहल, डॉ कुलदीप डूडी, डॉ राजेश, डॉक्टर सुनील, डॉ राधेश्याम गुप्ता, श्री राजकुमार, श्री बलविंदर सिंह, रविंद्र राठी, संदीप त्यागी, महावीर भारद्वाज, विजेंद्र, भूतपूर्व सरपंच श्रीमती किरण, गोला खुर्द ने भी अपने विचार समझा किए।

Comments