एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) का शानदार समापन.
–17 राज्यों के 200 स्वयंसेवकों और प्रोग्राम ऑफिसर्स ने नम आँखों से की विदाई
–राष्ट्रीय एकता हमारे राष्ट्र के विकास की प्रेरक शक्ति है: देसराज, फील्ड ऑफिसर क्षेत्रीय निदेशालय युवा एवं खेल मंत्रालय नई दिल्ली
–सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक (पुरुष): सौरभ पाण्डेय, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत
–सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक (महिला): ईशा, डीएन कॉलेज कुरुक्षेत्र
BOL PANIPAT , 27 अक्टूबर,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) के समापन दिन 17 राज्यों के 200 स्वयंसेवकों ने नम आँखों और कॉलेज प्रांगण में प्राप्त किये अनुभवों के साथ कैंप को अलविदा कहा । समापन समारोह के मुख्य अतिथि देसराज फील्ड ऑफिसर क्षेत्रीय निदेशालय युवा एवं खेल मंत्रालय नई दिल्ली रहे जबकि बतौर विशिष्ट मेहमान कैंप समन्वयक डॉ आनंद कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविधालय और योग प्रशिक्षक बलवान शर्मा ने शिरकत की और स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र और ट्राफी भेंट की । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, और डॉ संतोष कुमारी ने पौधा-रोपित गमला भेंट करके किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी नेकिया । अंतिम दिन की शरुआत झारखण्ड के स्वयंसेवकों द्वारा एनएसएस गीत गाकर हुई । साक्षी ने ‘वीर हनुमाना अति बलवाना’ गीत गाकर सभी का मन मोह लिया । सात दिवसीय कैंप की विस्तृत रिपोर्ट जीवीएम गर्ल्स कॉलेज सोनीपत की ख़ुशी ने पढ़ी । प्रो फारुख ने ‘पत्थर के सनम तुझे हमने’ गीत पेश किया । डॉ एल मंजू भार्गवी ने ‘संदेशे आते है’ गीत गाकर हाल में हलचल मचा दी । सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक (पुरुष) का इनाम सौरभ पाण्डेय एसडी पीजी कॉलेज पानीपत और
सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक (महिला) का इनाम ईशा डीएन कॉलेज कुरुक्षेत्र ने हासिल किया । सुमित मलान कुरुक्षेत्र विश्वविधालय को आयोजन समिति में उनके योगदान के लिए विशेष सराहना मिली । सात दिवसीय काम उच्तर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित था जिसे कुरुक्षेत्र विश्वविधालय एनएसएस विभाग और एनएसएस क्षेत्रीय निदेशालय युवा एवं खेल मंत्रालय दिल्ली का भरपूर सहयोग मिला ।
राष्ट्रीय एकता शिविर में डॉ तेनजिन नोर्जोम भूटिया डाईट गंतोक (सिक्किम), डॉ राम कुमार वर्मा शारदा देवी डिग्री कॉलेज झाँसी, डॉ शशीकला कुमारी एसपी जैन कॉलेज सासाराम (बिहार), डॉ एल मंजू भार्गवी पल्लागटी अदावप्पा आर्ट एंड कॉमर्स फर्स्ट ग्रेड कॉलेज तिप्तुर (कर्नाटक), डॉ प्रद्यानंद घनश्याम मते राष्ट्रसंत तुकाडोजी महाराज नागपुर विश्वविधालय (महाराष्ट्र), डॉ परमिंदर कौर बेबे नानकी महिला खालसा कॉलेज गुरदासपुर (पंजाब), डॉ युपेश कुमार डीपी विप्रा कॉलेज बिलासपुर (भोपाल), डॉ आरती दुबे डीएवीवी इंदौर (मध्य प्रदेश), डॉ जय प्रकाश रजक रांची विश्वविधालय रांची, डॉ गोपाल भाई लकुम गुजरात विश्वविधालय, डॉ राम कुमार वर्मा श्री गुरु हर किशन डिग्री कॉलेज झांसी (बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी) आदि ने हिस्सा लिया ।
देसराज ने कहा कि राष्ट्रीय एकता शिविर हिस्सा बने स्वयंसेवकों और प्रोग्राम ऑफिसर्स ने अवश्य ही एक समृद्ध और प्रेरणादायक अनुभव प्राप्त किया होगा । विभिन्न राज्यों द्वारा एक दूसरे के साथ साझा की गई रंग-बिरंगी संस्कृतियों, परंपराओं और संस्कृति ने राष्ट्रीय स्तर पर उनकी समझ और महत्व को गहरा किया होगा । सहयोगात्मक गतिविधियों, विद्वतापूर्ण व्याख्यानों और परिचर्चाओं ने भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा दिया है इसका उन्हें पूर्ण भरोसा है । भारत जैसे बहुसांस्कृतिक राष्ट्र की संस्कृति को सात दिन में समझ लेना आसान नहीं है परन्तु इस कैंप ने कम से कम इस दिशा में पहल तो की है जिसे आगे ये 200 स्वयंसेवक बढ़ाएंगे । इस कैंप से देश के एकीकरण को बढ़ावा मिला है ।
