एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में स्वामी विवेकानंद के साहित्य की प्रदर्शनी सह बिक्री का भव्य आयोजन.
–भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव और रामकृष्ण मिशन की 125वीं वर्षगाँठ के अवसर पर हुआ आयोजन
–किताबी शिक्षा और व्यवहारिक प्रयोगों से युवा मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते है: नरेश गोयल सचिव
BOL PANIPAT , 20 जनवरी. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ‘विवेकानंद विचार दर्शन’ नामक मोबाइल बुक स्टाल (चल पुस्तकालय) का आयोजन किया गया जिसमें में स्वामी विवेकानंद के साहित्य की प्रदर्शनी सह बिक्री को युवाओं और आमजन के लिए प्रदर्शित किया गया । प्रदर्शनी का उदघाटन संजय भाटिया सांसद लोकसभा करनाल ने किया । अति विशिष्ट उपस्थिति में अनूप गर्ग प्रधान एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत, नरेश गोयल सचिव एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत, पवन गर्ग चेयरमैन एसडी इंटरनेशनल स्कूल, विनोद गुप्ता चेयरमैन एमएएसडी पब्लिक स्कूल, आकाश गर्ग चेयरमैन एसडी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस, श्रीकृष्ण अग्रवाल ऑडिटर एसडी वीएम सिटी, प्रमोद कुमार बंसल प्रधान एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और फ़क़ीर चंद मैनेजर एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल उपस्थित रहे । एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, महेंद्र कुमार अग्रवाल जनरल सेक्रेटरी, विशाल गोयल कोषाध्यक्ष और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने मेहमानों का स्वागत किया । यह आयोजन भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव और रामकृष्ण मिशन की 125वीं वर्षगाँठ के अवसर पर किया गया जिसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं पर ध्यान केन्द्रित करना है ताकि उन्हें समग्र विकास और संस्कृति के साथ अपने चरित्र को आकार देने में मदद मिल सके जो भारत के विकास में योगदान होगा । प्रदर्शनी में सिर्फ स्वामी विवेकानंद की ही सैंकड़ों पुस्तकों को शामिल किया गया जिसमे आत्म-विश्वास, ध्यान, एकाग्रता का रहस्य, इच्छा शक्ति और इसके विकास, गीता वेदान्त आदि विषयों पर पुस्तकें शामिल रही । यह आयोजन रामकृष्ण मिशन चंडीगढ़ और रामकृष्ण मठ पुणे के संयुक्त प्रयासों से किया गया । प्रदर्शनी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रही जिसमे कॉलेज के विद्यार्थियों और एन.एस.एस. स्वयंसेवकों के खूब रूचि ली और पुस्तकों को पढ़ा और ख़रीदा । बच्चों के लिए भी विशेष पुस्तकें, सचित्र कहानियाँ, पोस्टर्स, उपहार पैकेट और भारत की महान महिलाओं पर आधारित किताबों को भी प्रदर्शनी में जगह मिली । प्रदर्शनी की समन्वयक डॉ संगीता गुप्ता रही ।

नरेश गोयल सचिव एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के नवभारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है । इस देश के युवा का स्वास्थ्य व संस्कार राष्ट्र की सुदृढ़ता व बहुआयामी प्रगति का आधार है । स्वस्थ युवा, स्वस्थ राष्ट्र की नींव है । इस प्रकार की पुस्तक प्रदर्शनी से न सिर्फ युवाओं के ज्ञान में वृद्धि होती है बल्कि उनके चरित्र का भी निर्माण होता है । किताबी शिक्षा और व्यवहारिक प्रयोगों से युवा मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते है । कॉलेज विगत कई वर्षों से स्वामी विवेकानंद-जीवन-दर्शन-साहित्य-संदेश विषयों पर सक्रियता से अनेक कार्यक्रम आयोजित करता रहा है । स्वामी जी भली-भांति जानते थे कि हमारे शक्तिमान, बुद्धिमान, पवित्र और नि:स्वार्थ युवा ही भारत के गौरव को स्थापित और आगे बढ़ा सकते है । युवा ही भारत और संपूर्ण संसार का उत्थान कर सकते हैं परन्तु ऐसा करते समय युवाओं को कठिन परिश्रम करना होगा और अपना आलस्य त्यागना होगा । स्वामी जी चाहते थे कि भारतीय युवा पश्चिम से तकनीक और प्रौद्योगिकी का ज्ञान तो प्राप्त करें परंतु बदले में उन्हें भारतीय धर्म और दर्शन के उदात्त मूल्यों से परिचित कराएं । वेदांत दर्शन के मर्म को गहराई से समझने वाले स्वामी जी ने युवकों को ‘आत्म दीपो भव’ की शिक्षा दी । वे चाहते थे कि हमारे युवा महत्वाकांक्षी बने और बड़े-बड़े सपने देखें और फिर बड़े आदर्शों को लेकर महान कार्य करें । स्वामीजी भारतीय समाज को स्वाभिमानी बनाने तथा एकजुट होने की उन्होंने प्रेरणा देते रहे और अब हर युवा का दायित्व है कि वह उनके दूरदर्शी दर्शन को अपने व्यवहार में साकार कर इस देश के साथ-साथ सम्पूर्ण दुनिया का मार्गदर्शन करे ।
दिनेश गोयल प्रधान ने कहा कि युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की अमूल्य संपदा एवं प्राणतत्व है । युवा ही हमारी गति, स्फूर्ति, चेतना, प्रज्ञा और राष्ट्र का ओज है । जिस व्यक्ति की ऊर्जा अक्षुण्ण है, जिसका यश अक्षय है, जिसका जीवन अंतहीन है, जिसका पराक्रम अपराजेय है, जिसकी आस्था अडिग है और संकल्प अटल है वही सच्चे मायनों में युवा है । जो अपनी शक्ति, सामर्थ्य और साहस से राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने का दायित्व सहर्ष स्वीकारता है वही युवा है ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस पुस्तक प्रदर्शनी के माध्यम से इन पुस्तकों का लाभ लेकर युवा अपने जीवन के उद्देश्य को पायेगा और भारत के उत्थान में अपना सक्रिय योगदान देगा । भारत सर्वाधिक युवा प्रधान देश है। परंतु हमारी युवा शक्ति जाति-धर्म-भाषा-क्षेत्र के आधार पर विभाजित है । स्वामी विवेकानंद के सपनों के भारत के निर्माण के लिए युवा मन में राष्ट्रीय संस्कार का उदय होना आवश्यक है । राष्ट्र सर्वोपरि प्रत्येक युवा का सबसे बड़ा धर्म व प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान समय में युवा ऊर्जा का संगठित होना अति आवश्यक है। स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं । स्वामी विवेकानंद ने स्वस्थ एवं संस्कारित युवा को राष्ट्रीय उत्थान का मूल माना है। प्राचार्य ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन विषय पर संबोधित किया । उन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष स्वामी विवेकानंद के कुछ महावाक्य का व्याख्यान किया । स्वामी विवेकानंद का लोकप्रिय महावाक्य ‘उठो, जागो, रुको नहीं जब तक ध्येय की प्राप्ति ना हो’ स्वामी विवेकानंद की इस शिक्षा को यदि विद्यार्थी अपने जीवन आचरण में अपनाते हैं तो ऊर्जा और एकाग्रता से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं तथा राष्ट्र विकास में सहयोग दे सकते हैं ।
इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ राकेश गर्ग, प्रो मनोज कुमार, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला आदि उपस्थित रहे ।

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