डॉ आनंद कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय एकता शिविर का मुख्य उद्देश्य एक-दूसरे राज्यों की संस्कृति का आदान-प्रदान करना है । सभी राज्य के युवा शिविर में अपने राज्यों की संस्कृति की झलक पेश करते है और एक-दूसरे राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को जान पाते है । इस शिविर में स्वयंसेवकों का अनुशासन देखने लायक रहा जिस पर उन्हें गर्व है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय एकता शिविर (एनआईसी) प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है और प्रत्येक शिविर की अवधि दिन-रात के भोजन और आवास के साथ 7 दिनों की रहती है । यह कैंप देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किए जाते हैं और कॉलेज को इसकी मेजबानी मिलना कॉलेज के लिए गर्व और हर्ष की बात है । राष्ट्रीय एकता शिविर को आयोजित करने का उद्देश्य एनएसएस स्वयंसेवकों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, हमारे गौरवपूर्ण इतिहास और भारत के बारे में ज्ञान के माध्यम से राष्ट्रीय गौरव को महसूस कराना है । समाज सेवा के माध्यम से राष्ट्र को एकीकृत करना भी इस शिविर का बड़ा उद्देश्य है । कॉलेज प्रबंधन ने भी कैंप के आयोजन में पूर्ण सहयोग दिया ।
कैंप में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम और इनाम भी अंतिम दिन दिए गए:
पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता-
प्रथम ख़ुशी जीवीएम गर्ल्स कॉलेज सोनीपत
द्वितीय पंकज कुमार बुंदेलखंड विश्वविधालय झाँसी
तृतीय साहिल डीक्रस्ट मुरथल सोनीपत
स्लोगन लेखन प्रतियोगिता-
प्रथम सुभाष एसएन पीजी कॉलेज खंडवा मध्य प्रदेश
द्वितीय अश्मिता सूर्यवंशी बुंदेलखंड विश्वविधालय बरेली
तृतीय सरगम सीओए कौल कैथल
भाषण प्रतियोगिता-
प्रथम मुस्कान निमोदिया जेसी बोस यूनिवर्सिटी फरीदाबाद
द्वितीय अंकित केएलपी कॉलेज रेवाड़ी
रवि कुमार वर्मा आरएलएसवाई कॉलेज रांची
तृतीय सौरभ एसडी पीजी कॉलेज पानीपत
मानसी हिन्दू गर्ल्स कॉलेज सोनीपत
दभी वैशाली एलडी गर्ल्स कॉलेज गुजरात
एकल गायन प्रतियोगिता-
प्रथम दीक्षा डाईट गंगटोक सिक्किम
द्वितीय शिवानी जीसीडब्लू लाखन माजरा रोहतक
तृतीय सुमित भालेकर राजकीय महाविधालय इंदौर मध्य प्रदेश
काव्य-पाठ प्रतियोगिता-
प्रथम शिवानी आईजी (पीजी) एमएमवी कैथल
द्वितीय देवा राम केन्द्रीय विश्वविधालय हरियाणा
तृतीय अनिषा राजकीय महाविधालय पलवल कुरुक्षेत्र
सागर सिंह रावत डीबीएस पीजी कॉलेज उत्तराखंड
कवेंद्र बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झाँसी
मेहँदी प्रतियोगिता-
प्रथम सौरभ बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झाँसी
द्वितीय अंजलि राजकीय महाविधालत सेक्टर 14 करनाल
तृतीय तनिषा गोस्वामी राजकीय महिला महाविधालय मध्य प्रदेश
रंगोली प्रतियोगिता-
प्रथम मोहित कुमार एसडी पीजी कॉलेज पानीपत
स्वाति एसडी पीजी कॉलेज पानीपत
द्वितीय सोनी काव्या एलडी आर्ट्स कॉलेज गुजरात
ओवैस बशीर जम्मू और कश्मीर विश्वविधालय
तृतीय ऋतिका राज महाराजा कॉलेज अरा बिहार
सानिया विष्णु एस चंद्रा महिला कॉलेज महाराष्ट्र
नवीना राजकीय महाविधालय सेक्टर 14 करनाल
डॉ राम कुमार वर्मा (झांसी) ने कहा कि इस शिविर में उन्होनें आमंत्रित विशेषज्ञों, अनुभवी अधिकारियों और देश भर से आये स्वयंसेवकों से बहुत कुछ सीखा है । यह एक ऐसा अनुभव रहा जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगे ।
डॉ गोपाल लकुम (गुजरात) ने कहा कि इस कैंप में स्वयंसेवकों ने टीम भावना और विभिन्न राज्यों की संस्कृति को समझा । पूरे कैंप का आयोजन व्यवस्थित और आरामदायक था ।
डॉ. एल मंजू भार्गवी (कर्नाटक) ने कहा कि उनका इस कैंप का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा । जब वे 21 अक्टूबर को पानीपत पहुंचे थे तो उनके मन में भाषा और भोजन को लेकर शंकाएं थी परन्तु सात दिन यहाँ बिताकर उन्हें घर जैसा ही अहसास हुआ । सभी ने उनका और कर्नाटक से आये स्वयंसेवकों का अच्छे से ख्याल रखा ।

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